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Wednesday, September 29, 2021
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खाद्य तेलों पर सरकार का बड़ा फैसला, शुल्क दरें घटाई, उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

-क्रूड पाम, सोयाबीन और क्रूड सनफ्लॉवर पर 2.5 फीसदी दर घटाई
-रिफाइंड पाम ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर 32.5 प्रतिशत
-सरकार द्वारा शुल्क में दी गई छूट से उपभोक्ताओं को होगा फायदा
-सरकार ने पिछले सभी आदेशों को रद्द किया, नई दरें आज से लागू

नई दिल्ली /नेशनल ब्यूरो : खाद्य तेलों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी और इसके चलते घरेलू कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोत्तरी के चलते तेलों की कीमतों में कई वृद्वि हो गई है। इसके चलते महंगाई भी बढ़ गई है और लोगों का बजट बिगड़ गया है। यह सरकार के लिए भी मुश्किल भरा है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही रिफाइंड पाम ऑयल, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल पर शुल्क की स्टैंडर्ड दर घटकर 32.5 प्रतिशत हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा शुल्क में दी गई छूट के चलते उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले लाभों का प्रत्यक्ष मूल्य 4600 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है। सरकार ने नई दरों को अधिसूचित कर दिया है और यह शनिवार 11 सितम्बर से प्रभावी हो गई। शुल्क दरें घटाने से खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ जाएगी और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।


केंद्र सरकार के उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक इसी अधिसूचना में क्रूड पाम ऑयल पर कृषि- उपकर 17.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।
सरकार ने अधिसूचना संख्या 43/2021- सीमा शुल्क, 10 सितंबर के माध्यम से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना संख्या 34/2021- सीमा शुल्क, 29 जून, 2021 को रद्द हो गई है, जिसके तहत इसको रद्द करने से पहले किए गए या छोड़े गए कार्यों के अलावा यानी नवीनतम आयात शुल्क 11 सितम्बर से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक लागू रहेगा।
प्रवक्ता के मुताबिक शुल्क में कटौतियों से पहले ही एक साल में राजस्व पर अनुमानित 3,500 करोड़ रुपये का असर पड़ गया है। आयात शुल्क में वर्तमान ताजा कटौती से पूरे साल में 1,100 करोड़ रुपये का असर पडऩे का अनुमान है, इस प्रकार सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को दिया गया कुल प्रत्यक्ष लाभ 4,600 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

सरकार ने आयात शुक्ल में बदलाव किया था

बता दें कि खाद्य तेलों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें और इस क्रम में घरेलू कीमतें 2021-22 के दौरान लगातार बढ़ रही है, जो महंगाई के साथ ही उपभोक्ताओं के नजरिये से बड़ी चिंता की वजह है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क उन प्रमुख वजहों में से एक है, जिनसे खाद्य तेलों की आवक की लागत और फिर घरेलू कीमतें प्रभावित होती हैं। इनकी कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के क्रम में, केंद्र सरकार ने फरवरी, 2021 और अगस्त, 2021 के बीच कई कदम उठाए थे। इसमें सरकार ने आयात शुक्ल में बदलाव किया था। इसके अलावा सरकार ने रिफाइंड पाम ऑयल की आयात नीति को संशोधित करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से और 31 दिसम्बर तक की अवधि के लिए प्रतिबंधित से मुक्त कर दिया था। साथ ही, रिफाइंड पाम तेलों को केरल में किसी भी बंदरगाह से अनुमति नहीं दी गई है।

खाद्य तेलों की विलंबित खेप की निकासी में तेजी लाने के लिए समिति बनाई

बता दें कि कोविड-19 के मद्देनजर आयातित खाद्य तेलों की विलंबित खेप की निकासी में तेजी लाने के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले और सीमा शुल्क विभाग शामिल हैं जो साप्ताहिक आधार पर आयातित खाद्य तेलों की खेप की समीक्षा करते हैं और सचिव (खाद्य) की अध्यक्षता वाली कृषि कमोडिटीज पर बनी अंतर मंत्रालयी समिति को अवगत कराते हैं। खाद्य तेलों की आयातित खेपों को तेज मंजूरी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। खाद्य तेलों के मामले में खेप की मंजूरी के लिए औसतन प्रवास समय घटकर 3.4 दिन रह गया है।

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