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Wednesday, June 23, 2021
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BJP-अकाली गठबंधन में बडी दरार, नहीं दी सीट

आखिरी समय तक बनाए रखा सस्पेंस, 3 दौर की हुई बैठकें
–भाजपा के इनकार के बाद अकालियों ने खेला नया दांव
–भाजपा ने हरियाणा का बदला दिल्ली में लिया, बनाई दूरी
–अब तक हर चुनाव में सिख कोटे से अकाली को मिलती थी 4 सीटें
–अकाली दल ने शुरू में मांगी थी 7 सीटें, तराजू पर लड़ते चुनाव

(ईशा सिंह)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल : कुछ महीने पहले हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरने और भाजपा के दुश्मनों के साथ मिलकर चुनाव लडऩे का खामियाजा आज शिरोमणि अकाली दल को उठाना पड़ा। भाजपा ने हरियाणा का बदला दिल्ली में अकालियों से ले लिया। दिल्ली विधानसभा के 8 फरवरी को होने जा रहे चुनाव के लिए भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल को एक भी सीट गठबंधन के तहत नहीं दी। साथ ही आखिरी समय तक सस्पेंश बनाए रखा। नतीजन, सोमवार की देर शाम अकाली दल ने अपनी इज्जत बचाने के लिए नया दांव खेला। देर शाम मीडिया से बातचीत करते हुए अकाली दल के महासचिव व मौजूदा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने अकाली दल के किसी भी सीट पर लडऩे से साफ इनकार कर दिया। इसके लिए सिरसा ने नागरिकता कानून एवं एनआरसी के मुद्दे का सहारा लिया।
बता दें कि अब तक दिल्ली के हर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ता रहा। इसके तहत भाजपा दिल्ली में अकाली दल को चार सिख बहुल सीटें (अकाली कोटे) देता था। इसमें राजौरी गार्डन, हरी नगर, कालकाजी एवं शाहदरा विधानसभा सीट है।

बता दें कि अकाली दल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीतने में कामयाब हुआ था। इसके बाद 2017 के उपचुनाव में भी एक सीट पर जीत मिली। इसके बाद 2020 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के द्वारा भाजपा से 7 सीटों की पहले मांग की गई थी। इसके लिए अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बाकायदा तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, इसमें पार्टी के दिल्ली प्रभारी बलविंदर सिंह भूदड़, प्रेम सिंह चंदूमाजरा एवं नरेश गुजराल शामिल थे।

सूत्रों की माने तो इस कमेटी ने तीन बार भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सहित अन्यों के साथ सीटों को लेकर बैठक भी की। लेकिन, भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले। नतीजन गठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बात बन नहीं पाई। सूत्रों की माने तो दिल्ली के स्थानीय भाजपा नेताओं एवं सिख समाज से जुड़े नेताओं का भी भाजपा हाईकमान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि पार्टी हर हाल में शिरोमणि अकाली दल से रिश्ता तोड़ ले और एक भी सीट चुनाव में सिख कोटे की न दे। अगर देना ही है तो भाजपा में शामिल सिखों को इन सीटों के बदले मैदान में उतारे।

BJP ने तीन सिख चेहरे उतार दिए

स्थानीय नेताओं के सुझाव को मानते हुए भाजपा हाईकमान ने यही किया और अपनी दिल्ली चुनाव की पहली 57 कंडीडेटों की लिस्ट में तीन सिख चेहरे उतार दिए। भाजपा के इतिहास में यह पहली बार ऐसा हुआ कि एक साथ तीन सिख चेहरों को चुनाव में टिकट दिया गया हो। अब तक मात्र एक सिख चेहरा हर चुनाव में उतारा जाता रहा है। सूत्रों की माने तो पहली लिस्ट में तीन सिखों के नाम आने के साथ ही सियासी कयास लगने लगे थे कि भाजपा अकाली दल को सिख कोटे की 4 सीटें देने को तैयार नहीं है। यही नहीं अकाली दल ने भाजपा से जिन सीटों को बदलना के लिए गुहार लगाई थी, भाजपा ने उसे अनसुना करते हुए एक घंटे के भीतर ही उसी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए।

बता दें कि भाजप और शिरोमणि अकाली दल के बीच 1998 से गठबंधन चल रहा है। पंजाब के साथ दिल्ली में दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं। लेकिन, तेजी से बदले सियासी माहौल से आगे की तस्वीर भी बदल सकती है।

उध्रर, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने भी कुछ दिनों पूर्व अपने नेताओं की बैठक बुलाकर स्पष्ट कर दिया था कि सभी नेता अकाली दल के चुनाव चिन्ह पर भी मैदान में उतरे और चुनाव लड़े। अकाली दल की यह शर्त भी भाजपा को मंजूर नहीं थी। साथ ही अकाली दल के दो प्रत्याशी भी तकड़ी पर चुनाव लडऩे को तैयार नहीं थे।

अकाली दल नहीं लड़ेगा दिल्ली में चुनाव : सिरसा


शिरोमणि अकाली दल के महासचिव एवं विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने देर शाम बदले घटनाक्रम के बीच ऐलान किया कि कुछ मुद्दों को लेकर भाजपा से सहमति नहीं बन पाई है, जिसके चलते उनकी पार्टी दिल्ली में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। उनहोंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के फैसले पर हम अडिग है। अकाली दल सीएए और एनआरसी के मसले पर सरकार के फैसले से नाराज है और पार्टी ने अपनी आपत्ति भी भाजपा को दर्ज करा दिया है। अकाली दल के महासचिव व मौजूदा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने अकाली दल के किसी भी सीट पर लडऩे से साफ इनकार कर दिया। इसके लिए सिरसा ने सीएए व एनआरसी का मुद्दा बना लिया। सिरसा ने कहा कि अकाली दल सिख गुरुओं के बताये सिद्वांत पर चलते हुए मुसलमानों को सीएए से बाहर करने के विरोध में चुनाव न लडऩे का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा कि अकाली दल का कोई भी नेता किसी भी सीट से किसी भी अन्य दल एवं निर्दलीय रूप से चुनाव नहीं लड़ेगा। आगे गठबंधन किस शक्ल में लेगा इसका फैसला पार्टी हाईकमान लेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीएए के तहत तीनों मुल्कों से जैसे हिंदू-सिख सहित अन्य धर्मों के लोगों को भारत आने के लिए नागरिकता दे रहा है, ठीक उसी तरह मुस्लिम समाज के पीडि़त लोगों को भी भारत रास्ता खोले। अकाली दल अपने प्रिंसिपल पर अडिग है।

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