24.2 C
New Delhi
Wednesday, February 24, 2021

सिख धर्म को अलग धर्म घोषित करने की राष्ट्रपति से गुहार

सिख धर्म को अलग धर्म घोषित करने की राष्ट्रपति से गुहार
–सिखों ने संविधान दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखा पत्र
–सिखों को मिले अंतरराष्ट्रीय हवाई उड़ानों में कृपाण सहित जाने की अनुमति

(अदिति सिंह)

नई दिल्ली,   : सिखों की अगुवाई करने वाले एक संगठन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संविधान दिवस पर पत्र लिखकर संविधान के अनुच्छेद 25(बी) में एक अध्यादेश के जरिए संविधान संशोधन करते हुए सिखों धर्म को अलग धर्म घोषित करने की माँग की गई है। साथ ही संविधान में सिखों को कृपाण धारण करने के मिले अधिकार का राष्ट्रपति को हवाला देते हुए कार्यपालिका को इस संबंधी जागरूक करने की अपील की है।

इसके अलावा पत्र के जरिये बताया कि भारत के संविधान में सिखों के लिए विरोधाभासी तर्क है। एक तरह सिखों को अनुच्छेद 25(बी) हिंदू धर्म की शाखा बताता है, तो वहीं सिख को कृपाण डालने की आजादी है। इसलिए कहीं न कहीं संविधान निर्माताओं ने यह एक बड़ी चूक की है, जिसे देश के 70वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2020 से पहले सुधारना चाहिए।

 


धार्मिक पार्टी जागो के अध्यक्ष अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने इस बावत कहा कि विदेशों में भी सिखों को कृपाण धारण करने व अपनी परंपराओं के पालन की आजादी है। पर भारत में कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में सिखों को कड़े व कृपाण के साथ परीक्षा केंद्र में दाखिल होने पर गैर कानूनी तरीके से धातु वस्तु पर रोक के नाम पर रोका जा रहा है, जो कि गलत रुझान की शुरुआत है। सिख के लिए कड़ा व कृपाण धार्मिक आस्था के चिन्ह है। इसको रोकने से सिख को नागरिक के तौर पर संविधान से मिले धार्मिक आजादी के हक पर भी चोट पहुँचती है। एक तरफ कैनेडा में सिखों को अंतरराष्ट्रीय हवाई उड़ानों में भी कृपाण धारण करने की छूट है, वहीं दूसरी तरह अपने देश में सिखों को कृपाण सहित परीक्षा केंद्र में जाने से रोका जा रहा है। जबकि करतारपुर कॉरिडोर व वाघा बार्डर के जरिए पाकिस्तान जाने वाले सिख भी कृपाण सहित जाते है।

कृपाण सहित उड़ान भरने का आदेश जारी किया जाए

जीके ने राष्ट्रपति से अपील की कि संविधान दिवस की भावना के मद्देनजर संविधान में संशोधन करके सिख धर्म को अलग धर्म के तौर पर मान्यता दी जाए। सिखों को भारत से जाने वाली अंतरराष्ट्रीय हवाई उड़ानों में भी कृपाण सहित उड़ान भरने का आदेश जारी किया जाए। साथ ही कार्यपालिका का हिस्सा बनने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग में सिखों के कृपाण घारण करने के संविधानिक हक की जानकारी देनी आवश्यक की जाए।

Related Articles

Stay Connected

21,581FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles