नई दिल्ली, 1 फरवरी (WomenExpress)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सर्विसेज सेक्टर को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने घोषणा की कि युवा भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सर्विसेज क्षेत्र को नई ताकत देने का फैसला लिया गया है।
उच्च स्तरीय कमेटी का गठन
वित्त मंत्री ने उच्च स्तरीय एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइजेज स्टैंडिंग कमेटी (High-Powered Education to Employment and Enterprise Standing Committee) के गठन का प्रस्ताव रखा है। यह कमेटी विकसित भारत के मुख्य चालक के रूप में सर्विसेज सेक्टर पर फोकस करेगी। कमेटी के मुख्य काम होंगे:
- विकास, रोजगार सृजन और निर्यात की उच्च क्षमता वाले क्षेत्रों की पहचान करना।
- इन क्षेत्रों में प्राथमिकता तय करना ताकि संभावनाओं को अधिकतम किया जा सके।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहित उभरती टेक्नोलॉजी के रोजगार और कौशल पर प्रभाव का आकलन करना।
- इन प्रभावों के लिए जरूरी उपाय सुझाना।
इस कमेटी का लक्ष्य भारत को सर्विसेज सेक्टर में वैश्विक लीडर बनाना है, जिसमें 2047 तक ग्लोबल सर्विसेज मार्केट में 10% हिस्सेदारी हासिल करने का उद्देश्य शामिल है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का ऐलान किया गया है। यह पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। इसका मकसद बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी देना, विकास दर बढ़ाना और रोजगार सृजन करना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) की स्थापना की जाएगी। यह फंड लेंडर्स को आंशिक क्रेडिट गारंटी देकर निजी निवेश को आकर्षित करेगा।
बजट में राजमार्गों, बंदरगाहों, रेलवे और बिजली परियोजनाओं को मजबूत प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। साथ ही 7 रणनीतिक क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के तेज सृजन पर फोकस रहेगा।
ये उपाय आर्थिक विकास को गति देने, समावेशी विकास सुनिश्चित करने और विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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