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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ, 30 जून तक छूट

ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ करने का फैसला लिया है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी । पढ़िए पूरी खबर.

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ करने का फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी और इसका मकसद देश में कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखना, डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर लागत का बोझ कम करना तथा अंतिम उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना है। इस कदम से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे कई सेक्टर्स को फायदा होने की उम्मीद है।

पेट्रोकेमिकल इनपुट पर कस्टम ड्यूटी में छूट: सरकार का अस्थायी कदम

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह राहत अस्थायी और लक्षित है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिससे पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की आपूर्ति में दिक्कतें आ सकती हैं। सरकार ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कुछ जरूरी पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर पूरी कस्टम ड्यूटी घटाकर शून्य कर दी है।

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इस छूट से प्लास्टिक सामान, पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल और अन्य मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में उत्पादन लागत कम होने की संभावना है। अंत में आम उपभोक्ताओं को भी सस्ते उत्पाद मिल सकते हैं। हालांकि, इस फैसले से सरकार को लगभग 1800 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है, जो पिछली दरों के आधार पर किया गया है। यह छूट केवल तीन महीने के लिए है।

शामिल प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सूची

सरकार द्वारा जारी सूची में कई अहम उत्पाद शामिल हैं। इनमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मेथनॉल (मेथाइल अल्कोहल), आइसोप्रोपिल अल्कोहल, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (एमईजी) और फिनोल प्रमुख हैं।

इसके अलावा एसिटिक एसिड, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्योरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (पीटीए), अमोनियम नाइट्रेट, एथिलीन के पॉलिमर (एथिलीन-विनाइल एसीटेट सहित), एपॉक्सी रेजिन, फॉर्मेल्डिहाइड, यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड, मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड और फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड जैसे उत्पाद भी इस छूट के दायरे में आएंगे। इनका इस्तेमाल उर्वरक, प्लास्टिक, रेजिन और कई अन्य उद्योगों में होता है।

RoDTEP योजना के तहत निर्यातकों को राहत

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण शिपिंग लागत बढ़ने और व्यापारिक जोखिमों को देखते हुए सरकार ने पहले ही RoDTEP (निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) योजना के तहत सभी पात्र निर्यात उत्पादों के लिए दरें और वैल्यू कैप बहाल कर दिए हैं। यह फैसला 23 मार्च से प्रभावी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एडिशनल सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि जीसीसी देश महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। खाद्य, कृषि, इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, ऊर्जा, पेट्रोलियम, रसायन और फार्मा क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए निर्यात दायित्व की अवधि तीन महीने बढ़ा दी गई है। आभूषण निर्यातकों को शिपिंग में देरी होने पर कोई जुर्माना नहीं देना होगा। सोने और कीमती धातुओं के आयात से जुड़े निर्यात दायित्व की समय सीमा भी बढ़ाई गई है।

पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। पंपों पर कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राकृतिक गैस की पूरी आपूर्ति हो रही है। आठ राज्यों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त गैस दी गई है।

3.33 लाख पीएनजी कनेक्शनों को गैस सप्लाई की गई है और 2.90 लाख नए पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। कई लोग एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट कर रहे हैं। 12,400 लोगों ने एलपीजी कनेक्शन वापस कर दिए हैं। 23 मार्च के बाद 4.30 लाख 5 किलो एफटीएल सिलेंडर बेचे गए हैं। सरकार का कहना है कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, एलपीजी और एलएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। विभिन्न वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से ऊर्जा की आपूर्ति भी जारी है।

मंत्रालयों की ब्रीफिंग और कुल प्रभाव

मंत्रालयों की संयुक्त ब्रीफिंग में वित्त मंत्रालय के अधिकारी संजय मंगल ने कहा कि पेट्रोकेमिकल इनपुट पर ड्यूटी छूट से कई क्षेत्रों को फायदा होगा और आपूर्ति स्थिर रहेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने दोहराया कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कोई समस्या नहीं है।

यह फैसला ईरान युद्ध और समुद्री मार्गों में बाधाओं के बीच उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को सपोर्ट देना और आम लोगों को महंगाई से बचाना है। कुल मिलाकर, यह कदम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देगा और सप्लाई चेन को सुचारू रखेगा।

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