गर्भासन योग: पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से राहत पाने के लिए गर्भासन योगासन एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। कई महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट में तेज दर्द, ऐंठन और सूजन की समस्या होती है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। बार-बार पेनकिलर लेने की बजाय योग के जरिए प्राकृतिक रूप से राहत मिल सकती है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (MDNIY) ने गर्भासन को महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताया है, खासकर गर्भाशय को स्वस्थ रखने, मासिक चक्र को नियमित करने और पीरियड्स के दर्द में कमी लाने में। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और शरीर-मन में संतुलन बना रहता है।
पीरियड्स के दर्द में गर्भासन क्यों उपयोगी है
गर्भासन, जिसे भ्रूण मुद्रा भी कहा जाता है, शरीर को भ्रूण जैसी स्थिति में लाता है। यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाता है, मांसपेशियों को आराम देता है और हार्मोनल संतुलन में मदद करता है। MDNIY के अनुसार, यह गर्भाशय को मजबूत बनाता है और अनियमित मासिक धर्म की समस्या में सुधार ला सकता है। हालांकि, यह कोई चमत्कारी इलाज नहीं है, बल्कि नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे फायदा दिखता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह तनाव और चिंता कम करने में भी सहायक होता है, जो पीरियड्स के दौरान दर्द को और बढ़ा सकता है।
गर्भासन कैसे करें: स्टेप बाय स्टेप तरीका
इस आसन को सही तरीके से करने के लिए पहले तैयारी जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहले कुछ दिनों तक कुक्कुटासन का अभ्यास करें, क्योंकि गर्भासन में पद्मासन की स्थिति आती है और संतुलन महत्वपूर्ण होता है।
- सबसे पहले फर्श पर मैट बिछाकर पद्मासन में बैठें (एक पैर को दूसरे की जांघ पर रखें)।
- दोनों हाथों को जांघों और पिंडलियों के बीच से डालें।
- कोहनियों को बाहर की ओर मोड़ते हुए दोनों हाथों से कान पकड़ने की कोशिश करें।
- पूरा भार कूल्हों पर रखें और शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
- क्षमता के अनुसार 30 सेकंड से 1 मिनट तक रुकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आएं।
सुबह खाली पेट अभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है। शुरुआत में कम समय से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं।
सावधानियां और कब न करें
गर्भासन एक उन्नत आसन है, इसलिए गर्दन, कंधे, कमर या घुटनों में कोई समस्या हो तो डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें। गर्भावस्था के दौरान इसे न करें। यदि पद्मासन में दिक्कत हो तो जबरदस्ती न करें, इससे चोट लग सकती है। हमेशा शरीर की सीमा का ध्यान रखें।
नियमित अभ्यास से शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक शांति भी मिलती है। पीरियड्स के दर्द से निपटने के लिए योग एक सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है, लेकिन गंभीर समस्या में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

