– पैगाम जनवरी के –
स्वागत करो ये नया साल है
आपका यारों क्या ख्याल है।
ठूठ पर है नयी नयी कोपले
यार छाया मौसम ए विसाल है।
घंटी बजते ही दौड़ी किचन से
सजनी को मेहबूब का कॉल है।
चला दिसंबर आइना दिखा के
सपने जनवरी के परी-जमाल है।
हुस्न ए गुलाब सादगी कमाल है
हाथों में मेरा उसका ही रुमाल है।
शीतल सर्दियां घटाए जो दूरियां
दिल की जमीं पे खिलता बहार है।
लबों पे सबके मुस्कान हर पल
दर्द घटे जो बाँटके कहां मलाल है
जाते ही सलाम आते ही पैगाम
सौहार्द प्रेम भाव का नया साल है।


~सुरेश वैष्णव