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Tuesday, January 20, 2026

‘जिंदगी आज भी अधूरी है’… दिवंगत बेटे आयुष की याद में टूटे शेखर सुमन, छलका दर्द

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अभिनेता शेखर सुमन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने दिवंगत बेटे आयुष सुमन को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने लिखा कि बेटे के बिना उनकी जिंदगी आज भी अधूरी लगती है और खोने का दर्द अब तक ताजा है। इस दौरान उन्होंने अपने छोटे बेटे अध्ययन सुमन के जन्मदिन पर भी दिल छू लेने वाला संदेश दिया, जिससे फैंस भावुक हो गए। यह पोस्ट परिवार के दर्द और प्यार को बयां करती है, जो लोगों के दिल को छू गया है।

दिवंगत बेटे आयुष को याद करते हुए पोस्ट

शेखर सुमन ने इंस्टाग्राम पर आयुष की पुरानी तस्वीर शेयर की। कैप्शन में उन्होंने लिखा, “मेरे फरिश्ते आयुष को याद कर रहा हूं। हर पल तुम्हें मिस करता हूं मेरे बच्चे। तुम्हारे बिना जिंदगी अधूरी है। बहुत कम समय में तुमने हमें इतनी सारी खुशियां दीं। तुम्हें खोने के इस दर्द से हम आज तक बाहर नहीं आ पाए हैं। लेकिन तुम भगवान और परियों के साथ एक बेहतर दुनिया में हो।”

यह पोस्ट पढ़कर फैंस ने उन्हें ढेर सारा प्यार और समर्थन दिया। कई लोगों ने कमेंट्स में लिखा कि उनका दर्द समझ आता है।

आयुष की बीमारी और अलविदा

आयुष सुमन का जन्म 1984 में हुआ था। मात्र 11 साल की उम्र में 3 अप्रैल 1995 को उन्होंने दुनिया छोड़ दी। वजह थी एक दुर्लभ दिल की बीमारी एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस (EMF)। इस बीमारी में दिल की अंदरूनी परत सख्त हो जाती है और दिल ठीक से काम नहीं कर पाता। शेखर सुमन ने कई इंटरव्यू में बताया कि वे इस सदमे से उबर नहीं पाए।

बेटे की बीमारी के दौरान का दर्द भरा पल

शेखर ने एक इंटरव्यू में याद किया कि आयुष बहुत बीमार था। भारी बारिश के दिन एक डायरेक्टर ने उन्हें शूटिंग के लिए बुलाया। आयुष ने हाथ पकड़कर कहा, “पापा मत जाओ प्लीज।” लेकिन काम के दबाव में शेखर गए। बाद में वे इस पल को कभी नहीं भूल पाए। बेटे के जाने के बाद उनका भगवान पर विश्वास डगमगा गया। उन्होंने घर का मंदिर बंद कर दिया और मूर्तियां बाहर फेंक दीं। कहा, “मैं उस भगवान के पास नहीं जाऊंगा जिसने मेरे मासूम बच्चे की जान ली।”

छोटे बेटे अध्ययन पर परिवार की उम्मीद

आयुष के बाद अध्ययन सुमन परिवार की ताकत बने। शेखर ने अध्ययन के जन्मदिन पर लिखा कि वे मेहनत से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और आगे अच्छा समय आएगा। अध्ययन ने भी ‘हीरामंडी’ में अपने पिता के साथ काम किया, जो परिवार के लिए खास रहा।

शेखर सुमन का यह दर्द लाखों माता-पिता के दिल की बात करता है। सालों बीत जाने के बाद भी बेटे की यादें ताजा रहती हैं।

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