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Wednesday, June 23, 2021
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1984 सिख दंगा : दोषी पुलिसवाले नहीं बख्शे जाएंगे

-केंद्र सरकार ने एसआईटी की सिफारिशें स्वीकार कीं
-सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, होगी कार्रवाई
—मोदी सरकार ने 2018 में बनाई थी जांच के लिए एसआईटी

(खुशबू पाण्डेय)
नई दिल्ली : 1984 सिख विरोधी दंगों से संबंधित 186 मामलों की जांच करने वाली न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा समिति (SIT) की रिपोर्ट स्वीकार हो गई है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बुधवार को बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा के नेतृत्व वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। उसके आधार पर लापरवाही के दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई की जाएगी।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्ष्ता वाली खंडपीठ को बताया, हमने न्यायामूर्ति ढींगरा के नेतृत्व वाली एसआईटी की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

सिख विरोधी दंगे के 186 बंद मामलों की समीक्षा करने वाली एसआईटी ने रिपोर्ट दी है कि ज्यादातर मामलों में निचली अदालत से मुकदमा खारिज होने के बाद अपील दायर नहीं की गई है। इसमें जांच अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को इस बात की इजाजत दी कि वह बंद मुकदमों की अपील दाखिल करने के लिए पुलिस के पास आवेदन दें। इस मामले में शीर्ष अदालत ने ही एसआइ्रटी का गठन किया था। कुल 186 मामलों को पुलिस या अलग-अलग एजेंसियों ने बंद कर दिया था। कुछ दंगा पीडि़तों की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया था कि सबूतों और तथ्यों को देखे बगैर मामलों को बंद कर दिया गया। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि पुलिस और अन्य जांच करने वाली एजेंसियों ने सही से बयान भी दर्ज नहीं किए।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूॢत बी आर गवई और न्यायमूॢत सूर्य कांत की पीठ को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस सूरी ने सूचित किया कि विशेष जांच दल की रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निन्दा की है। उन्होंने कहा कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों में कथित रूप में संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिये एक आवेदन दायर करेंगे। केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि उन्होंने इस रिपोर्ट में की गयी सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और इस मामले में उचित कदम उठायेंगे।

मेहता ने कहा कि हमने सिफरिशें स्वीकार कर ली हैं और हम कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। अनेक कदम उठाने की आवश्यकता है और ऐसा किया जायेगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान सूरी ने विशेष जांच दल की रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि ऐसी सोच है कि जो कुछ भी हुआ था उसके लिये पुलिस अधिकारी बच नहीं सकते।

सूरी ने कहा, रिपोर्ट मे यह सुझाव दिया गया है कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कुछ न कुछ कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि इसमे उनकी मिलीभगत थी। ये पुलिस अधिकारी बचने नहीं चाहिए। हम इस रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करेंगे पीठ को मेहता ने सूचित किया कि इन मामलों के रिकार्ड उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री के पास हैं और उन्हें सीबीआई को लौटा देना चाहिए ताकि आगे कार्रवाई की जा सके। पीठ ने निर्देश दिया कि ये रिकार्ड गृह मंत्रालय को सौंप दिये जायें। बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की 31 अक्टूबर, 1984 को उनके दो सुरक्षा र्किमयों द्वारा गोली मार कर हत्या किये जाने के बाद दिल्ली सहित देश के अनेक हिस्सों में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे हुये थे। इन दंगों में अकेले दिल्ली में 2,733 व्यक्तियों की जान चली गयी थी।

2018 में बनी थी एसआईटी, खुले थे बंद 186 मामले

न्यायमूॢत ढींगरा की अध्यक्षता वाले इस विशेष जांच दल में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजदीप सिंह और वर्तमान आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार भी शामिल थे। शीर्ष अदालत ने 11 जनवरी, 2018 को इस जांच दल का गठन किया था जिसे उन 186 मामलों में आगे जांच करनी थी जिन्हें पहले बंद कर दिया गया था। इस जांच दल में इस समय सिर्फ दो सदस्य हैं क्योंकि राजदीप सिंह ने व्यक्तिगत कारणों से इसका हिस्सा बनने से इंकार कर दिया था। इससे पहले, पिछले साल मार्च में शीर्ष अदालत ने विशेष जांच दल को अपनी जांच पूरी करने के लिये दो महीने का वक्त और दिया था। न्यायालय को जांच दल ने सूचित किया था कि इन मामलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा काम हो गया है और उसे जांच पूरी करने के लिये दो महने का समय और चाहिए।

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