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Friday, October 22, 2021
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राशन की डोरस्टेप डिलीवरी को लेकर फिर टकराव, केजरीवाल ने फाइल दोबारा LG के पास भेजी

– कोरोना काल में इस योजना को रोकना गलत है, लागू कर भीड़ से बचा जा सकता है
– तीन साल में चार बार एलजी को डिलीवरी योजना को लेकर जानकारी दी गई

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना की फाइल को मंजूरी के लिए एक बार फिर एलजी के पास भेजी है। सीएम ने एलजी की आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा है कि राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना कानून के मुताबिक है और यह योजना केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए लागू की गई। करोना काल में इस योजना को रोकना गलत है। इसे लागू कर राशन की दुकानों पर लगने वाली भीड़ से बचा जा सकता है। सीएम ने कहा है कि पिछले तीन साल में चार बार एलजी को राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना को लेकर कैबिनेट के निर्णय की जानकारी दी गई, लेकिन उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। बीते फरवरी माह में इस योजना को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन किया गया, तभी भी एलजी ने विरोध नहीं किया। हमने केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को दूर किया और हाईकोर्ट ने अपनी पांच बार की सुनवाई के दौरान इस पर स्टे नहीं लगाया। साथ ही, कोर्ट केस के दौरान केंद्र सरकार ने कभी किसी अनुमोदन के बारे में नहीं बताया, फिर इस योजना को क्यों रोका जा रहा है?मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी की फाइन एलजी के पास दोबारा भेजते हुए उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी जवाब दिया है। सीएम ने कहा है कि मैंने उपराज्यपाल के नोट का अध्ययन किया है। जिसमें एक गंभीर गलतफहमी प्रतीत होती है। एलजी के समक्ष तात्कालिक मामला राशन की डोरस्टेप डिलीवरी स्कीम को मंजूरी नहीं है। यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है। सीएम ने कहा है कि मंत्री परिषद ने 06 मार्च 2018 के कैबिनेट निर्णय के माध्यम से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के तहत लाभार्थियों के घर पर राशन (गेहूं के बदले पूरा आटा, चावल और चीनी) पहुंचाने की योजना को मंजूरी दी थी। दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC) को परियोजना के लिए एकल कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अनुमोदित किया गया था और 677 करोड़ रुपए परियोजना पर परिव्यय के रूप में मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में एलजी कार्यालय को सूचित किया गया था और एलजी द्वारा योजना को लेकर कोई विरोध नहीं किया गया। इसके बाद, कैबिनेट ने 21 जुलाई 2020 को योजना में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी और योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ (MMGGRY) रखने का निर्णय लिया। साथ ही, कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (ONORC) के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए सभी एफपीएस में ई-पीओएस उपकरण लगाए जाएंगे और ई-पीओएस, एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड और ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ को एक साथ लागू किया जाएगा। कैबिनेट के इस फैसले को एलजी कार्यालय में भी भेजा गया था और कोई आपत्ति नहीं जताई गई। इसके अलावा, कैबिनेट ने 09 अक्टूबर 2020 को योजना को कार्यान्वयन संबधी पहलुओं पर निर्णय लिया और दो चरणों में इसके कार्यान्वयन को मंजूरी दी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में उपराज्यपाल के कार्यालय को भी जानकारी दी गई और एलजी द्वारा योजना के कार्यान्वयन के इस निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं व्यक्त किया गया।इसके बाद, दिल्ली सरकार ने 15 अक्टूबर 2020 और 19 अक्टूबर 2020 को निविदाएं जारी की और योजना के कार्यान्वयन के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके अलावा, इस योजना को 20 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया गया। इस नोटिफिकेशन की एक कॉपी एलजी को भेजी गई थी। 04 जुलाई 2018 को दिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, एलजी के पास उक्त योजना/अधिसूचना पर अपनी आपत्ति जताने का एक और मौका था, लेकिन एलजी ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसलिए यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है।

केंद्र सरकार की आपत्तियों को दूर किया गया

दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार की ओर से 19 मार्च 2021 को एक पत्र मिला, जिसमें इस योजना के नाम पर आपत्ति जताई गई है। हालांकि यह कानूनी रूप से जरूरी नहीं था, लेकिन किसी भी विवाद से बचने के लिए कैबिनेट की 24 मार्च 2021 को हुई बैठक में योजना का नाम पूरी तरह से हटा दिया गया। कैबिनेट के इस फैसले के माध्यम से केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को तत्काल हटा दिया गया। कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इस योजना का अब कोई नाम नहीं होगा। हालांकि, निविदाओं सहित योजना के कार्यान्वयन के लिए उठाए गए सभी कदम मान्य रहेंगे। कैबिनेट के इस फैसले की एक काॅपी एलजी को भी दी गई थी, लेकिन एलजी ने कैबिनेट के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं व्यक्त जताई। कैबिनेट के इस निर्णय को प्रभावी करने और केंद्र सरकार की आपत्तियों को दूर करने के लिए एक नई अधिसूचना 24 मई 2021 को एलजी के पास भेजी गई। यह नई अधिसूचना है, जिस पर तत्काल विचार करने की आवश्यकता है। अब एलजी को यह तय करना है कि क्या वे केंद्र सरकार की आपत्तियों को दूर करते हुए नई अधिसूचना से सहमत हैं?

एलजी की आपत्तियों पर स्पष्टीकरण

सीएम ने कहा है कि एलजी द्वारा इस मामले को केंद्र सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजने का आग्रह सही नहीं लगता है। केन्द्र सरकार की मंजूरी न तो अनिवार्य है और न ही आवश्यक है। हमने केवल केन्द्र सरकार के आदेशों को लागू किया है। इसके अलावा, दिल्ली सरकार कई पत्रों के माध्यम से डोरस्टेप डिलीवरी योजना के कार्यान्वयन के संबंध में समय-समय पर केन्द्र सरकार को सूचित और सहायता मांगती रही है। दिल्ली सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने पिछले दो वर्षों में कम से कम चार बार केंद्र सरकार में अपने समकक्षों को राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना के बारे में जानकारी दी है और हमें केंद्र सरकार से कोई आपत्ति नहीं मिली, लेकिन जब हमने 20 फरवरी 2021 को इस योजना को अधिसूचित किया, तब हमें केंद्र सरकार से 19 मार्च 2021 को एक पत्र मिला, जिसमें हमें इस योजना से ‘मुख्यमंत्री’ का नाम हटाने की राय दी गई। हमने तुरंत उनकी आपत्ति मान ली और योजना का नाम पूरी तरह से हटा दिया।

होम डिलीवरी योजना शुरू करने की तत्काल जरूरत

सीएम ने कहा है कि महामारी की पहली लहर के दौरान लाभार्थी मिलों (आटा चक्की) के बंद होने के कारण गेहूं का उपयोग नहीं कर पाए थे। इन्हें राशन की दुकानों से गेहूं मिला, लेकिन लाॅकडाउन के चलते आटा चक्की बंद होने के कारण गेहूं को आटे में बदलवा नहीं पाए। ऐसे में, गेहूं की जगह आटा वितरित करने के निर्णय से इस समस्या का समाधान हो सकेगा, क्योंकि कोरोना महामारी के खत्म होने का अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है। यह योजना लोगों को वायरस से बचाने और संक्रमण फैलने के खतरे को भी कम करेगी। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित एफपीएस दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करना संभव नहीं है। इसलिए, यह जरूरी है कि एनएफएसए लाभार्थियों के घर पर ही राशन दिया जाए।

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