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Sunday, February 22, 2026

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा खिलाड़ी बनेगा, 11 वर्षों में 6 गुना बढ़ा उत्पादन-अश्विनी वैष्णव

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नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत जल्द ही पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बड़ा खिलाड़ी बनेगा। इसमें डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लीकेशन, मटेरियल और इक्विपमेंट सभी शामिल हैं।

पिछले 11 सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 6 गुना और निर्यात 8 गुना बढ़ा है। एप्पल ने 2025 में भारत से 50 अरब डॉलर के मोबाइल फोन शिप किए हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स देश के टॉप तीन निर्यातों में शामिल हो गया। इस साल चार सेमीकंडक्टर प्लांट में उत्पादन शुरू होगा और सेक्टर में 25 लाख नौकरियां हो चुकी हैं।

मेक इन इंडिया की बड़ी सफलता: एप्पल का रिकॉर्ड निर्यात

अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के तहत एप्पल ने 2025 में भारत से 50 अरब डॉलर यानी करीब 4.15 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन निर्यात किए। यह उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम है। वैष्णव ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और भारत पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स स्टैक में मजबूत होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी

पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 6 गुना बढ़ा है। निर्यात 8 गुना बढ़ने से यह देश के प्रमुख निर्यातों में शुमार हो गया। 46 कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स शुरू हो चुके हैं। लैपटॉप, सर्वर और ऑडियो डिवाइस बनाने वाली कंपनियां भी जुड़ रही हैं। इससे मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी को मजबूती मिल रही है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेज प्रगति

इस साल चार सेमीकंडक्टर संयंत्रों में कमर्शियल उत्पादन शुरू होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में कुल 25 लाख रोजगार हैं। कई फैक्टरियों में एक जगह पर 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। कुछ प्लांट में तो 40 हजार तक कर्मचारी हैं।

डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम को मिली नई मंजूरी

सरकार ने डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) स्कीम के तहत 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। ये प्रोजेक्ट वीडियो निगरानी, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और आईओटी सिस्टम ऑन चिप्स जैसे क्षेत्रों में हैं। चिप डिजाइन सेमीकंडक्टर बनाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा वैल्यू जोड़ता है। यह सप्लाई चेन में 50 प्रतिशत तक योगदान देता है।

स्कीम के तहत अब तक 16 टेप-आउट, 6 एएसआईसी चिप्स, 10 पेटेंट और 1000 से ज्यादा इंजीनियर जुड़ चुके हैं। निजी निवेश भी तीन गुना बढ़ा है। यह भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन में मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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