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Sunday, March 7, 2021

रसोई में महंगाई की आग से गडबड़ाया गृहणियों का बजट

-तेल से रेल तक व चायपत्ती, साबुन, हॉरलिक्स, बिस्किट सब महंगा
-बढ़ी कीमतों से सर्दी में भी छूट रहे पसीने
-बाजार से हर आम-ओ-खास सब परेशान, खाने की थाली हुई बेस्वाद

(सुरेश गांधी)

खाद्य सामाग्रियों से लेकर जलावन तक की बढ़ी कीमतों से माघ की कड़कडउआ सर्दी में भी लोगों को पसीने छूट रहे है। खास यह है कि गृहणी से मंत्री तक का सफर तय कर चुकी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण भी लोगों को राहत हीं दे सकी। परिणाम यह है कि कोरोना संक्रमण के बीच महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। खाद्यान्न से लेकर जलावन तक सब महंगे हो गए हैं। बिजली, पानी, मोबाइल, डीटीएच, पार्लर, सिनेमा और होटल के बिलों से लेकर रेल और हवाई टिकट भी महंगे हो गए हैं। सिलेंडर, प्याज, अरहर दाल, पेट्रोल, डीजल और दूध के दाम तो लोगों के किचेन का बजट ही गड़बड़ा दिया है। मतलब साफ है खाना, सफर, इलाज सब महंगा हो गया है। लोगों को उम्मींद थी कि कोरोना संकट में तबाह हुए लोगों की आर्थिक गतिविधियों इस बजट में सुधरेगी, लेकिन सीतारमण ने उम्मींदों पर पानी फेर दिया। हाल यह है कि रोजमर्रा की सामानों की बेतहाशा बढ़ी कीमतों ने गरीब एवं अल्प आय वर्ग के परिवार ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

बता दें, पिछले एक साल में आम आदमी का खर्च 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। सफर करने से लेकर इलाज और रसोई तक में महंगाई की आग लगी है। पिछले एक साल में ही खाद्य सामग्री की कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं। फरवरी 2020 से फरवरी 2021 की तुलना करें, तो दाल की कीमत में 30 प्रतिशत (10 से 25 रुपये) तक की वृद्धि दर्ज की गयी है। वहीं, सरसों तेल में 20 से 28 प्रतिशत और रिफाइंड तेल में 12.59 प्रतिशत से लेकर 22़ 85 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। गैस सिलिंडर की कीमत तो रसोई की खुशियों में आग लगा रही है। एक साल में रसोई गैस 162़ 31 रुपये प्रति सिलिंडर महंगा हुआ है। अब एक सिलिंडर के लिए उपभोक्ता को 576़ 43 रुपये की जगह 738़ 74 रुपये देना पड़ रहा है। एक साल पहले फरवरी, 2020 में ही 14़ 2 किलो नॉन सब्सिडी सिलिंडर के लिए 776 रुपये देने पड़ते थे। वर्तमान में इसकी कीमत 776 रुपये ही है। पिछले साल फरवरी 2020 में घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 576 रुपये थी और खाते में सब्सिडी के 199 रुपये मिल जाते थे। लेकिन एक साल बाद फरवरी 2021 में सिलिंडर की कीमत 738 रुपये है और खाते में सब्सिडी के मात्र 37 रुपये दे रही है सरकार।

रिफाइंड व सरसों तेल के दाम बढ़ने से मुश्किल हुआ तड़का

सरसों के तेल, रिफाइंड और चाय की पत्ती पर महंगाई की मार पड़ी है। इनकी कीमतों में चुपके से हुई बढ़ोतरी ने सर्दी के इस मौसम में रसोई को बेस्वाद कर दिया है। गर्म चाय, पकौड़े और दाल फ्राई के शौकीन मन मसोस कर रह जा रहे हैं। कारण साफ है, एक महीने में 15 से 25 फीसद तक कीमत बढ़ी है। आलू समेत अधिकांश सब्जियां सस्ती हैं, लेकिन गृहणियां सब्जी बनाने से पहले उसमें लगने वाले रिफाइंड व तेल की सोच हाथ खींचने को मजबूर हैं। यही हाल चाय का है। कंपनियों के साथ ही लोकल चाय की पत्ती पर एक महीने में 60 से 100 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। इस कारण लोगों ने चाय में कटौती करना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि मांग अधिक और आवक कम होने के कारण इन चीजों पर महंगाई आई है। मार्च, अप्रैल में सरसों की कटाई होने के बाद तेल और रिफाइंड की कीमतों में कमी आ सकती है। गृहणियों का कहना है कि आलू, धनिया, मिर्च सस्ता है, लेकिन तेल और रिफाइंड महंगे होने से आलू के पराठे, पकौड़े और टिक्की बनाने से पहले बजट देखना पड़ रहा है। एक महीने में भाव आसमान पर पहुंच गए हैं। सर्दी के इस मौसम में चाय बनाना भी मुश्किल हो गया है। चाय की पत्ती पर 15 दिन में 50 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कीमत बढ़ी है। दाल और सब्जी में तड़का लगाने से पहले सोचना पड़ता है।

पेट्रोल डीजल की बढ़ी कीमत हर सेक्टर प्रभावित

पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही है। पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमत से बाजार संभल नहीं पा रहा है। एक साल में पेट्रोल 13़ 39 और डीजल 13़ 40 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है। इससे अलग-अलग सेक्टर प्रभावित हुए हैं। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ने से चीजों पर इसका असर पड़ा है। इससे ट्रांसपोर्ट की लागत भी बढ़ी है। ऑटो से लेकर बड़ी-बड़ी गाड़ियों का किराया बढ़ गया है। किराया बढ़ने से सामान की कीमतें बढ़ गई है। हाल यह है कि महंगाई में घर चलाना कठिन हो गया है। कलावती का कहना है कि बढ़ी कीमतों से खर्च दोगुना होता जा रहा है। खर्च रोकने के लिए कई चीजों में कटौती करनी पड़ रही है। राशन दूध आदि में कटौती करनी पड़ रही है। सरकार मध्यम वर्ग के लोगों पर ध्यान नहीं दे रही है। कोरोना काल के बाद से घर का खर्च बढ़ता चला जा रहा है। कमाई से ज्यादा खर्च हो रहा है।

दवा की कीमत से मरीज परेशान

दवा की कीमत से मरीज परेशान है। कोरोना के बाद दवाओं की कीमतें 40 फीसदी तक बढ़ी है। कोरोना महामारी के बाद सामान्य बीमारी जैसे एलर्जी गैस्ट्रिक बुखार खांसी की दवा एंटीबायोटिक की कीमतों में 40 फीसदी तक की वृद्धि हो गई है। मौसम में बदलाव होने पर कई लोग सामान्य बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के परामर्श के बाद दवा खरीदते वक्त मरीजों के पहले से ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है।

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