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Wednesday, February 25, 2026

मीनाक्षी सुकुमारन कविता- दिन बदले तारीखें बदली

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– दिन बदले तारीखें बदली –

दिन बदले तारीखें बदली
बदल गए साल दर साल क्रमांक

अंकों के कैलेंडर नुमा
पर हकीकत के धरातल पर

कुछ भी न बदला
न सोच, न व्यवहार, न कर्म, न हालात

गरीब और गरीब, अमीर और अमीर,
बाहुबली और शक्तिशाली

न रुका है दावे, वादों , मतभेदों का शोर,
न आंतकवाद, न शोषण मानसिक, शारीरिक,

न धर्म, आस्था, भाषा, राज्यों, त्योहारों की
आड़ में गुटबाजी, विरोध

न ज़मीनी स्तर पर कोई बदलाव
न प्राकृतिक आपदाओं, संकटो पर

कहीं भी कोई बदलाव नहीं
बस बदलते दिन ,महीने, साल बन तारीख।।

Meenakshi Sukumaran~मीनाक्षी सुकुमारन

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