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Thursday, June 30, 2022

दिल्ली में कीजिए ताजमहल के दीदार, चारमीनार, गेटवे ऑफ इंडिया, कोणार्क मंदिर के दर्शन

नयी दिल्ली /अदिति सिंह : राजधानी दिल्ली में पर्यटकों के लिए बनाया गया एक अदभुत एवं आकर्षक ‘भारत दर्शन पार्क शनिवार को जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यहां बेकार चीजों और अपशिष्ट सामग्री से भारत के कई प्रतिष्ठित स्मारकों की आकर्षक प्रतिकृतियां बनायी गई हैं। आठ एकड़ में फैले इस उद्यान में कुतुब मीनार, ताजमहल, चारमीनार, गेटवे ऑफ इंडिया, कोणार्क मंदिर, नालंदा अवशेष, मैसूर महल, मीनाक्षी मंदिर, हम्पी, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, सांची स्तूप, गोल गुंबज, अजंता और एलोरा गुफाएं और हवा महल सहित कई स्मारकों की प्रतिकृतियां बनायी गई हैं। इसका उद्घाटन गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को करेंगे। इसके बाद जनता के लिए भारत दर्शन पार्क खोल दिया जाएगा। उद्यान में कुल 22 प्रतिकृतियां हैं। इनमें 21 स्मारकों और एक पेड़ की प्रतिकृतियां शामिल हैं। पार्क का विषय ‘एकता और विविधता है और ये कलाकृतियां स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अत्यधिक सम्मान दर्शाती हैं।
इस ऐतिहासिक पार्क को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के द्वारा ‘अपशिष्ट से संपदा मॉडल पर बनाया गया मनोरंजन उद्यान, कुछ विलंब से खोला जा रहा है।

दर्शकों के लिए आज से खुल जाएगा दिल्ली में भारत दर्शन पार्क
-गृहमंत्री अमित शाह करेंगे उद्घाटन, कबाड़ से बनी हैं आकर्षक प्रतिकृतियां
-8 एकड़ में फैले पार्क में 21 स्मारकों और एक पेड़ की प्रतिकृतियां शामिल

इस उद्यान का उद्घाटन ऐसे समय हो रहा है, जब अगले साल की शुरुआत में दिल्ली में निकाय चुनाव होने हैं। उद्यान को पहले अक्टूबर के अंत तक खोले जाने की उम्मीद थी। इसमें पहले अमृतसर के श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) की प्रतिकृति को भी शामिल किया गया था। लेकिन सिख संगठनों के विरोध के चलते ऐन वक्त पर उसे हटा दिया गया। दक्षिण दिल्ली के मेयर मुकेश सूर्यन ने कहा, कल खुलने वाले पार्क में स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति नहीं है। दक्षिण दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके में स्थित पार्क में पवित्र सिख धर्मस्थल की प्रतिकृति के निर्माण को लेकर जून में एक विवाद छिड़ गया था, जिसके बाद इसे हटा दिया गया था। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने गत जून के अंत में दावा किया था कि पार्क में बनाए जा रहे मंदिर की प्रतिकृति को हटा दिया गया है क्योंकि यह सिख मर्यादा के खिलाफ था।
बता दें कि इस परियोजना पर लगभग 16 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इन प्रतिकृतियों को पुराने वाहनों, पंखे, लोहे की छड़, नट और बोल्ट जैसे बेकार सामान और अपशिष्ट सामग्री से बनाया गया है।

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