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Friday, January 22, 2021

घरेलू हिंसा के प्रति महिलाओं में जागरुकता जरूरी, निडर होकर आगे आएं

—महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की रोकथाम के कानून का हो रहा है दुरूपयोग !
–राष्ट्रीय वेबिनार में बोलीं न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा, कहा-शिक्षित करना जरूरी
–कड़े कानून एवं पुलिस के प्रभावी क्रियान्वन के प्रयास जन सहयोग के बिना अधूरे

नई दिल्ली /मानव शर्मा : भागीदारी जन सहयोग समिति एवं दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं पंजाब की राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरणों की प्रमुख भागीदारी के साथ मिलकर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इस मौके पर न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा (पूर्व न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट) ने स्वीकार किया कि महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की रोकथाम के अधिनियमन का दुरूपयोग भी हो रहा है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने लैंगिक संवेदनशीलता के बारे में युवा लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। भागीदारी जन सहयोग समिति के महासचिव विजय गौड़ ने कहा की कड़े कानून एवं पुलिस के प्रभावी क्रियान्वन के प्रयास जन सहयोग के बिना अधूरे हैं, जिसके चलते अपराधी गवाहियों एवं सबूतों के अभाव में सजा से बच जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश प्राधिकरण की सदस्य सचिव न्यायाधीश जवाप्लू चाई ने कहा कि राज्य में बहुविवाह की समस्या के हल के लिए महिलाओं को कानूनी साक्षरता अभियानों द्वारा शिक्षित किया जा रहा है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके। पूर्व अतिरिक्त उपायक्त पुलिस दिल्ली एस के तोमर ने घरेलू हिंसा के मामलों में महिला प्रकोष्ठ की भूमिका और पुलिस मशीनरी के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। दिल्ली प्राधिकरण की अतिरिक्त सचिव न्यायाधीश नमृता अग्रवाल ने प्राधिकरण की एक बहुत ही अभिनव पहल पर चर्चा की, जहां प्राधिकरण ने मदर डेयरी बूथ और फार्मासिस्ट शॉप के साथ मिलकर घरेलू शोषण की रिपोर्टिंग के लिए एक केंद्र के रूप में काम करने का माध्यम बनाया जो सफल साबित हुआ।

राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य डा. राजुलबेन देसाई ने घरेलू हिंसा के पीडि़तों को सहायता प्रदान करने में राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि घरेलू हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए महिलाओं मे जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वे निडर होकर न्याय के लिए आगे आये।

रचनात्मक प्रयोग एवं प्रयास से की पीडि़त महिलाओं की मदद

पंजाब प्राधिकरण के अतिरिक्त सदस्य सचिव न्यायाधीश डा. मनदीप मित्तल ने अपने अनुभव को साझा किया। साथ ही बताया की जब पंजाब में ऐसे मामले बढ़ रहे थे जहां पुरुष अपनी पत्नी को छोड़कर विदेश भाग रहे थे। उन्होंने अपने रचनात्मक प्रयोग एवं प्रयास से कानून के प्रावधानों को पीडि़त महिलाओं के हित मे प्रयोग करते हुए अध्ययन किया। किसी व्यक्ति के पासपोर्ट को निलंबित करने के लिए अदालत की शक्ति कैसे इस तरह के मामलों में अभियुक्त को बुलाने में मदद करती है और इस तरह उन्होने अनेको पीडि़त महिलाओं की मदद की।

महिलाओं को स्वतंत्र होने के लिए प्रोत्साहित किया

पंजाब पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक गुरप्रीत दियो ने कानून के उचित कार्यान्वयन पर जोर दिया और महिलाओं को स्वतंत्र होने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने काउंसलिंग में पुलिस की भूमिका और पंजाब पुलिस की पहल जैसे महिला मित्र के बारे में बताया, जिसमें महिला अधिकारियों को पीडि़त के प्रति संवेदनशील होने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

जागरूकता फैलाने में प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण

मणिपुर प्राधिकरण की सदस्य सचिव न्यायाधीश जी0 गोलमई ने कानूनी जागरूकता फैलाने में प्राधिकरण की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने घरेलू हिंसा के पीडि़तों की सहायता के लिए प्राधिकरण द्वारा पुलिस और जिला प्राधिकरण परामर्श सत्र के बीच संचार की सुविधा के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों एवं संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति की उपयोगिता के बारे में भी बताया।

पीडि़त महिलाओं की काउंसलिंग जरूरी

डिविनिटी हील्स की संस्थापक निदेशिका मनीषा चोपड़ा ने घरेलू हिंसा के शिकार लोगों के सामने आने वाले आघात और पीडि़त महिलाओं की काउंसलिंग के महत्व पर प्रकाश डाला ताकि पीडि़ता अपने साथ हुए दुव्र्यवहार का सामना कर सकें। डीयू के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज की प्राचार्य डॉ0 साधना शर्मा ने कानूनी साक्षरता पर जोर दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय सेवा योजनागुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, राष्ट्रीय सेवा योजना, जेसी बोस यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, दा प्राइड वॉइस ऑफ़ राइट्स, राष्ट्रीय सेवा योजना राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी , आट्र्स फैकल्टी स्वामी विवेकानद सुभारती यूनिवर्सिटी के सहभगिता रही।

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