spot_img
21.1 C
New Delhi
Monday, October 18, 2021
spot_img

महामारी से बचने के लिए सामूहिक एवं एकजुट कार्रवाई जरूरी : मोदी

– ब्रिटेन के कॉर्नवैल में आयोजित दो दिवसीय 47वें जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम ने भाग लिया

नई दिल्ली, टीम डिजिटल: भारत ने कोविड-19 (COVID-19) महामारी जैसी वैश्विक आपदाओं से दुनिया को बचाने के लिए वसुधैव कुटुम्बकम् के मंत्र के आधार पर एकजुट एवं सामूहिक रूप से कदम उठाने तथा अधिनायकवाद, आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, दुष्प्रचार एवं मिथ्या सूचनाओं तथा आर्थिक दमन के खतरों से मानवीय मूल्यों की रक्षा का आज आह्वान किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिटेन के कॉर्नवैल में आयोजित दो दिवसीय 47वें जी-7 शिखर सम्मेलन (G-7 Summit) में वीडिया लिंक के माध्यम से भाग लिया। हाइब्रिड मॉड में आयोजित इस सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने की। सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों, जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सीरिल रामाफोसा और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन शामिल हुए। जॉनसन ने टेलीफोन करके मोदी से ब्रिटेन आने एवं सम्मेलन में भाग लेने की आग्रह किया था लेकिन प्रधानमंत्री ने देश में कोविड-19 महामारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए व्यक्तिगत रूप से आने में असमर्थता व्यक्त की थी।

जी-7 के दूसरे दिन की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बने प्रमुख वक्ता
सम्मेलन में दूसरे दिन रविवार को खुले समाज एवं मुक्त अर्थव्यवस्था शीर्षक वाले सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) प्रमुख वक्ता थे। उन्होंने लोकतंत्र तथा विचार की स्वतंत्रता को लेकर भारत की सभ्यतागत प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते भारत जी-7 एवं मेहमान देशों का स्वाभाविक साझीदार है जो अधिनायकवाद, आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, दुष्प्रचार एवं मिथ्या सूचनाओं तथा आर्थिक दमन के खतरों से अपने समान मूल्यों की रक्षा करने के लिए कृतसंकल्प है। मोदी ने भारत में सामाजिक समावेशन एवं सशक्तीकरण के लिए डिजीटल प्रौद्योगिकी के क्रांतिकारी प्रभाव जैसे आधार, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण आदि के बारे में जानकारी दी और यह भी कहा कि खुले समाज में कुछ खतरे भी आसन्न हैं। उन्होंने प्रौद्योगिकी संबंधी कंपनियों एवं सोशल मीडिया मंचों का आह्वान किया कि वे अपने उपभोक्ताओं को एक सुरक्षित साइबर वातावरण सुनिश्चित करें।

यह भी पढ़ें… ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ ने बनाया कीर्तिमान, पहुंचाया 1734 टैंकरों में ‘सांसे’

जी-7 सम्मेलन में भारत की उपलब्धियों पर की गई चर्चा
प्रधानमंत्री के विचारों की अन्य नेताओं ने भूरि भूरि प्रशंसा की। जलवायु परिवर्तन पर आयोजित सत्र में मोदी ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा कि इस चुनौती से अलग अलग प्रयासों से नहीं निपटा जा सकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर भारत की उपलब्धियों की चर्चा की और कहा कि जी-20 देशों में भारत एकमात्र देश है जो तापमान में दो डिग्री की कमी लाने संबंधी पेरिस सम्मेलन के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने जी-7 देशों के जलवायु कार्रवाई के महत्वाकांक्षी लक्ष्याें एवं नेट जीरो लक्ष्यों की घोषणा की सराहना की और कहा कि इस कार्रवाई में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वित्तपोषण एवं साझीदारी तथा जलवायु न्याय एवं जीवनशैली में बदलाव आदि सभी आयामों को जोड़ना होगा ताकि विकासशील देशों को प्रगति का मौका मिले। उन्होंने जी-7 को जलवायु वित्तपोषण के लिए सौ अरब डॉलर प्रतिवर्ष देने के पुराने वादे को पूरा करने को भी कहा। श्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड़ तथा आपदा प्रतिरोधक अवसंरचना गठबंधन जैसे वैश्विक पहलों में भारत के नेतृत्व को भी रेखांकित किया।

यह भी पढ़ें… दिल्ली में कोरोना काबू, आज से खुलेंगे सभी बाजार एवं मॉल

सम्मेलन के पहले दिन “बिल्डिंग बैक स्ट्रॉन्गर -हैल्थ” पर हुई चर्चा 
सम्मेलन में पहले दिन शनिवार की शाम को मोदी ने पहले सत्र में भाग लिया था जिसका शीर्षक “बिल्डिंग बैक स्ट्रॉन्गर -हैल्थ” था जो कोविड महामारी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को उबारने तथा भविष्य में होने वाली महामारियों के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता सशक्त करने पर केन्द्रित था। इस सत्र में प्रधानमंत्री ने ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’  का नारा दिया जिसका जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने समर्थन किया। श्री मोदी ने कोविड-19 जैसी महामारियों की भविष्य में रोकथाम के लिए लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी समाजों को विशेष रूप से जिम्मेदार बताते हुए वैश्विक नेतृत्व एवं एकजुटता कायम करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने महामारी से मुकाबले में भारत के पूरे समाज की भागीदारी तथा हर स्तर पर सरकार, उद्योग एवं नागरिक समाज के बीच गहन समन्वय के व्यवहार को रेखांकित किया। उन्होंने संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वालों की पहचान एवं टीकाकरण प्रबंधन के लिए डिजीटल माध्यम के उपयोेग की सफलता की जानकारी दी और कहा कि भारत इस बारे में अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता को साझा करने का इच्छुक है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन को सुदृढ़ करने के सामूहिक प्रयास का समर्थन करने के भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा टीका के विनिर्माण के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापारिक पहलुओं (ट्रिप्स) पर समझौते में रियायत देने के लिए विश्व व्यापार संगठन में भारत एवं दक्षिण अफ्रीका द्वारा पेश प्रस्ताव को जी-7 का समर्थन मांगा। ऑस्ट्रेलिया एवं अन्य देशों ने भी इसका मजबूती से समर्थन किया। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीका बनाने के लिए कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला खुली रखी जाये जिससे भारत जैसे देशों में टीका उत्पादन बढ़ाया जा सके। इस बात काे भी व्यापक समर्थन मिला।

भारत की भागीदारी से जी-7 के सदस्य देशों एवं मेहमान देशों के साथ संबंधों में गहनता आयी
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (आर्थिक संबंध) पी हरीश ने जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी एवं सम्मेलन के परिणामों की चर्चा करते हुए बताया कि भारत की भागीदारी से जी-7 के सदस्य देशों एवं मेहमान देशों के साथ हमारे संबंधों में गहनता आयी है एवं विस्तार हुआ है। इससे यह भी परिलक्षित हुआ है कि जी-7 में इस बात की समझ बनी है कि संसार की हमारे समय की सबसे बड़ी आपदा का समाधान भारत की भागीदारी एवं समर्थन के बिना संभव नहीं है। हरीश ने कहा कि वैश्विक नेताओं ने एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम आधारित हिन्द प्रशांत क्षेत्र के प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा इसके लिए क्षेत्रीय साझीदारों के साथ सहयोग का संकल्प दोहराया। उन्होंने खुले समाज के वक्तव्य में बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार करके उसे खुलेपन, लोकतांत्रिक, पारदर्शी एवं समावेशी के सिद्धांत पर आधारित बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हम सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों जैसे स्वास्थ्य प्रशासन, टीके की सुलभता, जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता तथा आर्थिक प्रतिरोध क्षमता जैसे मुद्दों पर जी-7 एवं मेहमान साझीदारों के निकट संपर्क में रहेंगे।

Previous article08 JUNE 2021
Next article09 JUNE 2021

Related Articles

epaper

Latest Articles