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Friday, September 17, 2021
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राष्ट्रपति ने दिखाई जल्दबाजी, तड़के हरसिमरत कौर का इस्तीफा किया मंजूर

–नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपा गया खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
अकाली नेता हरसिमरत कौर के इस्तीफे से नाराज हैं सरकार : सूत्र

–इस्तीफा स्वीकार करने में भाजपा और केंद्र सरकार ने दिखाई जल्दबाजी
–अकाली दल के दबाव को सहने को कतई तैयार नहीं भाजपा
— अकाली दल के लिए भाजपा के साथ गठबंकधन करना अब आसान नहीं

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : केंद्रीय मंत्रिमंडल से अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल के द्वारा इस्तीफा देने के बाद आज तड़के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मेादी के साथ सलाह मशविरा करने के बाद शुक्रवार को सुबह हरसिमरत कौर का इस्तीफा मंजूर करते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का प्रभार केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को सौंप दिया है। इस बावत राष्ट्रपति भवन की ओर से आधिकारिक सूचना भी शुक्रवार सुबह जारी कर दी गई। राष्ट्रपति के द्वारा हरसिमरत कौर का इस्तीफा जितनी जल्दबाजी में स्वीकार किया गया है उससे साफ लगता है कि भारतीय जनता पार्टी अब शिरोमणि अकाली दल का दबाव सहने को कतई तैयार नहीं है। इसका इशारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा ने दोपहर होते होते दे भी दिया। नडडा ने भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले भी कहा है कि हमें दबाव की राजनीति में नहीं आना है और हमारी सरकार वह काम करती रहेगी जो देश के गाँव, गरीब और किसान के लिए जरूरी हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश में हर क्षेत्र में आज बदली हुई तस्वीर दिख रही है। प्रधानमंत्री ने राजनीतिक कार्यसंस्कृति को बदल कर रख दिया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजनीति में विकास, सेवा, जन-कल्याण और जनता के लिए समर्पण की संस्कृति का शुभारंभ किया।


इस सब बातों को देख कर लगता है कि शिरोमणि अकाली दल के लिए भाजपा के साथ गठबंकधन करना आसान नहीं है। हो सकता है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरे। इसके अलावा दूसरा विकल्प बागी अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी शिरोमणि अकाली दल डेमोके्रटिक के साथ गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरे। तीसरा, यह भी संभावना जताई जा रही है कि मशहूर क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्वू भी भाजपा में दाखिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सिद्वू और बादल परिवार के बीच छत्तीस का आंकडा माना जाता है। और इस समय सिदधू का पंजाब के मुख्यमंत्री कैपटन अमरिंदर ङ्क्षसह के साथ टकराव भी चल रहा है। कैप्टन ने सिदधू को मंत्रिमंडल से पीछे हटा भी दिया था। इसलिए माना जा रहा है कि यदि सिदधू को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने को यदि भाजपा तैयार हो जाए तो सिदधू दंपत्ति कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उधर, भाजपा और अकाली दल में लगी इस लड़ाई का फायदा उठाकर विरोधी भी पीछे नहीं रहना चाहते। जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके ने प्रधानमंत्री को अपील की है कि एसजीपीसी के चुनाव तुरंत प्रभाव से घोषित किए जाए ताकि बादल परिवार एवं उनकी पार्टी की पंथक फलसफों में ताकत का सभी को पता चल सके। लेकिन भाजपा अभी चुपचाप सभी विकल्पों पर विचार कर रही है, लेकिन एक बात तय मानी जा रही है कि जिस प्रकार से हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया है उसको लेकर कहीं न कहीं भाजपा हाईकमान नाराज है। बता दें कि हरसिमरत कौर बादल ने वीरवार को किसानों के तीन विधेयक का विरोध करते हुए देर शाम इस्तीफा दे दिया था।

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