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Saturday, July 31, 2021
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IARI : छोटे और मझौले किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए

—भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली का 59वें दीक्षांत समारोह
—केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि छोटे किसानों की उत्पादकता बढ़ाएं
—MSC तथा PHD पूरा करने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किया

नई दिल्ली/टीम डिजिटल : भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के 59वें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित करते हुए शुक्रवार को केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने वैज्ञानिक समुदाय से छोटे और मझौले किसानों की उत्पादकता बढ़ाने पर बल देने को कहा है। उन्होंने कहा कि छोटे और मझौले किसान सबसे कमजोर हैं और उनके कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने एम.एससी तथा पीएच.डी पूरा करने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किया। इस अवसर पर डेयर के सचिव डॉ. त्रिलोचन महापात्रा एवं संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने हरित क्रांति के बाद के चरण में संस्थान की शानदार उपलब्धियों की प्रशंसा की। कैलाश चौधरी ने कहा कि आईएआरआई जैसे संस्थानों को किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए टेक्नोलॉजी में आई प्रगति का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं से आग्रह किया कि वे विभिन्न फसलों की अच्छी पैदावार वाली रोग प्रतिरोधी तथा पौष्टिक किस्में विकसित करें।


कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि लोगों को कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के खतरों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि कीटनाशकों के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। अगले दो वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने में सभी के प्रयास की चर्चा करते हुए कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि उत्पादकता सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने पारम्परिक फसल प्रणालियों में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इससे आर्थिक जोखिम में कमी आएगी और अधिक मुनाफे की गुंजाइश रहेगी।
छोटे किसानों के लिए फायदेमंद है नए कृषि कानून : कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां किसानों को गुमराह कर रहे हैं कि नए कृषि कानूनों के क्रियान्वयन से मंडियां व एमएसपी बंद हो जाएगी और किसानों की जमीन चली जाएगी। वहीं हकीकत में नये क़ानून लागू होने के बाद ना तो देश में कोई मण्डी बंद हुई है, ना ही एमएसपी पर रोक लगी है, बल्कि फ़सलों की ख़रीद बढ़ी है। ये क़ानून किसी किसान के लिए बंधन नहीं हैं, बल्कि ये उन्हें विकल्प देते हैं। पुरानी मण्डियों को इनसे कोई ख़तरा नहीं है। हमने इन मण्डियों को आधुनिक बनाने का संकल्प लिया है। इनके लिए बजट बढ़ाया गया है। इसको लेकर खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी संसद में आश्वासन दिया है कि जब तक हमारे छोटे किसानों को उनके नये अधिकार नहीं मिलते, तब तक उनकी आज़ादी अधूरी है। हमारी सरकार ने हर क़दम पर छोटे किसानों की मदद करने का काम किया है। अब हमें किसानों को विकल्प देने ही होंगे।

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