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Friday, January 22, 2021

भारतीय रेलवे में 50 हजार ‘नेताओं’ के ‘पर’ कतरने की तैयारी

यूनियनों से जुड़े नेताओं को दिया जाएगा जबरन रिटायरमेंट 

–हर रेल मंडल में यूनियन से जुड़े 250 रेलकर्मी चिन्हित
–यूनियन के नेताओं की सुविधाओं केा पहले खत्म करेगी रेलवे
–काम न करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर लटकी तलवार

नई दिल्ली/खुशबू पाण्डेय : भारतीय रेलवे में यूनियनों के नाम पर नौकरी न करने वाले करीब 50 हजार रेल कर्मचारियों के पर कतरने की तैयारी चल रही है। इसके लिए भारतीय रेलवे देशभर में ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर रहा है, जो तय शुदा जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर रहे हैं। रेलवे सबसे पहले इनकी सुविधाओं में कटौती करने की तैयारी कर रहा है, जो यूनियनों के नाम पर पदाधिकारी ले रहे हैं। रेल मंत्रालय ने देशभर के प्रत्येक रेल मंडलों के कार्यक्षेत्र में तैनात एंव यूनियनों से सीधे तौर पर जुड़े करीब 250-250 कर्मचारी को चिंहित किया गया है, जो सिर्फ यूनियनों का ही काम करते हैं। ये लोग रेलवे का कोई काम जिम्मेदारी से नहीं करते हैं। इन कर्मचारियों पर रेल मंत्रालय सीधे तौर पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों की माने तो मंत्रालय की जो तैयारी है उसके मुताबिक देशभर में यूनियन से जुड़े टॉप के कुछेक नेताओं को छोड़कर बाकी सभी नेताओं की सुविधाएं खत्म करने की तैयारी कर ली गई है।

रेल मंत्रालय ने 22 अफसरों, 10 कर्मचारियों को नौकरी से किया बाहर

बता दें कि भारतीय रेलवे में देशभर में करीब 13 लाख से अधिक कर्मचारी विभिन्न श्रेणियों में हैं। रेलवे में कुल 68 रेल मंडल हैं। जबकि, जोनल हेडक्र्वाटर (क्षेत्रीय मुख्यालय) कुल 17 हंै। इसके अलावा देशभर में कुल 7 प्रोडक्शन यूनिटें (कोच फैक्टरी) हैं, जो डिब्बा, इंजन, पहिया बनाती हैं। सबसे ज्यादा मुख्यालयों पर सियासत होती है, नतीजन कुछ रेल मुख्यालयों पर 500 कर्मचारी भी चिन्हित किए गए हैं, जो अपने काम की बजाय यूनियनों का झंडा उठाये रहते हैं। इसके अलावा कहीं 300 कर्मचारी भी हैं, जिनपर शिकंजा कसा जाने की तैयारी है।

कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेँट भी करवा सकती है रेलवे 

सूत्रों की माने तो भारतीय रेलवे यूनियन से जुड़े इन कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेँट भी करवा सकती है, ऐसी बात चल रही है। रेलवे ने जबरन रिटायरमेंट की शुरुआत भी कर चुकी है। अभी इसी हफ्ते 22 निदेशक स्तर के वरिष्ठ नौकरशाहों एवं 10 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर किया गया है। इसी क्रम में रेल मंत्रालय रेल यूनियनों की चौधराहट करने वाले उन नेताओं को बाहर करने की फिराक में है, जो रेलवे का पूरा सुख भोगते हैं, लेकिन काम कुछ भी नहीं करते हैं। रेल मंत्रालय अपने इस अभियान में सफल होता है तो सीधे तौर पर देशभर में तैनात करीब 50 हजार कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया जाएगा।

यूनियनों को खत्म करने का सवाल ही नहीं : शिव गोपाल मिश्रा

 

आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि भारतीय रेलवे में यूनियनों को खत्म करने का केाई सवाल ही नहीं उठता है। बावजूद इसके अगर कुछ ऐसा रेल मंत्रालय करने जा रही है तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि फेडरेशन रेलवे के अगले कदम एवं तैयारियों की स्टडी कर रहा है। बहुत जल्द इसपर कुछ बड़ा फैसला लिया जाएगा। मिश्रा की माने तो रेल मंत्रालय ने कुछ दिन पहले दिल्ली में 2 दिन की परिवर्तन संगोष्ठी की है। ये संगोष्ठी परिवर्तन की नहीं बल्कि रेलवे समापन संगोष्ठी होगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग रेलवे को बेचने का प्रयास कर रहे हैं और यूनियन उन्हें ऐसा करने से रोक रहीं है। यही कारण है कि वह जानबूझ कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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