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Tuesday, January 19, 2021

हाथरस गैंगरेप : पुलिसिया कार्रवाई पर भडकी उमा भारती, उठाए गंभीर सवाल

–विपक्षी नेताओं और मीडिया को परिवार से मिलने दें : उमा भारती
–पुलिसिया कार्रवाई से UP सरकार और भाजपा की छवि पर आंच आई
–भाजपा की फायरब्रांड नेता ने दागे कई सवाल, कहा-मैं ठीक होती तो जरूर जाती

(अदिति सिंह)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने उत्तर प्रदेश के हाथरस गैंगरेप और हत्या के मामले में सवालों के घेर में आई यूपी पुलिस को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में इंसाफ की अपील की हैं। उमा भारती ने कहा है कि अगर मैं कोरोना पॉजिटिव ना होती तो आज उस परिवार के साथ वहां बैठी होती। यूपी से सांसद उमा भारती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि मीडिया और विपक्षी नेताओं को पीडि़त परिवार से मिलने दें। उन्होंने कहा कि हमने अभी राम मंदिर का शिलान्यास किया है तथा आगे देश में रामराज्य लाने का दावा किया है। लेकिन इस घटना पर पुलिस की संदेहपूर्ण कार्यवाही से उत्तर प्रदेश सरकार की तथा भारतीय जनता पार्टी की छवि पर आंच आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुकी उमा भारती ने अपने छठें ट्वीट में योगी आदित्यनाथ को एक बहुत ही साफ़ सुधरी छवि काशासक करार दिया, साथ ही कहा कि आप अन्य राजनीतिक दलो के लोगों को पीडि़त परिवार से मिलने दीजिये।

उमा भारती ने लिखा, मैंने हाथरस की घटना देखी, पहले तो मुझे लगा कि मैं ना बोलूं क्योंकि मुझे लगा कि आप इस संबंध में ठीक ही कार्यवाही कर रहे होंगे, लेकिन जिस प्रकार से पुलिस ने गांव के पीडि़त परिवार की घेराबंदी की है उससे विभिन्न आशंकाएं जन्मती हैं। एक अन्य ट्वीट में उमा भारती ने कहा कि एक दलित परिवार की बिटिया थी। बड़ी जल्दबाजी में पुलिस ने उसकी अत्येष्टि की और एक परिवार एवं गांव की पुलिस के द्वारा घेराबंदी कर दी गई है। मेरी जानकारी में ऐसा कोई नियम नहीं है कि एसआईटी जांच में परिवार किसी से मिल ना पाए। भाजपा की फायरब्रांड नेता ने अपने अगले ट्वीट में लिखा, इस घटना पर पुलिस की संदेहपूर्ण कार्यवाही से आपकी यानि यूपी सरकार की और बीजेपी की छवि पर आंच आई है।

बता दें कि हाथरस गैंगरेप और उसके बाद आधी रात को लड़की का शव जला देने के बाद लोगों में शक और ज्यादा गहरा गया है। जिसके चलते सवाल उठने लगे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता खुलकर तो नहीं बोल रहे हैं, लेकिन दबी जुबान से मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने बहुत जल्दीबाजी दिखाई है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। मामला इतना तूल पकड़ लिया है कि अब तो हाईकोर्ट ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी कर डाली है।

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