– दिन बदले तारीखें बदली –
दिन बदले तारीखें बदली
बदल गए साल दर साल क्रमांक
अंकों के कैलेंडर नुमा
पर हकीकत के धरातल पर
कुछ भी न बदला
न सोच, न व्यवहार, न कर्म, न हालात
गरीब और गरीब, अमीर और अमीर,
बाहुबली और शक्तिशाली
न रुका है दावे, वादों , मतभेदों का शोर,
न आंतकवाद, न शोषण मानसिक, शारीरिक,
न धर्म, आस्था, भाषा, राज्यों, त्योहारों की
आड़ में गुटबाजी, विरोध
न ज़मीनी स्तर पर कोई बदलाव
न प्राकृतिक आपदाओं, संकटो पर
कहीं भी कोई बदलाव नहीं
बस बदलते दिन ,महीने, साल बन तारीख।।


~मीनाक्षी सुकुमारन