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Sunday, December 4, 2022

बंदी सिंघों की रिहाई के लिए सिखों ने चलाया जागरूकता अभियान

नई दिल्ली/ अदिति सिंह : सियासी सिख कैदी रिहाई मोर्चा की तरफ से बंदी सिंघों की रिहाई के प्रति सामाजिक चेतना जगाने के लिए आज मोती नगर मेट्रो स्टेशन के बाहर जागरुकता अभियान चलाया गया। इससे पहले रिहाई मोर्चे की तरह से पिछले दिनों तिलक नगर मेट्रो स्टेशन पर जागरूकता अभियान चलाया गया था। इस मौके पर संविधान यह कहता है-बंदी सिंघ रिहा करो अभियान के तहत हाथों में तख्तियां पकड़ कर लोगों को जागरूक किया गया। खराब मौसम और हल्की बारिश के बीच पहुंचे सभी इंसाफ पसंद कार्यकर्ताओं ने बंदी सिंघ रिहा करो और संविधान यह कहता है – बंदी सिंघ रिहा करो की मांग करते हुए जोरदार नारे लगाए।

-मोती नगर मेट्रो स्टेशन पर जुटे इंसाफ पसंद सिख
—हाथों में तख्तियां पकड़ कर लोगों को जागरूक किया गया
—राजीव गांधी के हत्यारे रिहा हो सकते हैं तो सियासी सिख कैदी क्यों नहीं ?

रिहाई मोर्चा के अध्यक्ष चमन सिंह, संयोजक अवतार सिंह कालका, महासचिव गुरदीप सिंह मिंटू, उपाध्यक्ष रविन्द्र सिंह बिट्टू, दिल्ली कमेटी के पूर्व सदस्य मलकिंदर सिंह तथा गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा मोती नगर के अध्यक्ष राजा सिंह ने मीडिया के साथ बातचीत में साफ कहा कि हम संविधान तथा कानून की रोशनी में बंदी सिंघों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। जिस कानून के तहत उन्हें दोषी ठहरा कर सजा दी गई है, वहीं कानून उनकी तय सजा पूरी करने के बाद रिहाई का प्रावधान भी मुहैया करवाता है। परन्तु कभी राष्ट्रपति या राज्यपाल और सजा समीक्षा का भारतीय तंत्र सियासी सिख कैदियों की रिहाई को लटकाता रहता है। इसलिए न्यायपालिका और कार्यपालिका से सवाल है कि अगर राजीव गांधी के हत्यारे तथा बिलकिस बानो के गुनहगार रिहा हो सकते हैं तो सियासी सिख कैदी क्यों नहीं ? बंदी सिंघों में शामिल किसी भी सिख कैदी की पाश्र्वभूमि आपराधिक नहीं थी। यह तो सियासी हालतों की वजह से कैदी बनें थे।

रिहाई मोर्चे के प्रवक्ता डॉक्टर परमिंदर पाल सिंह ने बताया कि परसों भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान आया था कि पाकिस्तान की जेलों में बीते 9 महीनों के दौरान 6 भारतीय कैदियों की मौत हो गई है। जिसमें 5 भारतीय मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके थे, पर पाकिस्तान सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया था। सजा पूरी कर चुके भारतीय मछुआरों के प्रति भारत सरकार की संवेदना तथ भावना से सिख पूरी तरह सहमत हैं। परन्तु सजा पूरी कर चुके सियासी सिख कैदियों और भारतीय मछुआरों को अलग नजर से भारत सरकार को नहीं देखना चाहिए। इसलिए जो दोष हम पाकिस्तान सरकार पर लगा रहे है, वो? हमारे पर ना लगे यह ध्यान भारत सरकार को रखना चाहिए। इस मौके पर पंजाबी सहयोग मंच के विजय कुमार भाटिया ने कहा कि बंदी सिंघों की तुरंत रिहाई होनी चाहिए, हम सभी संविधान और कानून के हिसाब से बंदी सिंहों की रिहाई के पक्षधर हैं। अगर गुजरात में बलात्कारियों की रिहाई हो सकती है तो बंदी सिखों की रिहाई क्यों नहीं हो सकती, इंसाफ जरूर होना चाहिए। इस मौके पर दिल्ली कमेटी के पूर्व सदस्य महेंद्र सिंह भुल्लर सहित रिहाई मोर्चे के तमाम कार्यकर्ता मौजूद थे।

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