मुंबई, 1 फरवरी (WomenExpress)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यूनियन बजट 2026 पेश किया। यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट और उनका लगातार नौवां केंद्रीय बजट है। बजट पेश होने के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर से 2,300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में 600 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज हुई। बाजार में हाहाकार मच गया और निवेशकों में सतर्कता छा गई।
बजट के बाद बाजार में भारी बिकवाली
बजट पेश होने के तुरंत बाद बाजार में तेज गिरावट शुरू हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने की घोषणा के कारण हुई। वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया। ऑप्शंस पर भी एसटीटी बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया। इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई, जिससे ट्रेडर्स और ब्रोकर्स में चिंता फैल गई।
बाजार की शुरुआत और सेक्टोरल मूवमेंट
रविवार का कारोबारी सत्र सपाट स्तर पर शुरू हुआ। सेंसेक्स कुछ अंकों की बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी थोड़ा नीचे था। लेकिन बजट भाषण के दौरान ही बिकवाली तेज हो गई। निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और इसमें 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। ऑटो, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में हल्की बढ़त दिखी। टॉप गेनर्स में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल रहा, क्योंकि निवेशकों को रक्षा क्षेत्र में ज्यादा फंड आवंटन की उम्मीद थी।
गिरावट की मुख्य वजहें
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को उम्मीद थी कि बजट में इनकम टैक्स में बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन पिछले साल 2025 में ही बड़े टैक्स सुधार हो चुके थे, इसलिए इस बार कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। एसटीटी बढ़ोतरी ने ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर डालने की आशंका बढ़ा दी। ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े शेयर जैसे बीएसई, एंजेल वन और ग्रो जैसे स्टॉक्स में 10-13 प्रतिशत तक की गिरावट आई। रुपए की कमजोरी (डॉलर के मुकाबले करीब 92 रुपए) ने भी बाजार पर दबाव डाला।
सकारात्मक पहलू और भविष्य की उम्मीदें
बजट में आर्थिक विकास को तेज करने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और लंबे समय के सुधारों पर जोर दिया गया। रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट से जुड़े शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है। पीएसयू बैंकों के विलय और सरकारी हिस्सेदारी बेचने (डिसइन्वेस्टमेंट) से जुड़े ऐलानों पर नजर रहेगी। वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 से 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो स्थिरता का संकेत देता है।
बाजार में आगे क्या होगा
विश्लेषकों का मानना है कि पूरे दिन उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यह पूंजीगत खर्च, सेक्टर को मिलने वाली राहत और वित्तीय घाटे के लक्ष्य पर निर्भर करेगा। निवेशक सरकार के कर्ज, उधारी की योजना और आगे की आर्थिक रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। 30 जनवरी को खरीदे गए शेयर आज सेटलमेंट हॉलिडे के कारण बेचे नहीं जा सके। बाजार में सतर्कता बनी रहेगी, लेकिन कुछ सेक्टर्स में रिकवरी की संभावना भी है।
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