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Sunday, June 23, 2024

Election Commission ने लोकसभा चुनाव पर जारी किया एटलस, मिलेगी ऐतिहासिक जानकारी

– मानव इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद थी 2019 का लोकसभा चुनाव
-10.378 लाख मतदान केंद्रों पर 61.468 करोड़ मतदाताओं ने लिया था भाग
— एटलस में 42 थीम आधारित मानचित्र और 90 सारणियां उपलब्ध
—मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, राजीव कुमार, अनूप चंद पाण्डेय रहे मौजूद

नई दिल्ली/ खुशबू पाण्डेय : केंद्रीय चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनाव पर एक एटलस लांच किया, जिसमें इस बड़ी चुनावी कवायद के सभी आंकड़े मौजूद हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र और निर्वाचन आयुक्तों राजीव कुमार तथा अनूप चंद्र पांडेय ने बताया कि इसमें 42 थीम आधारित मानचित्र और 90 सारणियां हैं। एटलस में भारत में चुनाव के संबंध में रोचक तथ्य और कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी है। इस मौके पर सुशील चंद्र ने इस अभिनव दस्तावेज को संकलित करने के लिए आयोग के अधिकारियों की सराहना की और उम्मीद जताई कि यह शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को भारतीय चुनावों के विशाल परिदृश्य को बेहतर तरीके से जानने के लिए प्रेरित करेगा। एटलस में इस महत्वपूर्ण घटना के सभी डेटा और सांख्यिकीय आंकड़े शामिल हैं। इसमें 42 विषयगत नक्शे और 90 तालिकाएं हैं जो चुनाव के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। एटलस भारतीय चुनावों से जुड़े रोचक तथ्य, घटना और कानूनी प्रावधान भी साझा करता है।

Election Commission ने लोकसभा चुनाव पर जारी किया एटलस, मिलेगी ऐतिहासिक जानकारी
केंद्रीय चुनाव आयोग 1951-52 में हुए पहले लोकसभा चुनावों से ही पुस्तिकाओं के रूप में चुनावी आंकड़े प्रकाशित कर रहा है। उसने कहा कि 2019 में हुआ 17वां लोकसभा चुनाव मानव इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद थी, जिसमें भारत के 32 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले 10.378 लाख मतदान केंद्रों पर 61.468 करोड़ मतदाताओं ने भाग लिया। एटलस उन 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े जैसी प्रमुख विशेषताओं को दर्शाता है, जहां महिलाओं द्वारा किए गए मतदान का प्रतिशत पुरुषों के मतदान प्रतिशत से ज्यादा था। साथ ही यह मतदाताओं, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन सहित अन्य मापदंडों के लिहाज से सबसे बड़े और सबसे छोटे संसदीय क्षेत्र के बारे में जानकारी जैसी विशेषताएं भी पेश करता है।

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एटलस अलग-अलग श्रेणियों में और विभिन्न आयु वर्गों के मतदाताओं एवं मतदाता लिंग अनुपात जैसी विभिन्न तुलनात्मक सूचियों के माध्यम से मतदाताओं के आंकड़े को दर्शाता है। 2019 के आम चुनावों में भारतीय चुनावों के इतिहास में सबसे कम लैंगिक अंतर देखा गया। मतदाता लिंग अनुपात, जिसने 1971 से सकारात्मक रुझान दिखाया है, 2019 के आम चुनावों में 926 था।
एटलस 2014 और 2019 के आम चुनावों के दौरान विभिन्न राज्यों में प्रति मतदान केंद्र के लिहाज से मतदाताओं की औसत संख्या की तुलना भी करता है। भारत के चुनाव आयोग ने आम चुनाव 2019 में 10 लाख से अधिक मतदान केंद्रों की स्थापना की, जहां प्रति मतदान केंद्र के लिहाज से सबसे कम मतदाता (365) अरुणाचल प्रदेश में थे।
चुनाव आयोग के प्रवक्ता के मुताबिक विभिन्न अन्य श्रेणियों में, एटलस 1951 के बाद से आम चुनावों में खड़े होने वाले उम्मीदवारों की संख्या की तुलना करता है।

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2019 के आम चुनाव में, देश भर में दाखिल किए गए कुल 11,692 नामांकनों में से नामांकन रद्द किए जाने और नाम वापस लेने के बाद 8,054 योग्य उम्मीदवार थे।
आयोग ने 543 संसदीय क्षेत्रों के निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए चुनावी आंकड़ों के आधार पर सांख्यिकीय रिपोर्ट जारी की। इस एटलस में पेश किए गए नक्शे और तालिकाएं उस जानकारी को दर्शाते हैं और देश की चुनावी विविधता की बेहतर समझ के लिए जानकारी प्रदान करते हैं। आकंड़े को संदर्भ के हिसाब से पेश करने के अलावा, ये विस्तृत नक्शे विभिन्न स्तरों पर चुनावी तरीके को दर्शाते हैं और साथ ही इसकी स्थानिक और अस्थायी समायोजन को दिखाते हैं। चुनावी आंकड़े की बेहतर परिकल्पना और प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से, यह एटलस एक सूचनात्मक और सचित्र दस्तावेज के रूप में कार्य करता है जो भारतीय चुनावी प्रक्रिया की बारीकियों को प्रकाश में लाता है और पाठकों को रुझानों एवं परिवर्तनों का विश्लेषण करने के लिए सशक्त बनाता है।

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