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Sunday, April 11, 2021

संत रविदास के बताये रास्तों पर चलें और उनकी शिक्षा को जीवन में अपनाएं

–बीजेपी अध्यक्ष जेपी नडडा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से की अपील
-गुरु रविदास जयंती पर बीजेपी मुख्यालय में बड़ा आयोजन, जुटे दिग्गज
-गुरु रविदास का हर विचार मोदी सरकार के लिए समाज सेवा का मंत्र है : नडडा

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : भारतीय जनता पार्टी ने आज यहां पार्टी मुख्यालय में महान संत गुरु रविदास महाराज जी की जयंती बड़े स्तर पर मनाई। इसको लेकर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका शुभारंभ भाजपा के अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा ने किया। साथ ही पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से संत रविदास जी के बताये रास्तों पर चलते हुए उनकी शिक्षा को जीवन में अपनाने की अपील की। यह कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्या, वरिष्ठ भाजपा नेता सत्यनारायण जटिया, वी. सतीश, बिजय सोनकर शास्त्री, लोक सभा सांसद सुनीता दुग्गल, अनीता आर्या सहित बड़ी संख्या में गुरु रविदास जी महाराज के अनुयायी एवं पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।
इस मौके पर नड्डा ने कहा कि एकता व सद्भाव से परिपूर्ण उनका दर्शन आज भी प्रासंगिक है। उनका हर विचार हमारी सरकार के लिए समाज सेवा का मंत्र है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभी योजनाएं अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मजबूती प्रदान करने के लिए हैं और इनके माध्यम से गरीब, वंचित, शोषित,पीडि़त और दलित को मुख्यधारा में लाने का काम हो रहा है।


राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ये हम सबकी जिम्मेवारी बनती है कि हम उनके जीवन से प्रेरणा लेकर उसे आत्मसात करते हुए सामाजिक जीवन में आगे बढ़ें। गुरु रविदास महाराज ने सदियों पहले समानता, सद्भावना और करुणा के जो संदेश दिए, वे हम सबको प्रेरणा देने वाले हैं। हमें संत शिरोमणि के बताए रास्ते पर चलते हुए एक सशक्त और सामथ्र्यवान भारत बनाना है। इसमें जो प्रधानमंत्री मोदी की योजनाएं हैं, उनको नीचे तक फलीभूत करने के लिए काम करेंगे। यही संत रविदास जी को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
नड्डा ने कहा कि भगवान रविदास जी धर्मांतरण के साथ ही साथ नशे के भी विरोधी थे। उन्होंने भगवान की भक्ति में लीन होकर समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का काम किया। कहा जाता है कि उस समय के सुलतान सिकंदर लोधी ने उन पर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए काफी दवाब बनाया लेकिन अपने धर्म के प्रति आस्था रखने के नाते उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा था जिस धर्म में पैदा हुआ हूं, उसी में रहना मेरी जिम्मेवारी है, साथ ही समाज के सभी वर्गों की सेवा करना भी हमारा कत्र्तव्य है। कर्म में उनका विश्वास था, इसलिए वे कोई कर्मकांडी नहीं थे।

दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के दर्शन को प्रतिपादित किया

उन्होंने कहा था- मन चंगा तो कठौती में गंगा। अर्थात् हृदय निर्मल होना चाहिए। उन्होंने उस समय कहा था -ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न। ये पंक्ति युगों-युगों के लिए हर सरकार का आदर्श मंत्र है। अगर इस वाक्य को आत्मसात किसी ने किया है, तो वह भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी ने किया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के दर्शन को प्रतिपादित किया और इसे जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने अंत्योदय का सिद्धांत दिया। उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की जहां कोई भूखा न रहे। इसके बाद हमारी हर सरकार की योजनाओं का मूल मंत्र अंत्योदय ही रहा है।

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