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Thursday, June 24, 2021
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यूपी-बिहार में हर साल 50 हजार कैंसर के नए मरीज

हर साल हो रहीं 145 मौतें। तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध लगे तो 80 से 85 प्रतिशत कैंसर के मरीज कम हो जाएंगे। यूपी व बिहार में यह आंकड़ा 80 से 90 हजार है। वाराणसी में दो साल में करीब 30 हजार मरीजों ने अपना हेल्थ चेकअप कराया है। छोटे मासूम बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। ब्रेस्ट, मुंह और गले में होने वाले कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है

(सुरेश गांधी)
तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध लगे तो 80 से 85 प्रतिशत कैंसर के मरीज कम हो जाएंगे। ये बात लगातार चिकित्सक से लेकर स्वयंसेवी संस्थाएं कह रही है। लेकिन इसका असर लोगों में दिखाई नहीं दे रहा है। परिणाम यह है कि साल दर साल कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष 15 लाख कैंसर के नए मरीज मिलते है। यूपी व बिहार में यह आंकड़ा 80 से 90 हजार है। इसमें अकेले हर साल केवल पूर्वांचल में 50 हजार नए मरीज मिलते है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके मुल्तानी ने कहा कि भारत में बढ़ते कैंसर पर नियंत्रण पाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उनका दावा है कि कैंसर की शुरुआती दौर में पहचान हो जाए तो यह ठीक हो सकता है। इसलिए साल में एक बार अपने शरीर की पूरी जांच करानी चाहिए।
बता दें, लोगों को जागरुक करने के लिए कैंसर के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन बावजूद इसके ये बीमारी अपने पैर पसार रही है। खासकर पूर्वांचल में कैंसर के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर हास्पिटल, वाराणसी में 8 महीने में करीब 85 हजार मरीजों ने अपना हेल्थ चेकअप कराया है। छोटे मासूम बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। मासूम बच्चे ब्लड कैंसर का शिकार हो रहे हैं। कई मासूम बच्चों का कैंसर का इलाज भी चल रहा है। हाल यह है कि पूर्वांचल में जिस तरह से लगातार कैंसर के मरीजों की तादाद बढ़ रही है। इससे लोगों के साथ-साथ डॉक्टर्स भी चिंतित हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि ब्रेस्ट, मुंह और गले में होने वाले कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है। लोगों का खानपान बेहतर होने के बावजूद लोगों की संख्या में इजाफा होना चिंता का विषय है। डॉक्टर्स का कहना है कि कैंसर की बीमारी बढ़ने की वजह आज की आधुनिक जीवन शैली है। आधुनिक खान-पान भी कैंसर को बढ़ावा दे रहा है।
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन खार्गेकर ने बताया कि वाराणसी में ज्यादातर मुंह गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर के मामले देखने को मिलते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2020 में दोनों अस्पतालों में 15,518 नए मरीज पंजिकृत हुए थे, जबकि साल 2019 में इसी समयावधि में 14,079 मरीजों का पंजीकरण हुआ था। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बेहतर जांच की सुविधा उपलब्ध होने के चलते समय रहते कैंसर मरीजों की पहचान हो रही है, जो कि अच्छे संकेत हैं। सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. असीम मिश्र ने बताया कि कैंसर मरीजों को अत्याधुनिक इलाज मुहैया कराने के लिए महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल प्रतिबद्ध है। इसी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए हमने अस्पताल में टोवास सर्जरी की शुरुआत की है, जिससे मुंह और गले के कैंसर का बगैर दाग के ऑपरेशन हो रहा है।

ऐसे काल बन रहा कैंसर

महिलाएं अब तक एनीमिया से परेशान थीं, लेकिन अब कैंसर के मामले भी महिलाओं में बढ़ते चले जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि वाराणसी में खतरनाक बीमारी कैंसर के अस्पताल में इलाज होने से लोगों को फायदा मिला है। यहां मरीजों को कीमोथेरेपी सहित अन्य सुविधाएं होने से आसानी से इलाज मिल रहा है। डॉक्टरों की माने तो कैंसर होने के प्रमुख पांच कारण है। इन्हें नियंत्रित रखे तो बीमारी नहीं हो सकती है। जल्द ही कैंसर का शिविर होगा। यहां युवाओं में भी कैंसर के लक्षण सामने आ रहे हैं। क्योंकि धूम्रपान, एल्कोहल व मोटापा के कारण उनमें बीमारी ज्यादा हो रही है। लोग फल व सब्जियों का उपयोग नहीं करते हैं। महिलाओं ज्यादा ध्यान नहीं देती है। इसलिए उनकी बीमारी बढ़ जाती है। 25 से 50 प्रतिशत बीमारी बढ़ने के बाद महिलाएं जांच के लिए आती है। इससे उन्हें खतरा होता है। लक्षण की शुरुआत में जांच और इलाज से बीमारी ठीक हो जाती है। मरीज को इलाज में देर नहीं करना चाहिए। साथ ही समय पर जांच व दवा लेना चाहिए।

देरी और घबराने से बढ़ती है बीमारी

कैंसर में लोग डर जाते हैं। यदि हम अपनी मौजूदा जानकारी को देखें तो कैंसर के 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों का फस्र्ट स्टेज में इलाज हो सकता है। सेकंड स्टेज में यह अनुपात करीब 70 प्रतिशत है। तीसरे चरण में 40 प्रतिशत और चैथे चरण में 10 प्रतिशत से भी कम रह जाता है। आजकल कई तरह के कैंसर को गंभीर, लेकिन काबू में आने लायक बीमारी माना जाता है। जिन्हें कैंसर के अलावा किसी भी दूसरे गंभीर रोगों की तरह दवाओं से कई साल तक काबू में रखा जा सकता है।

कारण

कैंसर और अंसचारी रोग जैसे-डायबिटीज, हाईपरटेंशन, हृदय रोग एवं लकवा के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार प्रति 100 में से 16 मरीज ब्लड प्रेशर, 7 मरीज डायबिटीज, 4 मरीज हृदय रोग, 2 मरीज लकवा के सामने आ रहे हैं। इन बीमारियों का कारण अनियमित खान-पान, मोटापा, शारीरिक व्यायाम की कमी, तंबाकू व एल्कोहल का उपयोग करना है। साथ ही गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भवती होना, गंदगी और सेहत को लेकर अनदेखी जैसे कारण प्रमुख है।

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर तेजी से बढ़ रहा

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। इसकी बड़ी वजह लाइफ स्टाइल में बदलाव और जंक फूड के ज्यादा सेवन से हार्मोनल चेंजेज से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ रहा है। क्योंकि 83 फीसदी लेडीज और 63 फीसदी पुरुष मोटापे का शिकार हैं। एक लाख महिलाओं में 33 महिलाएं इसकी शिकार हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की घातक बीमारी के लिए जरूरी हैं कि इसे शुरुआती स्टेज में ही आइडेंटिफाई कर ईलाज शुरू कर दिया जाए। ताकि मरीज के 70 प्रतिशत तक जीवित रहने की उम्मीद बनी रहे। अगर 21 साल की लड़की को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो उसका सर्वाइवल रेट कम है। लेकिन अगर किसी 50 साल की महिला को कैंसर हुआ है तो उसकी 95 फीसदी बचने की संभावना रहती है। युवा लड़कियों में उम्र के इस पड़ाव में हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। कैंसर हार्मोन पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में हार्मोन में तेजी से बदलाव के चलते ब्रेस्ट कैंसर के चांसेज बढ़ जाते हैं। लेकिन 50 साल की महिला की हार्मोन बढ़ना कम हो जाते हैं। मैनोपॉज स्टेज आ जाती है । हार्मोन में बदलाव कम हो जाते हैं, इस कारण उनको ब्रेस्ट कैंसर होने के ठीक होने के 95 फीसदी ठीक होने के चांसेज बढ़ जाते हैं।

लंग्स कैंसर के मरीज
लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण के कारण लंग्स कैंसर के मरीजों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पुरुषों में लंग्स कैंसर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसका एक मुख्य कारण धूम्रपान भी है। लेकिन सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण भी है। जिसकी वजह से लंग्स कैंसर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा गांवों के जगह शहरों में कैंसर के मरीज ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

लक्षण
तेज बुखार आना, शरीर में कंपकंपी, पसीना आना, जीभ या मुंह में घाव हो जाना, जीभ पर सफेद परत जम जाना। बलगम बनना, सांस लेने में परेशानी होना, पेशाब के दौरान जलन होना या रक्त का आना, पेट में दर्द या ऐंठन होना। गले में जकड़न, साइनस का दर्द, कान या सिर में दर्द रहना।

बचाव
डायबिटीज के रोगी तनाव से बचें, इससे ब्लड शुगर बढ़ता है और संक्रमण हुआ तो रिकवरी रेट गिरता है। बता दें, शरीर के किसी हिस्से में कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि को कैंसर कहा जाता है। लगातार बढ़ते रहने से इस टिश्यू के टुकड़े खून के रास्ते शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं और नई जगह पर विस्तार करने लगते हैं. इसे मेटास्टेसिस कहा जाता है। यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि ज्यादातर स्तन कैंसर डक्ट में छोटे कैल्शिफिकेशन (सख्त कण) के जमने से या स्तन के टिश्यू में छोटी गांठ के रूप में बनते हैं और फिर बढ़कर कैंसर में ढलने लगते हैं. इसका प्रसार लिंफोटिक चैनल या रक्त प्रवाह के जरिये अन्य अंगों की ओर हो सकता है।

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