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Saturday, January 23, 2021

लॉकडाउन में फंसी बारात, 22 दिन से स्कूल में हैं दूल्हा, दुल्हन और बाराती

पटना / टीम डिजिटल : कोरोना के बढते प्रकोप के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देशभर में किए गए लॉकडाउन के कारण बिहार के छपरा में कोलकाता से आए 32 बाराती एक गांव में फंसे हुए हैं। इन बारातियों ने वापस कोलकाता लौटने की काफी कोशिश की लेकिन इनकी तमाम कोशिशें विफल हो गई। अब हालात यह है कि इनके पास खाने को भी पैसे नहीं बचे। लिहाजा लड़की के गांव के आसपास के लोग इन बारातियों को खाना खिला रहे हैं क्योंकि लड़की वाले गरीब हैं और 22 दिन बारात खिलाने में इनकी माली हालत खराब हो गई है।

बताया जा रहा है कि मांझी के इनायतपुर गांव में कोलकाता के फिरोज अख्तर बरात लेकर आए थे। जिनकी शादी खुशबू खातून के साथ रीति रिवाज के साथ संपन्न हुई। लेकिन शादी के अगले ही दिन यानी 23 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन हो गया और कोलकाता से आए तमाम बराती गांव में ही फंस गए। बरात पार्टी में कई महिलाएं भी शामिल थीं। लड़की वालों ने इन बारातियों को गांव के एक स्कूल में ठहरा दिया लेकिन 32 लोगों को खाना खिलाना लड़की वालों के बजट में नहीं था। लिहाजा वे भी इनसे कन्नी काटने लगे।

बारातियों के साथ ही स्कूल में रह रही है दुल्हन

बारातियों के कष्ट को देखते हुए दुल्हन भी अपने मायके को छोड़ बारातियों के साथ स्कूल में रह रही है। इस मुश्किल घड़ी में मांझी के लोग इनकी काफी मदद कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दिन दूल्हे की बारात आई थी, उसके अगले ही दिन विदाई होनी थी, तभी पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा भी हो गई। दूल्हा कोलकाता से बारात लेकर छपरा के मांझी आया था लेकिन लॉकडाउन के कारण रेलगाड़ी के साथ-साथ सड़क यातायात भी बंद हो गया। जिसके कारण दुल्हन के घरवालों ने दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को गांव के बाहर एक स्कूल में ठहरा दिया। प्रशासन से पास लेकर बारातियों ने वापस जाने की कोशिश भी की लेकिन झारखंड की सीमा से इन्हें वापस लौटा दिया गया।

लॉकडाउन की अवधि बढ़ने से परेशान हुए बाराती

छपरा में 22 दिन से 36 बारातियों ने एक स्कूल में शरण लिया हुआ है। 21 दिन किसी तरह बिताने के बाद इन बारातियों का सारा पैसा खत्म हो चुका है। लिहाजा अब गांववालों की मदद से ये लोग भोजन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन की अवधि को फिर से 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है, जिसके बाद ये लोग परेशान हो गए हैं। सभी बाराती पश्चिम बंगाल के बंदिल जंक्शन के पास स्थित भिखमहि गांव से छपरा के मांझी आये थे। अनुभव जिंदगी के सदस्य संजीव कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की मदद से तमाम बारातियों को भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। आज लॉकडाउन को आगे बढ़ा देने की प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद इन बारातियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गई हैं।

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