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Sunday, December 4, 2022

महिलाएं सावधान, ब्रेस्ट मिल्क का विकल्प नहीं है फॉर्मूला मिल्क

नई दिल्ली/ अमित बैजनाथ गर्ग ; दुनिया में इन दिनों ब्रेस्ट मिल्क (मां का दूध) बनाम फॉर्मूला मिल्क की बहस चल रही है। दो अलग धड़ों में बंटी इस बहस के पक्ष में भी तर्क दिए जा रहे हैं और विपक्ष में भी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 0-6 महीने तक के शिशु को केवल मां का दूध ही पिलाने की सिफारिश करता है। फिर भी ब्रेस्ट मिल्क और फॉर्मूला मिल्क को लेकर बहस का दौर जारी है। दुनिया की तरह भारत भी इस बहस से अछूता नहीं है। बहस के दौरान कई बार कुछ ऐसी बातें कही जाती हैं, जिनका कोई आधार नहीं होता। डब्ल्यूएचओ ब्रेस्ट मिल्क को लेकर जागरुकता अभियान भी चलाता है, जिसका महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है विश्व स्तनपान सप्ताह।
ब्रेस्ट मिल्क के बारे में जानकारियों की कमी नहीं है। इसके फायदे बताते हुए कई बोर्ड और होर्डिंग अस्पतालों, आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत कई सार्वजनिक स्थलों पर देखने को मिल जाएंगे। डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ही उसे मां का पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ती है।

 – बच्चे के लिए सबसे बेहतर ब्रेस्ट मिल्क है, न कि फॉर्मूला मिल्क
— कंपनियों के विज्ञापन के जरिए फैलाए जा रहे कारोबारी भ्रम
—महिलाओं को समझना होगा, कंपनियों के झांसे में न आएं

बावजूद इसके, कई बार सही जानकारी नहीं होने और सहयोग की कमी की वजह से कई मांएं ब्रेस्ट मिल्क के विकल्प के तौर पर फॉर्मूला मिल्क का इस्तेमाल करती हैं। कई मांओं की शिकायत होती है कि उन्हें पर्याप्त दूध नहीं होता, जिसकी वजह से मजबूरी में उन्हें फॉर्मूला मिल्क का इस्तेमाल करना पड़ता है।
फॉर्मूला मिल्क को बेबी फॉर्मूला या इन्फेंट फॉर्मूला के नाम से भी जाना जाता है। यह सामान्य तौर पर गाय के दूध से बनता है। इसे ट्रीट करके बच्चे के लिहाज से उपयुक्त बनाया जाता है। इसे ब्रेस्ट मिल्क का विकल्प माना जाता है, लेकिन अगर बच्चे की सेहत की बात करें तो डब्ल्यूएचओ ब्रेस्ट फीडिंग (स्तनपान) को ही आदर्श आहार मानता है।

स्तनपान और फॉर्मूला मिल्क को लेकर कई तरह के मिथक भी हैं। जानकारियों के अभाव में लोग कही-सुनी बातों पर भी विश्वास कर लेते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के लिए स्तनपान ही बेहतर होने की जानकारी हर मां के पास होती है। समस्या यहां आती है कि गलत जानकारी की वजह से वह मान बैठती हैं कि ब्रेस्ट मिल्क उसके शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है।
असल में यह सारा खेल फॉर्मूला मिल्क और इससे जुड़े उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के विज्ञापन के जरिए फैलाए जा रहे कारोबारी भ्रम का है, जिसे महिलाओं को समझना होगा। महिलाओं को इन कंपनियों के झांसे में आकर कोई भी राय बनाने से बचना चाहिए। फॉर्मूला मिल्क को इस तरह तैयार से किया जाता है कि वह ब्रेस्ट मिल्क के करीब हो। हालांकि ऐसा होता नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट दोनों में हैं, लेकिन ब्रेस्ट मिल्क की खासियत है कि उसमें जो प्रोटीन है, वह आसानी से पचता है। इससे बच्चे को कब्ज की समस्या नहीं होती। ब्रेस्ट मिल्क इम्यूनिटी बढ़ाता है और संक्रमण को रोकता है। यह क्षमता फॉर्मूला मिल्क में नहीं है। ब्रेस्ट मिल्क में कुछ ऐसे तत्व भी हैं, जो बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए जरूरी हैं। ब्रेस्ट मिल्क में मिलने वाले विटामिन प्राकृतिक हैं, जबकि फॉर्मूला मिल्क में सिंथेटिक हैं। स्तनपान करने वाले बच्चों में मोटापे की समस्या कम होती है, जबकि फॉर्मूला मिल्क पीने वाले बच्चों का वजन ज्यादा बढ़ता है।

केवल 41 प्रतिशत शिशुओं को ही 6 महीने तक स्तनपान कराया जाता

डब्ल्यूएचओ ने 1981 में इंटरनेशनल कोड ऑफ मार्केटिंग ब्रेस्ट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स तैयार किया था। इसके आधार पर भारत में 1992 में आईएमएस एक्ट लागू हुआ। यूनिसेफ का कहना है कि वैसे शिशु जिन्हें केवल स्तनपान कराया जाता है, उनकी मृत्यु की आशंका उन शिशुओं की तुलना में 14 गुना कम होती है, जिन्हें स्तनपान नहीं कराया जाता है। हालांकि अभी केवल 41 प्रतिशत शिशुओं को ही 0-6 महीने के बीच सिर्फ स्तनपान ही कराया जाता है। डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों ने 2025 तक इस दर को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। उसका कहना है कि शिशुओं को पहले 6 महीनों के लिए मां के दूध के अलावा कुछ भी नहीं देना चाहिए। इसके बाद उन्हें 2 साल या उससे अधिक उम्र तक स्तनपान के साथ अन्य पौष्टिक और सुरक्षित खाद्य पदार्थ देने चाहिए।

ब्रिटेन की महिलाएं सबसे कम ब्रेस्ट फीडिंग कराती

एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया में ब्रिटेन की महिलाएं सबसे कम समय तक ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार महिलाओं को स्तनपान शुरू कराने के समय परेशानियां हो सकती हैं। यह भी जरूरी नहीं है कि उन्हें हमेशा सही सलाह और सहयोग भी मिल जाए। कई बार महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर भी स्तनपान कराने में हिचकती हैं। इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान यह है कि दुनियाभर की महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्ट फीडिंग के प्रति असहजता को दूर करने के बारे में समझाया जाए। उन्हें बच्चे को अधिक समय तक स्तनपान कराने के लाभ बताना जरूरी है। साथ ही उन्हें यह भी समझाना होगा कि ब्रेस्ट मिल्क का विकल्प फॉर्मूला मिल्क कभी नहीं बन सकता है। इसके लिए हम सभी को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

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