नई दिल्ली, 1 फरवरी (WomenExpress)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यूनियन बजट 2026 पेश किया। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट है। बजट में कई ऐसी घोषणाएं हैं जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालेंगी। स्वास्थ्य, यात्रा और व्यक्तिगत खरीदारी से जुड़ी चीजें सस्ती होंगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में टैक्स बढ़ने से लागत बढ़ेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी राहत
बजट में कैंसर से जुड़ी 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है। इससे इन दवाओं की कीमत कम होगी और मरीजों को फायदा पहुंचेगा। साथ ही, 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और विशेष चिकित्सकीय भोजन पर व्यक्तिगत आयात के लिए आयात शुल्क में छूट दी गई है। यह कदम उन मरीजों के लिए बहुत उपयोगी है जो ऐसी दवाएं बाहर से मंगवाते हैं।
व्यक्तिगत आयात और विदेश यात्रा सस्ती
व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात होने वाली सभी देय वस्तुओं पर टैरिफ दर 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। इससे ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से विदेश से सामान मंगवाना सस्ता हो जाएगा।
विदेश यात्रा टूर पैकेज पर टीसीएस की दर 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। अब कोई न्यूनतम राशि की शर्त नहीं रहेगी। विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए एलआरएस स्कीम के तहत भी टीसीएस 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है।
अन्य चीजें जो सस्ती होंगी
बजट में माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स, जूते, सोलर एनर्जी से जुड़े सामान, बैटरी, बायोफ्यूल वाली सीएनजी, हवाई जहाज के कलपुर्जे, चमड़े का निर्यात और बीड़ी आदि पर भी कस्टम ड्यूटी में छूट या कमी दी गई है। इससे इन उत्पादों की कीमत कम होने की उम्मीद है।
महंगी होने वाली चीजें
कुछ क्षेत्रों में टैक्स बढ़ने से लागत बढ़ेगी। शराब (मानव उपभोग के लिए) पर टीसीएस की दर 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।
कोयला, कबाड़ (स्क्रैप) और कुछ खनिजों पर आयात शुल्क में इजाफा या टीसीएस रेशनलाइजेशन से ये चीजें महंगी हो सकती हैं।
शेयर बाजार और ट्रेडिंग पर असर
डेरिवेटिव ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाया गया है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किया गया है।
शेयर बायबैक में होने वाले फायदे को सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन में लाया जाएगा। इससे बायबैक से मिलने वाली आय पर अधिक टैक्स लगेगा, खासकर प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
ये बदलाव आम आदमी को स्वास्थ्य, यात्रा और व्यक्तिगत खरीदारी में राहत देंगे, लेकिन शेयर ट्रेडिंग और कुछ आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। बजट का फोकस ईज ऑफ लिविंग और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर है।
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