Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,065 अंक टूटकर 82,180.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 353 अंक गिरकर 25,232.50 पर पहुंच गया। इस दौरान निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार में स्वाहा हो गई। आईटी, रियल्टी और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार का माहौल पूरी तरह नकारात्मक रहा।
शेयर बाजार में भारी गिरावट का कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध की आशंका ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के लिए आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ की धमकी दी है, जिससे वैश्विक सेंटिमेंट प्रभावित हुआ। इस वजह से यूरोपीय और एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
एफआईआई की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार दसवें सत्र में नेट बिकवाली की। सोमवार को ही एफआईआई ने लगभग 3,263 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस निरंतर बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ता गया। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने कुछ हद तक सपोर्ट दिया, लेकिन यह पर्याप्त नहीं साबित हुआ।
सेक्टर और प्रमुख शेयरों की स्थिति
निफ्टी के सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। रियल्टी सेक्टर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि ऑटो में 2.50 प्रतिशत और फाइनेंशियल में 1.4 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। बीएसई के टॉप 30 शेयरों में सिर्फ एचडीएफसी बैंक हरे निशान में रहा, बाकी 29 शेयर गिरावट पर बंद हुए। जोमैटो के शेयर सबसे ज्यादा 4 प्रतिशत से अधिक टूटे। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, इंडिगो, रिलायंस और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई। आईटी सेक्टर खासतौर पर प्रभावित रहा, जहां विप्रो 3 प्रतिशत और एलटीआई माइंडट्री 6 प्रतिशत तक गिर गए।
मार्केट कैप में बड़ा नुकसान
सोमवार को बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन 465.68 लाख करोड़ रुपये था, जो मंगलवार को घटकर 455.72 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यानी एक दिन में ही 10.12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। दो दिनों में यह नुकसान और बढ़कर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
सुरक्षित निवेश की ओर रुझान
वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं। मंगलवार को सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, जबकि चांदी ने भी रिकॉर्ड ऊंचाई छुई। यह सुरक्षित निवेश की मांग को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की टैरिफ धमकी, एफआईआई बिकवाली और मिश्रित कॉर्पोरेट नतीजों ने बाजार को नीचे धकेला है। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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