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Sunday, December 4, 2022

बीजेपी का दावा , UPA सरकार में ही हुआ था ABG शिपयार्ड घोटाला

नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डैय : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एबीजी शिपयार्ड मामले में फैलाये जा रहे भ्रम का पर्दाफाश करते हुए कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। साथ ही कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा जो चार्जशीट दाखिल की गई है। इसे स्पष्ट होता है कि एबीजी शिपयार्ड घोटाला यूपीए सरकार में ही हुआ था, जिस पर केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने कार्रवाई की। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान केंद्र सरकार पर एक आधारहीन और अनर्गल भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का प्रयास किया है। सीबीआई ने बीते कल जो चार्जशीट रखी है उससे बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि जिसे वे 22 हजार करोड़ रुपये का सबसे बड़ा घोटाला कह रहे हैं। दरअसल, डॉ मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के शासनकाल में हुआ घोटाला था, जिस पर केंद्र सरकार ने कार्रवाई की। सीबीआई की चार्जशीट की टाइम लाइन देखने से स्पष्ट होता है कि एबीजी शिपयार्ड घोटाले का कांग्रेस के साथ आत्मीय और अंतरंग संबंध है।

-बीजेपी ने एबीजी शिपयार्ड मामले में कांग्रेस पर किया पलटवार
— घोटाले का कांग्रेस के साथ आत्मीय और अंतरंग संबंध है : सुधांशु त्रिवेदी
-2011 में एबीजी शिपयार्ड को नौसेना का एक बड़ा आर्डर दिया गया
-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस करार को रद्द किया था : बीजेपी

डॉ त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार में आंकठ डूबी हुई है। एबीजी शिपयार्ड कंपनी के प्रमोटर्स के कांग्रेस अध्यक्षा के पूर्व राजनैतिक सलाहकर के बहुत नजदीकी संबंध माने जाते थे । यह घोटाला कांग्रेस के जमाने का है। उन्हीं के समय में गड़बडिय़ां हुईं। उन्हीं के समय एनपीए घोषित किया गया और मार्च 2014 में कंपनी के लोन की रिस्टक्यचरिंग भी की गयी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा एबीजी शिपयार्ड के एनपीए होने और उसके एकाउन्टस में हेराफेरी कराने के आरोप को तथ्यहीन बताया। साथ ही कहा कि टाइम लाइन के अनुसार एबीजीए शिपयार्ड 30 नवंबर, 2013 को एनपीए हो गयी। सबसे ज्यादा हेराफेरी 2005 से 2012 के बीच हुई। एबीजी शिपयार्ड को जून 2011 में 970 करोड़ रुपए और जनवरी 2012 में 500 करोड़ रुपए का आर्डर दिया गया। 2004 से 2014 तक कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की मनमोहन सरकार थी। इसी बीच 2011 में एबीजी शिपयार्ड को नौसेना का एक बड़ा आर्डर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कि सरकार ने इस करार को रद्द किया था।

डॉ त्रिवेदी ने एबीजी शिपयार्ड घोटाले में कांग्रेस के संलिप्त होने का आरोप लगते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में, मार्च 2014 में एबीजी शिपयार्ड को दिए गए ऋण का पुनर्निर्धारण किया गया था। 2016 में जब फाइनली आडिट रिपोर्ट आयी तो उन्हें दोषी पाया गया और उस कंपनी को फ्रॉड घोषित किया गया।
डॉ त्रिवेदी ने कांग्रेस द्वारा तथ्यों को छुपाकर बेबुनियाद आरोप लगाने पर कहा कि कंपनी गुजरात में जहाज बनाने का काम करती थी। कांग्रेस ने जानबूझकर यह बात छुपाई कि कंपनी का टर्नओवर मुंबई और पूणे कार्यालय से होता था और कॉर्पोरेट आफिस मुम्बई के मैथ्यूरोड में भूपति चैम्बर्स नामक बिल्डिंग में था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कांग्रेस पार्टी ने अब तक जिस प्रकार के अनर्गल अपशब्दों का प्रयोग किया है, क्या वही शब्द घोटाले में संलिप्त कांग्रेस पर खुद लागू नहीं होते? उन्होंने कांग्रेस पार्टी को नसीहत देते हुए कहा कि जब किसी विषय के ऊपर आरोप लगाना हो तो कुछ तथ्यों का अध्ययन आवश्यक है, इतनी आकुलता और व्याकुलता में बयान देना उचित नहीं। और यह भी ध्यान रखें कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार के बीच चोली दामन का संबंध है। एबीजी शिपयार्ड भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस अपने आप को स्वयं एक्सपोज कर लिया है।

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