Ayurveda for UTI : महिलाओं में बार-बार यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसे चिकित्सा जगत में ‘साइलेंट एपिडेमिक’ भी कहा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, जीवनकाल में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को कम से कम एक बार यूटीआई होता है, जबकि 20-30 प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या बार-बार लौटती है।
महिलाओं के मूत्रमार्ग की छोटी लंबाई और गुदा के निकट होने के कारण बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं। मेनोपॉज में एस्ट्रोजन की कमी, पानी कम पीना, पेशाब रोकना, सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग और माहवारी के दौरान स्वच्छता की कमी जैसे कारक खतरा बढ़ाते हैं।
बार-बार यूटीआई (UTI) होने के मुख्य कारण
यूटीआई (UTI) मुख्यतः ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया से होता है। आयुर्वेद में इसे ‘मूत्रकृच्छ्र’ या ‘पित्तज मूत्रकृच्छ्र’ कहा जाता है, जो पित्त दोष के असंतुलन से जुड़ा होता है। अधिक तीखा, खट्टा, नमकीन या गर्म भोजन, अपच और गलत खान-पान से पित्त बढ़ता है, जिससे मूत्राशय में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट या कमर में दर्द जैसी शिकायतें होती हैं।
यूटीआई (UTI) के प्रमुख लक्षण
- पेशाब करते समय जलन या दर्द
- बार-बार पेशाब आने की इच्छा
- पेशाब कम मात्रा में आना
- पेशाब बादल जैसा या बदबूदार होना
- कभी-कभी बुखार या कमर दर्द
आयुर्वेद में यूटीआई (UTI) का प्रबंधन
आयुर्वेद में यूटीआई के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मूलेशन का उपयोग पित्त को शांत करने, मूत्र प्रवाह बढ़ाने और संक्रमण को नियंत्रित करने में सहायक होता है। ये उपाय बैक्टीरिया को बाहर निकालने और मूत्र प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। प्रमुख आयुर्वेदिक विकल्प इस प्रकार हैं:
- चंद्रप्रभा वटी: मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत करती है और जलन कम करती है।
- गोक्षुरादि गुग्गुल: पेशाब की मात्रा बढ़ाकर बैक्टीरिया को फ्लश करने में सहायक होता है।
- नीरी सिरप: तुरंत राहत प्रदान करता है और संक्रमण को किडनी तक फैलने से रोकता है।
- चंदनासव: शरीर की गर्मी कम करता है और पेशाब में जलन को शांत करने में प्रभावी माना जाता है।
इसके अलावा, पुनर्नवा, वरुण और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियां एंटी-इंफ्लेमेटरी और डाइयूरेटिक गुणों से मूत्र प्रणाली की सुरक्षा बढ़ाती हैं।
तुरंत राहत के लिए घरेलू उपाय
आयुर्वेद में सुबह धनिया के बीज और मिश्री का पानी पीने की सलाह दी जाती है। यह पित्त को शांत करता है और जलन में आराम देता है।
यूटीआई से बचाव के उपाय
- पर्याप्त पानी (8-10 गिलास) पीना
- पेशाब को कभी न रोकना
- अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता रखना
- तीखे-भारी भोजन से परहेज
- नियमित जीवनशैली अपनाना
यदि समस्या बार-बार हो रही है या गंभीर लक्षण हैं, तो डॉक्टर या योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। आयुर्वेदिक उपचार सुरक्षित और सहायक होते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार ही अपनाएं।
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