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Sunday, May 22, 2022

लाल किले पर बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा दिल्ली फतेह दिवस

नई दिल्ली /अदिति सिंह : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की ओर से बड़े स्तर पर दिल्ली फतेह दिवस का आयोजन लालकिले पर 6 से 7 अप्रैल को किया जाएगा। इसको लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने विशेष बैठक बुलाई। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका तथा महासचिव जगदीप सिंह काहलों की अगुवाई में बुधवार को कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। इस मौके पर धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन, को-चेयरमैन, स्कूलों के प्रिंसिपल व कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी में 6 से 7 अप्रैल के बीच लालकिले पर फतेह दिवस मनाने का फैसला लिया गया। इस दौरान विशेष कीर्तन दरबार, खालसाई खेल गतका का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए लालकिला से लेकर मिठाईपुल तक एक जरनैली मार्च भी निकाला जाएगा। इस मार्च में जत्थेदार साहिब, संत समाज व अन्य पंथक जत्थेबंदियां भी शामिल होंगी।
कमेटी अध्यक्ष हरमीत कालका ने बताया कि 1783 ई में बाबा बघेल सिंह, बाबा जस्सा सिंह आहलूवालिया, बाबा जस्सा सिंह रामगढिय़ा व अन्य सिख जरनैलों के नेतृत्व में सिंहों ने मुगल शासक सम्राट शाह आलम-द्वितीय को हराकर दिल्ली पर विजय प्राप्त की। इसके बाद जनरैलों ने लाल किले पर केसरी निशान साहिब फहराया। यह एक ऐतिहासिक घटना है और आज भी उसकी निशानियां दिल्ली में मौजूद हैं ।

– 6 से 7 अप्रैल को होगा बड़ा आयोजन, कमेटी ने तय की रूपरेखा
–विशेष कीर्तन दरबार, खालसाई खेल गतका का आयोजन किया जाएगा
-लालकिला से लेकर मिठाईपुल तक निकाला जाएगा जरनैली मार्च
-मार्च में जत्थेदार साहिब, संत समाज व पंथक जत्थेबंदियां शामिल होंगी

कालका के मुताबिक तीस हजारी अदालत का नाम सिख फौज की 30,000 मजबूत सेना के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इस स्थल पर डेरा डाला था। इसी प्रकार मोरी गेट का नाम लाल किले में प्रवेश करने के लिए सिख सैनिक दिल्ली की दीवार पर छेद कर दिल्ली में दाखिल हुए थे, जिसके बाद इसका नाम मोरी गेट पड़ा। इसके अलावा मिठाई पुल वह स्थान है जहां सिख सैनिक जनता के बीच मिठाईयां बांटते थे।
कमेटी के महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने इस मौके पर दिल्ली सरकार से मांग किया कि दिल्ली फतेह दिवस का इतिहास दिल्ली के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को इस इतिहास के बारे में जानकारी दी जा सके। ताकि, उनमें गर्व की भावना पैदा हो सके कि कैसे मूल भारतीयों ने विदेशी हमलावरों की गुलामी की जंजीरों को तोड़ अपना स्वतंत्र राज स्थापित किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली कमेटी द्वारा इस मार्च को आयोजित करने का मकसद लोगों को परिचित करवाना है कि कैसे सिख जरनैलों द्वारा बहादुरी एवं दिलेरी के साथ लालकिले पर फतेह प्राप्त की गई।
इस मौके पर कमेटी के उपाध्यक्ष आत्मा सिंह लुबाणा, संयुक्त सचिव जसमेन सिंह नोनी, धर्म प्रचार कमेटी के संयोजक जसप्रीत सिंह, कमेटी के को-चेयरमैन विक्रम सिंह रोहिणी, गुरमीत सिंह भाटिया, सुखबीर सिंह कालरा, जतिंद्रपाल सिंह गोल्डी, जी.एच.पी.एस स्कूलों के प्रिंसिपल व अन्य कमेटी स्टाफ मौजूद रहे।

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