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Tuesday, August 3, 2021
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सियासी महाभारत के बीच तय हुआ सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनी रहेंगी

—सीडब्ल्यूसी की मैराथन बैठक के बाद बनी सहमति
—संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया

(नीता बुधौलिया)
नयी दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने सोमवार को मैराथन बैठक के बाद सोनिया गांधी से पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का आग्रह करने के साथ ही संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया। पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारण इकाई ने सोनिया गांधी को कुछ नेताओं द्वारा लिखे गए पत्र की पृष्ठभूमि में नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। CWC की बैठक के बाद पारित प्रस्ताव में कहा गया है, ”पार्टी के अंदरूनी मामलों पर विचार-विमर्श मीडिया के माध्यम से या सार्वजनिक पटल पर नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस कार्य समिति ने सभी कार्यकर्ताओं व नेताओं को राय दी कि पार्टी से संबंधित मुद्दे पार्टी के मंच पर ही रखे जाएं, ताकि उपयुक्त अनुशासन भी रहे और संगठन की गरिमा भी।

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कांग्रेस कार्य समिति ने कहा, CWC सोनिया गांधी को अधिकृत करती है कि वह जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिये कदम उठाएं। CWC एकमत से उनसे यह निवेदन भी करती है कि कोरोना काल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अगले अधिवेशन के बुलाए जाने तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के गरिमामय पद पर रहकर पार्टी का नेतृत्व करें। प्रस्ताव में कहा गया है, ”पिछले छह महीनों में देश पर अनेकों विपत्तियां आई हैं। देश के सामने आई चुनौतियों में एक कोरोना महामारी है। तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था व आॢथक संकट, करोड़ों रोजगारों का नुकसान एवं बढ़ती गरीबी तथा चीन द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ व कब्जे के दुस्साहस का संकट है। CWC ने कहा, ‘इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार की हर मुद्दे पर संपूर्ण विफलता को उजागर करने व विभाजनकारी राजनीति एवं भ्रामक प्रचार-प्रसार का पर्दाफाश करने वाली सबसे ताकतवर आवाज सोनिया गांधी और राहुल गांधी की है। कांग्रेस के हर आम कार्यकर्ता की व्यापक राय व इच्छा को प्रतिङ्क्षबबित करते हुए, कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के हाथों व प्रयासों को हरसंभव तरीके से मजबूत करने का संकल्प लेती है।

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प्रस्ताव के अनुसार, CWC की स्पष्ट राय है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति न तो किसी को दी जा सकती है और न ही किसी को दी जाएगी। आज हर कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं नेता की जिम्मेदारी है कि वह भारत के लोकतंत्र, बहुलतावाद व विविधता पर मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे कुत्सित हमलों का डटकर मुकाबला करे। सीडब्ल्यूसी ने कहा, हमारे इन दोनों नेताओं की बुलंद आवाज ने, कांग्रेस के अंदर व बाहर, भारतीयों को देशवासियों के साथ खड़े हो भाजपा सरकार से जवाबदेही मांगने व सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया है, जबकि सरकार जनता को अपने खोखले व स्वनिॢमत मुद्दों में उलझाकर रखना चाहती है। इससे पहले CWC की बैठक आरंभ होने के साथ ही सोनिया ने पद छोडऩे की पेशकश की और कहा कि सीडब्ल्यूसी नया अध्यक्ष चुनने के लिए प्रक्रिया आरंभ करे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कुछ अन्य नेताओं ने उनसे आग्रह किया कि वह पद पर बनी रहें।

कपिल सिब्बल के मोर्चा खोलने के बाद बड़ा विवाद खड़ा

सोनिया को पत्र लिखने वाले नेताओं पर ‘भाजपा के साथ साठगांठ करने के आरोप से जुड़ी राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी की खबर आने और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के मोर्चा खोलने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया, हालांकि बाद में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की ओर से कहा गया कि राहुल गांधी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। खबरों में कहा गया था कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह आरोप साबित होने पर वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। बाद में आजाद ने कहा कि राहुल गांधी ने CWC की बैठक के भीतर या बाहर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की।

आरोप साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा : आजाद

आजाद के मुताबिक, बैठक में मैंने सिर्फ यह कहा था कि कल कांग्रेस के कुछ लोगों ने कहा था कि हमने भाजपा की तरफ से ऐसा किया। इस संदर्भ में मैंने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे कुछ साथियों (CWC के बाहर के) ने हम पर भाजपा के साथ साठगांठ का आरोप लगाया और अगर वो लोग यह साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। CWC की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी तूफान आ गया था जब पूर्णकालिक एवं जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई।

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