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Wednesday, September 29, 2021
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भारत के लिए रोल मॉडल बनेगा केरल का बायो-बबल टूरिज्म

—केरल सुरक्षित और जोखिम-मुक्त पर्यटन पर ध्यान केंद्रित कर रहा
—केरल ने पर्यटकों को आमंत्रित करने और उनकी मेजबानी करने के लिए तैयार

तिरुवनंतपुरम /टीम डिजिटल : कोविड-19 से पर्यटकों को पूरी तरह से बचाने के लिए पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल स्थापित करते हुए, केरल ने पर्यटकों को आमंत्रित करने और उनकी मेजबानी करने के लिए टीके लगवाए हुए ज्यादातर सेवा प्रदाताओं की सुरक्षात्मक कवच तैयार करने के लिए एक कुशल और अत्यंत कारगर बायो-बबल मॉडल तैयार किया है। बायो-बबल सैनिटाइज किया हुआ पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण है जहां पर्यटकों के संपर्क में आने की संभावना वाले लोगों को टीका लगाया गया है।
बायो-बबल की सुरक्षात्मक रिंग यह सुनिश्चित करती है कि केरल के किसी भी हवाई अड्डे पर उतरने वाले पर्यटक केवल उन्हीं ग्राउंड स्टाफ से मिलें जिन्होंने पहले से टीका लगाया हुआ है। हवाई अड्डे से वे ऐसे कैब में अपने चुने हुए पर्यटन स्थलों के लिए जा सकते हैं जो मान्यता प्राप्त टूर ऑपरेटरों द्वारा उपलब्ध कराये जाते हैं जिनके सभी ड्राइवरों को टीका लगाया गया है। उन्हें उसी होटल, रिसॉर्ट या होम स्टे में ले जाया जाता है जहां कर्मचारियों को टीका लगाया गया हो।
केरल में सभी पर्यटन केंद्र सोमवार को फिर से खुल गए।

वहां उन पर्यटकों को ही जाने की अनुमति होगी जिन्होंने कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ले लिया है या जिनके पास 72 घंटे पहले का निगेटिव आरटीपीसीआर टेस्ट सर्टिफिकेट है। यह होटल, रिसॉर्ट, होम स्टे, हाउसबोट और पर्यटकों की रुचि के खुले स्थानों पर लागू होता है।
केरल ने पर्यटन स्थलों में पूरी आबादी का टीकाकरण करने के लिए एक बेहद सफल, लक्षित अभियान शुरू किया है जिसमें वायनाड में व्याथिरी को यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला पर्यटन स्थल घोषित किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य पर्यटन उद्योग में पूरे हितधारकों को शामिल करना है और यह अभियान जल्द ही राज्य भर के सभी पर्यटन स्थलों में पूरा किया जाएगा।
बायो-बबल मॉडल केरल के पर्यटन मंत्री पी़ ए मोहम्मद रियास द्वारा सभी पर्यटन स्थलों को शत-प्रतिशत सुरक्षित क्षेत्र बनाते हुए महामारी से तबाह पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के शीघ्र पुनरुद्धार के लिए शुरू की गई सुनियोजित और समयबद्ध योजनाओं का एक हिस्सा है।
मोहम्मद रियास ने कहा, जहां तक केरल पर्यटन का संबंध है, मेहमानों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो रहा है। बायो-बबल पहल यह सुनिश्चित करता है कि पर्यटक हमारे राज्य में पूरी तरह से जोखिम-मुक्त रहें। यह पर्यटन के पुनरुद्धार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है जिसे महामारी ने अपनी चंगुल में जकड़ लिया है। इस व्यापक परिप्रेक्ष्य के साथ ही हमने व्याथिरी में पूरी आबादी को शामिल करते हुए टीकाकरण अभियान को सफलतापूर्वक चलाया। यह पहल दुनिया को बताएगी कि केरल एक ऐसी जगह है जहां आप सुरक्षित रूप से छुट्टियां मना सकते हैं।यह कार्यक्रम पर्यटकों को बिना किसी चिंता के सुरक्षित क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से घूमने में उसी समय से सक्षम करेगा जब वे राज्य में पहुंचेंगे। वे पूरे आत्मविश्वास के साथ सभी अवकाश गतिविधियों में संलग्न हो सकते हैं जैसे कि समुद्र तटों पर टहलना, स्ट्रेचिंग करना और बैठना, शांत पानी में तैरना, जंगल की पगडंडियों पर ट्रेकिंग करना, बैक वाटर पर क्रूजिंग और गांवों में घूमना।
केरल सरकार के पर्यटन के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ वेणु वी ने कहा, “केरल पर्यटन ने बाढ़ और महामारी जैसी विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं जैसे गंभीर संकटों को पार कर लिया है जिसने इसके इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। हम हर संकट से निपटकर कामयाब साबित हुए हैं। हालांकि हम इस बात से सहमत हैं कि कोविड-19 महामारी अपने प्रभाव और आयाम में काफी आक्रामक रही है। इस महामारी के झटके से बाहर आने का सबसे अच्छा तरीका पर्यटकों की सुरक्षा पर उच्चतम प्रीमियम निर्धारित करना है।

केरल में पर्यटकों के लिए अपार संभावनाएं : पर्यटन निदेशक

केरल के पर्यटन निदेशक वी आर कृष्ण तेजा ने कहा, जब विश्व और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन खुल जाएगा तो दुनिया के सभी कोनों से लॉकडाउन से थके हुए लोग सुरक्षित और स्वस्थ स्थानों की ओर जायेंगे। हमारी प्राकृतिक संपत्ति और उन्नत सामाजिक परिवेश के अनुसार, केरल में आने वाली भीड़ को प्रदूषण रहित और कम भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर ले जाने की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के पर्यटन क्षेत्र को तैयार रखने के लिए बायो-बबल जैसे सुरक्षा कवच का निर्माण एक महत्वपूर्ण घटक है। केरल सरकार द्वारा कम से कम संभव समय में पूरी पात्र आबादी को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित करने के साथ, पूरे राज्य में कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम तेज गति से आगे बढ़ रहा है। अब तक राज्य की कुल आबादी के 43.37 प्रतिशत से अधिक लोगों को टीके की पहली डोज और 18.08 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज दी जा चुकी है।

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