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Sunday, April 11, 2021

कोविड-19 : प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए CIMAP को मिली कामयाबी

-सीमैप के वैज्ञानिकों ने कोरोना से लडऩे के लिए बनाए हर्बल उत्पाद
–प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है सीमैप के दोनों प्रोडक्ट
–सूखी खांसी के लक्षणों को कम करने में मददगार होगी
–आयुर्वेद और 12 जड़ी बूटियों को मिलाकर बनाया प्रोडक्ट

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : कोविड-19 के संक्रमण से लडऩे के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने अब दो नए हर्बल उत्पाद बनाए हैं, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत कायमाब हुए हैं। खासकर सूखी खांसी के लक्षणों को कम करने में भी मददगार हो सकते हैं, जिसका संबंध आमतौर पर कोविड-19 संक्रमण में देखा गया है।

यह खोज केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट्स (सीमैप), लखनऊ के शोधकर्ताओं ने किया है। दोनों प्रोडक्ट वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किए हैं। ये दोनों उत्पाद प्रतिरक्षा को बढ़ाने में प्रभावी पाए गए हैं। साथ ही इन उत्पादों में पुनर्नवा, अश्वगंधा, मुलेठी, हरड़, बहेडा और सतावर सहित 12 मूल्यवान जड़ी बूटियों का उपयोग किया गया है।

सीमैप के निदेशक डॉ प्रबोध के. त्रिवेदी के मुताबिक इन हर्बल उत्पादों के निर्माण के लिए संस्थान स्टार्ट-अप कंपनियों एवं उद्यमियों से करार के बाद उन्हें पायलट सुविधा प्रदान करेगा। सीमैप में स्थित यह पायलट प्लांट अत्याधुनिक सुविधाओं और गुणवत्ता नियंत्रण सेल से लैस है। सीमैप अपने हर्बल उत्पादों सिम-पोषक और हर्बल कफ सिरप की तकनीक को उद्यमियों और स्टार्ट-अप कंपनियों को हस्तांतरित करने की तैयारी कर रहा है। ताकि, जनता के बीच यह प्रोडक्ट पहुंच सके।

सिम-पोषक दूसरे प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उत्पादों की तुलना में बेहतर

सीमैप के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. डीएन मणि के मुताबिक वैज्ञानिक अध्ययनों में  सिम-पोषक को बाजार में उपलब्ध दूसरे प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उत्पादों की तुलना में बेहतर पाया गया है। यह अन्य उत्पादों के मुकाबले सस्ता भी है तथा इसे जैविक परीक्षणों में सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है। इसी तरह, हर्बल कफ सिरप को आयुष मंत्रालय के नवीनतम दिशा-निर्देशों के आधार पर विकसित किया गया है, और इसे आयुर्वेद के त्रिदोष सिद्धांत के आधार पर तैयार किया गया है।

प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सीमित कर देता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सीमित कर देता है। यह भी देखा गया है कि इस महामारी ने ज्यादातर कम प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार संक्रमण के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है और कोविड-19 से लडऩे में कारगर साबित हो सकता है।

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