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Thursday, June 30, 2022

मनजिंदर सिरसा की रिवर्स स्विंग में उलझे अकाली, सिख दिग्गज नेता हुए बोल्ड

-सुखबीर बादल के सबसे करीबी थे सिरसा, नहीं लगने थी कदमों की भनक
–समूची अकाली दल पार्टी को चौंकाया, विरोधी भी रह गए दंग
–मनजिंदर सिरसा के खिलाफ विरोधियों के सभी दांव फेल
– भाजपा सिरसा को पंजाब भेजकर विधानसभा चुनाव में खेल सकती है बड़ा दांव

नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली में पार्टी के सबसे प्रमुख सिख चेहरा मनजिंदर सिंह सिरसा की गुगली में सभी बोल्ड हो गए। खुद पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल तक को भनक नहीं लगने दी और एक घंटे के भीतर ऐसी छलंाग मारी की हर कोई दंग रह गया। सिरसा के इस कदम से पार्टी के नेता तो हैरान हैं ही, विरोधी दलों के नेताओं को भी समझने का मौका नहीं मिला।
दिल्ली की सिख सियासत में छत्रराज कायम करने वाले सिरसा ने सभी को चौकाते हुए भारतीय जनता पार्टीं में दाखिला ले लिया। दिल्ली कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष के पद से अपना इस्तीफा देने का ऐलान करने के ठीक एक घंटे के भीतर ही सिरसा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय पहुंचे और भाजपा में प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर ली। यह सबकुछ इतनी तेजी में हुआ कि कमेटी सदस्यों और पार्टी हाईकमान तक को इसकी भनक नहीं लगी की सिरसा पार्टी छोडऩे जा रहे हैं। सिरसा ने जब अपने इस्तीफा देने की वीडियो सोशल मीडिया पर डाली तब दावा किया कि विरोधियों के द्वारा परेशान करने के कारण गुरुद्वारा कमेटी के रोजाना काम काज में रुकावट आ रही है, इसलिए वह निजी कारणाों से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। और कमेटी के आतंरिक चुनाव में भी वह भाग नहीं लेंगे। तब तक यही लगा कि सिरसा अकाली दल में ही रहेंगे, और दिल्ली की बजाय पंजाब की सियासत करेंगे। लेकिन, एकाएक भाजपा में शामिल होने के बाद सभी को पता चला कि सिरसा ने जो दांव खेला था उसको उसकी पार्टी के लोग तो क्या विरोधी भी नहीं समझ पाए। दिल्ली में नगर निगम चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी को सिख चेहरे के रूप में मनजिंदर सिंह सिरसा का मिलना बड़ी सफलता मानी जा रही है। वहीं दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी सिरसा को पंजाब भेजकर विधानसभा चुनाव में नया दांव खेल सकती है। हालांकि, अभी तक यही आशंका जताई जा रही थी कि भाजपा का गठबंधन कैप्टन अमरिंदर ङ्क्षसह की पंजाब लोक कांग्रेस से होगा, लेकिन अब लगता है कि भाजपा के शीर्ष नेताअेां के मन में कुछ और भी चल रहा है। इसलिए पंथक तथा जट सिख चेहरे के तौर पर सिरसा को प्रमुखता से आगे किया गया है।

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सिरसा को ले रहा है हाथों हाथ

बुधवार की शाम जिस प्रकार मनजिंदर ङ्क्षसह सिरसा के बीजेपी में शामिल होने पर दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान एवं गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद थे, और उसके तुरंत बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सिरसा की अगवानी की उससे साफ लग रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सिरसा को हाथों हाथ ले रहा है। किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली कमेटी अध्यक्ष रहते हुए सिरसा ने 26 जनवरी के लाल किला कांड मामले में गिरफतार हुए किसानों की जमानतें करवाई थी। साथ ही किसानों के समर्थन में तराई के इलाके वाले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी काफी सरगर्म रहे थे। इसलिए पंजाब सहित यूपी एवं उत्तराखंड में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के साथ दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा को एक पंथक चेहरे के तौर पर सिरसा से काफी उम्मीदें रहेंगी।

दिल्ली की विरोधी सिख पार्टियेां को भी बड़ा झटका

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से मनजिंदर सिंह सिरसा को हटाने की जोर शोर से लगी शिरोमणि अकाली दल दिल्ली एवं जागो पार्टी को भी आज सिरसा के भाजपा में जाने से बड़ा झटका लगा है। दोनों पार्टियां सिरसा को हटाने के लिए केंद्र सरकार तक से गुहार लगा चुकी हैं। लेकिन, अब सिरसा ने सिख सियासत के खेल ही बदल दिए। माना ये जा रहा था कि दिल्ली कमेटी चुनाव के दौरान भाजपा ने खुलकर दोनों पार्टियेां की अंदरखाते मदद की थी। साथ ही यह भी माना जा रहा था कि दिल्ली निगम चुनाव में सिख कोटे के नाम पर दोनों पार्टियों को कुछ टिकटें मिलने की उम्मीद थी। अकाली दल को पहले 8 सीटें निगम चुनाव में मिलती थी। ये माना जा रहा था कि ये सीटें इस बार इन दोनों पार्टियों को मिल सकती थी। लेकिन, सिरसा के एकाएक भाजपा में शामिल होने के साथ ही इन पार्टियेां के लिए भी भाजपा कोर्ट की सीटें लेना मुश्किल हो गया है। लिहाजा, अब देखना होगा कि मौजूदा पार्षदा परमजीत सिंह राणा, अमरजीत सिंह पप्पू, हरमीत कालका की पत्नी मनप्रीत कौर कालका किस प्रकार अगली टिकट लेती हैं। हालांकि कुलवंत सिंह बाठ की पत्नी गुरजीत कौर बाठ आम आदमी पार्टी ेमें शामिल हो चुकी हैँ।

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