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Saturday, September 18, 2021
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DSGMC चुनाव : नियमों का सख्ती से पालन कराते हुए चुनाव कराने का निर्देश

-दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुद्वारा मंत्री के आदेश पर लगाई रोक
-सरना दल को मिल सकती है बड़ी राहत, अकाली दल की बाल्टी पर पेंच

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के आम चुनावों में लडऩे के लिए अब केवल नियम-14 के तहत पंजीकृत पार्टी को ही सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित होगा। दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (बादल) की याचिका पर सुनवाई करते हुए नियम-14 का सख्ती से पालन करवाने के दिल्ली गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय को आदेश दिए हैं। साथ ही दिल्ली सरकार के गुरुद्वारा चुनाव मंत्री राजिंदर पाल गौतम के द्वारा पिछले दिनों गुरुद्वारा चुनाव सचिव को जारी किए गए आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश में गौतम ने नियम-14 का पालन करने के लिए निदेशालय को कहा था। हाईकोर्ट ने मंत्री के आदेश पर तो रोक लगा दी है, लेकिन मंत्री के आदेश की भावना को लागू करवाने का जिम्मा गुरुद्वारा चुनाव निदेशक को सौंप दिया है। जिस वजह से नियम-14 का पालन नहीं करने वाली शिरोमणि अकाली दल (बादल) एवं शिरेामणि अकाली दल (दिल्ली) के चुनाव चिन्ह क्रमश: बाल्टी और कार पर संशय की स्थिति बरकरार है। हालांकि, दूसरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरना दल की याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुद्वारा मंत्री के आदेश पर तो रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन दिल्ली सरकार की तरफ से शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के लंबित पड़े सोसायटी बनाने के आवेदन को SDM द्वारा मंजूर करने के बाद उसमें चुनाव चिन्ह लेने के लिए कानूनन तौर पर गुरुद्वारा चुनाव निदेशक के पास जाने को कहा है। इससे साफ है कि इन दोनों आदेशों से दोनों पार्टियों की मान्यता खतरे में है, लेकिन सरना दल को नई सोसायटी बनाने के कारण सुरक्षित चुनाव चिन्ह मिलने की संभावना भी पैदा हो गई है। नियम-14 के तहत नई सोसायटी को सुरक्षित चुनाव चिन्ह के लिए आम चुनाव से एक साल पहले आवेदन करना अनिवार्य है। इसलिए माना जा रहा है कि चुनाव चिन्ह मिलेगा या नहीं गेंद निदेशक के पाले में चली गई है।

क्या है नियम-14

दिल्ली गुरुद्वारा चुनाव नियम 1974 की धारा-14 के अनुसार सोसायटी एक्ट में पंजीकृत धार्मिक पार्टी केा चुनाव चिन्ह गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय आवंटित करता है। बशर्तें उसने आम चुनाव से एक साल पहले आवेदन किया हो। साथ ही सोसायटी के पांच सदस्य ऐसे होने चाहिए जो कमेटी चुनाव लड़ा हो और 2 निर्वाचित दिल्ली कमेटी सदस्य सोसायटी के सदस्य होने चाहिए।

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