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Tuesday, April 16, 2024

दिल्ली की गुरजीत कौर ने जीता सुनख्खी पंजाबन प्रतियोगिता

नई दिल्ली/ प्रज्ञा शर्मा:  भारतीय विद्या पीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन एंड मैनेजमेंट, पश्चिम विहार पूर्व में सुनख्खी पंजाबन सीजन-4 प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुनख्खी पंजाबन दिल्ली की पहली पंजाबी सौंदर्य प्रतियोगिता है, जिसमें दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा से लड़कियों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में दिल्ली की गुरजीत कौर ने प्रथम स्थान हासिल किया। पहली रनरअप अर्षप्रीत कौर और दूसरी हर्षदीप कौर रहीं। प्रतियोगिता की आकर्षण छह विवाहित महिलाएं रहीं, जिसमें दो गृहिणी थीं।

-पहली रनरअप अर्शप्रीत कौर और दूसरी हर्षदीप कौर रहीं
-प्रतियोगिता की आकर्षण छह विवाहित महिलाएं रहीं, जिसमें दो गृहिणी थीं

   बता दें कि पंजाबी महिलाओं की प्रतिभा को उजागर करने के लिए सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इसमें भाग लेने की आयु सीमा 18-38 के बीच है। साथ ही, प्रतिभागियों को पंजाबी पढऩा, लिखना और बोलना आना चाहिए।  इस कार्यक्रम के जरिये महिला सशक्तिकरण को बढ़ाना एवं युवतियों को एक नई उड़ान के साथ पंजाबी संस्कृति के मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास किया। कार्यक्रम में पंजाबी लड़कियों ने फुलकारी लेकर मंच को खूबसूरत बनाया और 20 लड़कियों ने अपनी खूबसूरती और प्रतिभा का परचम लहराया। इस कार्यक्रम के माध्यम से  एक से बढ़कर एक प्रतिभा देखने को मिली। इस दौरान पंजाबी लोक नृत्य और टैलेंट राउंड में सब सुनख्खी पंजाबनों ने अद्भुत और आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
  इस कार्यक्रम में पंजाबी सिनेमा और रेडियो की हस्तियां मौजूद रहीं। विजेताओं को पुरस्कार में नकद इनाम के साथ फिल्म में काम करने का अवसर देने का वादा किया गया, जिससे प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखने को मिला।
  कार्यक्रम की आयोजक डा. अवनीत कौर भाटिया के मुताबिक सुनख्खी पंजाबन के पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली लड़कियों को स्वर्ण के सग्गी फूल से पुरस्कृत किया जाता है। साथ ही इस वर्ष उनको कैलेंडर फोटोशूट, ब्रांड मैनेजर बनने का मौका, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की ट्रिप और अमृतसर की ट्रिप दी गई। यही नहीं पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाली लड़कियो को सग्गी फुल दिया  गया। पंजाबी पोशाक पहने लड़कियों ने भांगड़ा, गिद्दा के साथ साथ विभिन्न प्रकार का अभिनय प्रस्तुत किया।
 अवनीत कौर के मुताबिक इस अनोखे कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में हुई थी। इसके जरिये पंजाबी कला और उसकी सांस्कृतिक विरासत को इस कार्यक्रम के माध्यम से संचित रखने और प्रसारित करने की भरपूर कोशिश की जा रही है। 

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