HomeKavitaनरेश कुमार दुबे कविता- मकर संक्रांति का त्यौहार

नरेश कुमार दुबे कविता- मकर संक्रांति का त्यौहार

– मकर संक्रांति का त्यौहार – मकर संक्रांति का पावन पर्व आई, हर्ष उल्लास उत्साह मन में छाई। आसमानों में रंग बिरंगी पतंग उड़ाई, सद्भावना एकता की मिसाल जगाई। मकर संक्रांति पावन पर्व लाई शुभ संदेश, प्रभु राम द्वारा पतंग उड़ान का कथा विशेष। सूर्य राशि में मकर राशि का होता जब प्रवेश, सूर्य देव […]

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– मकर संक्रांति का त्यौहार –

मकर संक्रांति का पावन पर्व आई,
हर्ष उल्लास उत्साह मन में छाई।
आसमानों में रंग बिरंगी पतंग उड़ाई,
सद्भावना एकता की मिसाल जगाई।

मकर संक्रांति पावन पर्व लाई शुभ संदेश,
प्रभु राम द्वारा पतंग उड़ान का कथा विशेष।
सूर्य राशि में मकर राशि का होता जब प्रवेश,
सूर्य देव कृपा से दूर होती जीवन का क्लेश।

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एकता भाईचारा मकर संक्रांति का त्यौहार,
धरती मैया करती सूर्य देव को आभार।
नई फसल के आनंदमय से प्रकृति करे श्रृंगार,
सूर्य देव के उत्तरायण होने जीवन हुआ उद्धार।

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर करें गंगा स्नान,
सूर्य देव को जल अर्पित करके करे आह्वान।
नेक दिली बनके निर्धनों को दे दक्षिणा दान,
तिल गुड़ गजक लड्डू खिचड़ी का बनाएं पकवान।

शीत प्रवाह विदा हुई फागुन की हुई दस्तक,
तिल और गुड सोंधी खुशबू की महक।
सूर्य देव का नाम से घी तिल दान करें चौदह दीपक,
आध्यात्मिक शुद्धि प्रकृति रूपांतरण का कहलाता प्रतीक।

नरेश कुमार दुबे

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