नई दिल्ली/खुशबू पाण्डेय। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (TEPA) की दूसरी वर्षगांठ पर ASSOCHAM ने एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वर्चुअल रूप से मुख्य भाषण देते हुए कहा कि यह समझौता वैश्विक व्यापार इतिहास में पहली बार किसी मुक्त व्यापार समझौते में $100 बिलियन (लगभग 8.3 लाख करोड़ रुपये) के निवेश और भारत में 10 लाख नौकरियां पैदा करने की कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता शामिल करता है।
यह भारत की नई व्यापार नीति का प्रतीक है, जो केवल टैरिफ कम करने से आगे बढ़कर निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है। कार्यक्रम में उद्योगपति, राजनयिक और नीति निर्माताओं ने इस समझौते के रणनीतिक महत्व पर चर्चा की और ट्रेड, टेक्नोलॉजी तथा इनोवेशन में नए अवसरों पर जोर दिया।
भारत-EFTA TEPA समझौते की दूसरी वर्षगांठ का जश्न
ASSOCHAM (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) ने 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारत-EFTA TEPA की दूसरी वर्षगांठ मनाने के लिए एक स्मरणोत्सव सत्र का आयोजन किया। यह समझौता 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित हुआ था और 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हो गया। EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। सत्र में नीति निर्माताओं, राजनयिकों और उद्योग नेताओं ने भाग लिया, जिनमें स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड में भारत के राजदूत भी शामिल थे।
सत्र की अध्यक्षता त्रिभुवन दरबारी ने की, जो BIMSTEC बिजनेस काउंसिल सेक्रेटेरिएट (भारत) के चेयरमैन, SCO बिजनेस काउंसिल सेक्रेटेरिएट (भारत) के नेशनल पार्ट चेयरमैन, टेक्समैको डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के MD एवं CEO तथा टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के चीफ एग्जीक्यूटिव हैं।
पीयूष गोयल का मुख्य भाषण: ऐतिहासिक निवेश प्रतिबद्धता
वर्चुअल मुख्य भाषण में पीयूष गोयल ने TEPA को भारत और यूरोप के बीच गहरे आर्थिक जुड़ाव की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यापक और भविष्योन्मुखी है, जो व्यापार, तकनीक, इनोवेशन और निवेश को बढ़ावा देता है। मंत्री ने जोर दिया कि यह पहली बार है जब किसी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में $100 बिलियन के निवेश और भारत में 10 लाख नौकरियां पैदा करने की प्रतिबद्धता शामिल की गई है।
गोयल ने कहा, “यह ग्लोबल ट्रेड नेगोशिएशंस में भारत के नए दृष्टिकोण को दर्शाता है।” उन्होंने आगे बताया कि समझौते की सफलता डील से डिलीवरी तक निर्भर करती है। अब सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा ताकि यह बढ़े हुए व्यापार, अधिक निवेश और मजबूत आर्थिक साझेदारी में बदल सके।
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि TEPA साझा समृद्धि और अधिक समावेशी साझेदारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में किसानों, मछुआरों और घरेलू उद्योगों के हितों की पूरी रक्षा की गई है। डेयरी और जीएम उत्पाद जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को नहीं खोला गया है।

त्रिभुवन दरबारी का संबोधन: आर्थिक कूटनीति का नया मॉडल
त्रिभुवन दरबारी ने कहा कि व्यापार समझौते सिर्फ टैरिफ, कोटा और बाजार पहुंच तक सीमित नहीं होते। वे देशों के बीच विश्वास निर्माण, आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देने और महाद्वीपों में समृद्धि के रणनीतिक संरेखण को दर्शाते हैं।
दरबारी ने TEPA की बदलाव लाने वाली क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह समझौता $100 बिलियन निवेश ला सकता है और लगभग 10 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है। साथ ही, यह भारत की उच्च-मूल्य वाली यूरोपीय बाजारों में मौजूदगी को मजबूत करेगा।
उन्होंने भारत के सर्विस सेक्टर की भूमिका पर जोर दिया, जो देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में करीब 55 प्रतिशत योगदान देता है। TEPA 100 से अधिक सर्विस सब-सेक्टरों में बाजार पहुंच प्रदान करता है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी, बिजनेस सर्विसेज, शिक्षा और ऑडियोविजुअल उद्योग शामिल हैं।
उद्योग और सरकार की साझा प्रतिबद्धता
ASSOCHAM के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने स्वागत भाषण में कहा कि भारत-EFTA समझौता सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, बल्कि एक भविष्योन्मुखी साझेदारी है जो आर्थिक सहयोग मजबूत करती है, इनोवेशन को बढ़ावा देती है और दोनों पक्षों के व्यवसायों तथा निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के विजन और लगातार GDP वृद्धि के दौर में ऐसे समझौते वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, इनोवेशन बढ़ाने और उद्योग के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ASSOCHAM सरकार, व्यवसाय और निवेशकों के बीच संवाद आसान बनाकर इस साझेदारी को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
दरबारी ने कई रणनीतिक पहलों का सुझाव दिया, जैसे भारत-EFTA इनोवेशन कॉरिडोर बनाना, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करना, MSME को EFTA बाजारों में एकीकृत करना और एडवांस्ड इंजीनियरिंग, नवीकरणीय तकनीक तथा स्किल डेवलपमेंट में जॉइंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करना।
उन्होंने स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसी इनोवेशन-प्रधान अर्थव्यवस्थाओं के साथ तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया। ये देश प्रिसिजन इंजीनियरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और रिसर्च में मजबूत हैं, जो भारत की तकनीकी प्रगति को तेज कर सकते हैं।
मुख्य प्रतिभागी और भविष्य की दिशा
सत्र में आशीष सराफ (ASSOCHAM बिजनेस थ्रू डिप्लोमेसी काउंसिल के चेयरमैन), आर. रवींद्र (आइसलैंड में भारत के राजदूत), मृदुल कुमार (स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन में भारत के राजदूत), ग्लोरिया गंगटे (नॉर्वे में भारत की राजदूत), जुआन पेड्रो श्मिड (स्विट्जरलैंड एम्बेसी के आर्थिक, व्यापार एवं वाणिज्य विभाग प्रमुख) और अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।
सत्र ने भारत-EFTA आर्थिक सहयोग की बढ़ती गति की पुष्टि की और सरकारों तथा उद्योग के बीच TEPA के लाभ उठाने की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत किया। इसका उद्देश्य व्यापार, तकनीकी सहयोग, इनोवेशन साझेदारी और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है, जो निवेश और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस करता है।
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