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गाजियाबाद में 22 फर्जी पासपोर्ट मामला: SO भोजपुर और 8 दारोगा लाइन हाजिर, क्या है पूरा मामला?

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों से 22 पासपोर्ट बनवाने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में हुई चूक से यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिसमें थाने के मुंशी ने दरोगाओं के नाम से रिपोर्ट तैयार की। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने एसओ सचिन […]

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों से 22 पासपोर्ट बनवाने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में हुई चूक से यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिसमें थाने के मुंशी ने दरोगाओं के नाम से रिपोर्ट तैयार की। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने एसओ सचिन चौधरी समेत 8 दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि मुंशी दीपक कुमार को सस्पेंड किया गया। 25 लोगों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत FIR दर्ज हुई है। पांच आरोपी, जिनमें दिल्ली के एजेंट और एक पोस्टमैन शामिल हैं, जेल भेजे जा चुके हैं।

जांच में अफगानिस्तान से जुड़े नाम और मुस्लिम बहुल गांवों के फर्जी पते का इस्तेमाल सामने आया, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। दिल्ली इंटेलिजेंस और आईपीएस लिपि नगायच की अगुवाई में जांच जारी है, जिसमें 30 से ज्यादा मोबाइल नंबर्स की पड़ताल हो रही है। यह मामला दिसंबर 2025 में शुरू हुआ था, जब पासपोर्ट आवेदनों में एक ही पते और नंबर्स का इस्तेमाल दिखा।

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पुलिस की लापरवाही: 8 दरोगा लाइन हाजिर, मुंशी सस्पेंड

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने मंगलवार को भोजपुर थाने के प्रभारी सचिन चौधरी और आठ अन्य दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया। इससे एक दिन पहले थाने के मुंशी दीपक कुमार को सस्पेंड किया गया था। जांच में पता चला कि मुंशी ने दरोगाओं की आईडी का इस्तेमाल कर थाने में बैठे-बैठे ही फर्जी वेरिफिकेशन रिपोर्ट तैयार कीं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पासपोर्ट आवेदन ऑनलाइन टैब पर आते हैं, जहां सत्यापन के बाद रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन यहां फिजिकल चेक न होने से फर्जी पते वाले सभी 22 आवेदन पास हो गए।

विभाग ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए यह कार्रवाई की। आईपीएस लिपि नगायच को जांच सौंपी गई है, जबकि दिल्ली से इंटेलिजेंस एजेंसियां भी इसमें जुटी हैं। अगर और लापरवाही सामने आई, तो चौकी इंचार्ज से लेकर कांस्टेबल तक चपेट में आ सकते हैं।

25 के खिलाफ FIR: नाम, धाराएं और 5 जेल भेजे गए

पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया। आरोपी हैं- अमनप्रीत कौर, जसनप्रीत कौर, रितु शर्मा, मेघना राणा, राजकुमारी, दलजीत सिंह, महिंद्र कौर, यशोदा राय, बंशी राय, जीत कौर, शमशेर सिंह, इंद्र सिंह, बलविंद्र सिंह, मनजीत सिंह, रजमीत सिंह, तरनजीत कौर, सिमरनजीत कौर, जगलीन कौर, गुरनूर कौर, जसकरण सिंह, जपमेहर कौर, पोस्टमैन अरुण कुमार, विवेक गांधी और प्रकाश शुक्ला। इनमें से पांच- पोस्टमैन अरुण कुमार (मेरठ निवासी), विवेक गांधी (दिल्ली), प्रकाश शुक्ला (दिल्ली), अमनदीप (हरिनगर, दिल्ली) और उनकी मां सतवंत कौर (तिलकनगर, दिल्ली)- को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाकी 20 फरार हैं, जिनकी तलाश में चार पुलिस टीमें लगी हैं। पोस्टमैन ने हर पासपोर्ट डिलीवरी के बदले 2,000 रुपये लिए थे।

फर्जी कागजात का खेल: आधार से बैंक पासबुक तक सब नकली

जांच में सामने आया कि सभी 22 पासपोर्ट भोजपुर गांव के एक ही फर्जी पते पर बने। आधार कार्ड, बैंक पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज कूटरचित तरीके से तैयार किए गए। एक अधिकारी ने कहा कि 1 दिसंबर 2025 को 24 आवेदन एक ही मोबाइल नंबर से आए, लेकिन पुलिस ने 20 दिसंबर को जांच शुरू की। पते पर जाकर देखा तो कोई निवासी नहीं मिला। सभी दस्तावेज फर्जी थे, जो एजेंटों ने तैयार कराए।

दिल्ली के कुतुब विहार निवासी विवेक गांधी और छतरपुर के प्रकाश शुक्ला मुख्य एजेंट हैं, जिन्होंने पैसे लेकर यह सब रचा। अब जांच एजेंसी फर्जी दस्तावेजों के स्रोत और इस्तेमाल के मकसद की पड़ताल कर रही है। आशंका है कि ये पासपोर्ट किसी बड़े अपराध या विदेश भागने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं।

30 मोबाइल नंबर्स पर नजर: एजेंटों से पुलिसकर्मियों तक लिंक

भोजपुर क्षेत्र के फर्जी पासपोर्ट मामले में पुलिस 30 से ज्यादा मोबाइल नंबर्स की डिटेल खंगाल रही है। इनमें एजेंट विवेक गांधी और प्रकाश शुक्ला से जुड़े नंबर, पुलिसकर्मी, डाक विभाग के लोग और आवेदक शामिल हैं। एक ही नंबर पर कई आवेदन दर्ज होने से संदेह गहरा गया। चार पुलिस टीमें 22 फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। गिरफ्तारियों के बाद साफ होगा कि फर्जी पासपोर्ट किस मकसद से बनवाए गए। दिल्ली इंटेलिजेंस का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह का काम है।

अफगानी कनेक्शन: 35 साल से भारत में, फिर भी फर्जी दस्तावेज

गिरफ्तार अमनदीप और सतवंत कौर मूल रूप से अफगानिस्तान के हैं, जो पिछले 35 साल से दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाए। यह कनेक्शन जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। विवेक गांधी और प्रकाश शुक्ला ने सभी से पैसे लेकर दस्तावेज तैयार कराए। पोस्टमैन अरुण को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

भोजपुर-त्योड़ी क्यों चुना? सिख नाम, मुस्लिम गांव का रहस्य

सवाल उठ रहा है कि फर्जीवाड़े के लिए भोजपुर और त्योड़ी जैसे मुस्लिम बहुल गांव क्यों चुने गए? इन गांवों में एक भी सिख परिवार नहीं रहता, लेकिन पासपोर्ट ज्यादातर सिख नामों पर बने। पुलिस इस पर गहन जांच कर रही है। आशंका है कि गांवों का चयन इसलिए किया गया ताकि सत्यापन में आसानी हो। थाना स्तर पर गलत पते पर रिपोर्ट कैसे पास हुई, यह पुलिस के लिए ही सवाल बन गया है।

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