HomeKavitaमीनाक्षी सुकुमारन कविता- मूर्ख दिवस

मीनाक्षी सुकुमारन कविता- मूर्ख दिवस

- मूर्ख दिवस - कहते हैं ज़िन्दगी बड़ी सरल है पर ये है टेढ़ी मेढ़ी, घुमावदार,जटिल, कठिन ,चुनौतीयों भरी खिली उड़ाती कभी बेबसी का,

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– मूर्ख दिवस –

कहते हैं ज़िन्दगी बड़ी सरल है
पर ये है टेढ़ी मेढ़ी, घुमावदार,

जटिल, कठिन ,चुनौतीयों भरी
खिली उड़ाती कभी बेबसी का,

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कभी नादानियों का, कभी चिंता,
परेशानीयों का

बड़ी बेबरुमद है ये कभी
न रहती एक सी

न ही करती वफ़ा खुलकर
न ही करती बेवफ़ाई खुलकर

बस पहेली सी रहती उलझा
कहती हम हैं सयाने

पर पल बनाती रहती मूर्ख
दे सबक नीत नए

एक दिन नहीं पहली अप्रैल का
जब बनते हम फूल

पूरा जीवन पूरा समय ही
निकल जाता बनते फूल

कभी समय से, कभी रिश्तों से,
कभी जान पहचान,

कभी अंजान लोगों से ….कहते हैं
ज़िन्दगी बड़ी सरल है पर है बड़ी कठिन ,

निर्मोही, बेदिल बनाती मूर्ख हमें
नित नए अंदाज़ में।।

Meenakshi Sukumaran~मीनाक्षी सुकुमारन

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