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Sunday, April 11, 2021

22 जवानों को शहीद करने वाले नक्सलियों के खिलाफ तेज होगी जंग, सरकार का प्लान

—घटनास्थल पर पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह,शहीद सुरक्षार्किमयों को दी श्रद्धांजलि
—नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई के लिए सुरक्षार्किमयों का बलिदान याद रहेगा

(खुशबू पाण्डेय)
जगदलपुर/नयी दिल्ली : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शनिवार को नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में 22 जवानों की शहादत से देश में व्याप्त आक्रोश के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सरकार नक्सलियों के खिलाफ जारी अपनी लड़ाई को तेज करेगी। वाम उग्रवाद संबंधी स्थिति का जायजा लेने छत्तीसगढ़ पहुंचे शाह ने शहीद सुरक्षार्किमयों को श्रद्धांजलि भी दी। शाह ने बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए सुरक्षार्किमयों का बलिदान सदैव याद रखा जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बस्तर क्षेत्र में सुकमा और बीजापुर जिलों की सीमाओं के बीच हुए नक्सली हमले में 31 सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए हैं। शहीद हुए 22 जवानों में से सात कोबरा कमांडो सहित सीआरपीएफ ने अपने आठ जवानों को खो दिया। शहीद होने वालों में बस्तरिया बटालियन का एक जवान, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के आठ जवान और विशेष कार्यबल (एसटीएफ) के पांच जवान भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि एक जवान लापता है। शाह ने कहा, मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि लड़ाई (नक्सलियों के खिलाफ) रुकेगी नहीं…अब यह और तेजी के साथ जारी रहेगी। इस लड़ाई में, अंत में हमारी जीत निश्चित है। गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने देश, भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जवानों का सर्वो’च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। शाह ने कहा कि इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए देश सुरक्षार्किमयों के बलिदान को सदैव याद रखेगा। दिल्ली से जगदलपुर पहुंचने के बाद शाह ने शहीद जवानों को पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि दी जहां राष्ट्रीय ध्वज से लिपटे ताबूतों में 14 जवानों के शव रखे थे। बघेल और अन्य हस्तियों ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।

माओवादियों के खिलाफ तेज हुई लड़ाई धीमी नहीं होनी चाहिए

शाह ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में, नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना लड़ाई को दो कदम आगे ले गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सुरक्षाबलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने स्वयं ही सुझाव दिया कि माओवादियों के खिलाफ तेज हुई लड़ाई धीमी नहीं होनी चाहिए जिससे इस बात का पता चलता है कि बलों का मनोबल बरकरार और ऊंचा है। शाह ने कहा, विगत पांच-छह वर्षों में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के भीतर सुरक्षाबलों के शिविर स्थापित करने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार ने मिलकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश करने की गति को बढ़ाया है। इससे नक्सली बौखला गए हैं। उनकी हताशा के कारण इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं।

नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को तीव्रता के साथ आगे बढाएंगे

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में विकास के मोर्चे पर ढेर सारे काम हुए हैं, हालांकि कोरोना वायरस के कारण विगत एक वर्ष में गति मंद हुई है। उन्होंने कहा, लेकिन मै मानता हूं कि आदिवासी जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ के सांसदों की ओर से जितने भी सुझाव मिले हैं, उन सभी पर कार्यवाही हो रही है। शाह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास के काम को तेज करने और नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को तीव्रता के साथ आगे बढ़ाने तथा उसे दोनों मोर्चों पर अंजाम तक ले जाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरी लड़ाई को ताॢकक अंजाम तक ले जाने के लिए भारत सरकार की प्राथमिकता पहले से ही तय कर रखी है। शाह ने कहा कि वह आज छत्तीसगढ़ और भारत की जनता को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि यह जो घटना हुई है, इसके बाद इस लड़ाई को और तीव्र किया जाएगा और उसे हम निश्चित रूप से विजय में परिर्वितत करेंगे।

नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर

केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में शाह का बस्तर क्षेत्र का यह पहला दौरा है। इस बीच, एक कोबरा कमांडो का अपहरण करने के नक्सलियों के दावे का सुरक्षा एजेंसियां सत्यापन कर रही हैं। सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक शीर्ष अधिकारी ने नयी दिल्ली में कहा कि उनके पास यह मानने का कारण है कि रविवार की शाम तथाकथित माओवादी समूह द्वारा बीजापुर के एक पत्रकार को फोन कर, किया गया यह दावा सच है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हम अभी तक 210वीं कोबरा बटालियन के कमांडो राकेश्वर मिन्हास का पता नहीं लगा सके हैं। हालांकि, उनके अपहरण के नक्सलियों के दावे की पुष्टि के लिए हमारे पास ठोस सबूत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों की कई इकाइयां अभी भी जंगलों में हैं और वे जम्मू निवासी कमांडो की तलाश कर रही हैं तथा नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

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