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Thursday, June 30, 2022

प्रधानमंत्री का अटैक, लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके दल नहीं कर सकते लोकतंत्र की रक्षा

—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर परोक्ष रूप से हमला

नयी दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए पारिवारिक पाॢटयों को संविधान के प्रति सर्मिपत राजनीतिक दलों के लिए ङ्क्षचता का विषय बताया और दावा किया कि लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके दल, लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर सकते हैं। संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने किसी दल विशेष का नाम लिए बगैर इस आयोजन का बहिष्कार करने वाले दलों को भी आड़े हाथों लिया और इस पर चिंता जताते हुए कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का स्मरण ना करने और उनके खिलाफ विरोध के भाव को यह देश स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि संविधान की भावनाओं को चोट पहुंचाए जाने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए हर वर्ष संविधान दिवस मनाकर राजनीतिक दलों को अपना मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा, अच्छा होता कि देश आजाद होने के बाद 26 जनवरी के बाद (संविधान लागू होने के बाद) देश में संविधान दिवस मनाने की परंपरा शुरू होती। उन्होंने कहा कि ऐसा होता तो एक जीवंत इकाई और सामाजिक दस्तावेज के रूप में संविधान एक बहुत बड़ी ताकत के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी काम आता। उन्होंने कहा, लेकिन कुछ लोग इससे चूक गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2015 में उन्होंने संसद में बाबा साहब आंबेडकर की 125 वीं जयंती पर संविधान दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, उस वक्त भी इसका विरोध किया गया था। उन्होंने कहा, विरोध आज भी हो रहा है, उस दिन भी हुआ था। बाबा साहेब आंबेडकर का नाम हो और आपके मन में विरोध का भाव उठे, देश यह सुनने को तैयार नहीं है। अब भी बड़ा दिल रखकर, खुलेमन से बाबा साहब आंबेडकर जैसे मनीषियों ने जो देश को दिया है, इसका स्मरण करने को तैयार ना होना, यह ङ्क्षचता का विषय है।

15 विपक्षी दलों ने संविधान दिवस के इस कार्यक्रम का बहिष्कार

कांग्रेस समेत 15 विपक्षी दलों ने सरकार पर संविधान की मूल भावना पर आघात करने और अधिनायकवादी तरीके से कामकाज करने का आरोप लगाते हुए संविधान दिवस के इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, भाकपा, माकपा, द्रमुक, अकाली दल, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद, आरएसपी, केरल कांग्रेस (एम), आईयूएमएल और एआईएमआईएम इस कार्यक्रम से दूर रहे। भाजपा एवं सहयोगी दलों के साथ ही, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति, तेलुगू देशम पार्टी, बीजू जनता दल और बसपा के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह आयोजन किसी राजनीतिक दल या प्रधानमंत्री का नहीं

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन किसी सरकार या राजनीतिक दल या किसी प्रधानमंत्री का नहीं था बल्कि इसका आयोजन लोकसभा अध्यक्ष की ओर से किया गया था। भारत की संवैधानिक लोकतांत्रिक परंपरा में राजनीतिक दलों के महत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह संविधान की भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा, लेकिन संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है, संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है, जब राजनीतिक दल अपने आप में, अपना लोकतांत्रिक चरित्र खो देते हैं। जो दल स्वयं का लोकतांत्रिक चरित्र खो चुके हों, वह लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं?

पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाय द फैमिली

पीएम ने किसी दल का नाम लिए बगैर कहा कि यदि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आज के राजनीतिक दलों को देखा जाए तो भारत एक ऐसे संकट की तरफ बढ़ रहा है, जो संविधान के प्रति सर्मिपत ओर लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, और वह है पारिवारिक पाॢटयां…राजनीतिक दल… पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाय द फैमिली…अब आगे कहने की जरूरत मुझे नहीं लगती है। उन्होंने कहा, कश्मीर से कन्याकुमारी तक राजनीतिक दलों की ओर देखिए। यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। संविधान हमें जो कहता है, उसके विपरीत है। उन्होंने पारिवारिक पाॢटयों की व्याख्या भी की और कहा कि योग्यता के आधार पर व जनता के आशीर्वाद से किसी परिवार से एक से अधिक लोग राजनीति में जाएं, इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती। उन्होंने कहा, लेकिन जो पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार चलाता रहे, पार्टी की सारी व्यवस्था परिवारों के पास रहे तो वह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा संकट होता है।

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