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Saturday, June 19, 2021
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पीरियड के दौरान महिलाओं से होने वाले व्यवहार और सोच को बदलना जरूरी

—नाटक ध्रुव तारा ने समाज में मिथ को तोड़ते हुए फैलाई जागरूकता
—माहवारी के दौरान महिलाओं का होता है सामाजिक उत्पीड़न

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : कोरोना संक्रमण काल ने कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन और ठहरे हुए वक्त में भी आगे बढ़ने के लिए विविध माध्यमों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है और विशुद्ध रूप से वर्चुअल तकनीक इसमें से सबसे अधिक कारगर साबित हुई है। निष्पादन कलाओं में नृत्य, नाटक, संगीत आदि के प्रदर्शन इस दौरान निरंतर दशकों तक पहुंचते रहे हैं। जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज नई दिल्ली की ड्रामा सोसायटी ‘अनुभूति’ ने भी युवा निर्देशक अमित तिवारी के मार्गदर्शन में इस दौरान न केवल वर्चुअल कार्यशाला और रंगमंच के विविध आयामों के संवाद कार्यक्रम को दर्शकों से परस्पर सांझा किया बल्कि छोटी नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों से संबंध बनाए रखें। इन प्रस्तुतियों में एकल अभिनय व एकालाप किया गया था।

अनुभूति संस्था के अंतर्गत एक नया प्रयोग किया गया नाटक ‘धु्रव तारा’ के माध्यम से, जिसमें वर्चुअल तकनीक के द्वारा प्रत्येक कलाकार अपने-अपने स्थान से जुड़ कर नाटक में समग्र प्रभाव देता हुआ दर्शकों के समक्ष समृद्ध छाप छोड़ता है। यद्यपि कलाकारों की भांति दर्शक भी देश के विभिन्न भागों में बैठकर इस नाटक को अपने मोबाइल, लैपटॉप पर देख रहे हैं अपितु कलाकार और मंच के पीछे के कलाकार जो इस संयोजन को एकरूपता प्रदान कर रहे हैं कहीं भी दर्शकों को ऐसा भाव नहीं होने देता कि यह नाटक विभिन्न जगहों से संचालित किया जा रहा है जोकि वर्चुअल तकनीक का अद्वितीय उदाहरण कहा जा सकता है।

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नाटक में धु्रव की भूमिका निभा रही गार्गी सूद ने अपने घर के कमरे में मंच तैयार किया है जबकि युवा धु्रव की भूमिका निभा रही और इस नाटक में नरेटर मुस्कान शर्मा, शास्त्री नगर दिल्ली में अपने घर के कमरे से नाटक में जुड़ी है। तारा का अभिनय कर रही उन्नति श्राफ पड़पड़ गंज म्यूर बिहार दिल्ली, गत्तो (निकिता शिसोदिया) गुलाबी बाग दिल्ली, जैनव का किरदार निभा रही मेघा प्रताप नगर दिल्ली, हरियाणवी दादी हर्षिता सेजवाल लाडो सरायं मेहरौली दिल्ली, लेडी पुलिस इशिता बंसल दिल्ली, खुशी दिव्यानी नोएडा उत्तर प्रदेश, खिलाड़ी लड़की अनन्या की भूमिका निभा रही नेहा वर्मा दिल्ली, अक्षिता बत्तरा मेरठ, तनिक्षा हरिद्वार उत्तराखंड, मानसी नई दिल्ली, रूहि की भूमिका निभा रही कृति गोयल चांदनी चैक दिल्ली और गज लक्ष्मी किन्नर की भूमिका निभा रही वर्षा, चिराग दिल्ली से जुड़ी हुई है।

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नाटक का तकनीकी पक्ष संगीत, ध्वनि, विद्युत संचालन तथा वर्चुअल तकनीक से संबंधित सभी क्रिया-कलापों कोे जोड़ते हुए एक मंच प्रदान कर दर्शकों तक पहंुचाने का कार्य मुस्कान शर्मा व प्राची शर्मा द्वारा दिल्ली से संचालित किया गया।
नाटक धु्रव तारा समाज में माहवारी के दौरान महिलाओं के उत्पीड़न और सामाजिक मिथ को तोड़ते हुए जागरूकता प्रदान करता है। इस दौरान महिलाओं की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति चिंता और चिंतन के प्रति लोगों को सोचने पर मजबूर करता है। प्राचीन समय से ध्रुव तारा रात में भटके हुए अथवा अन्य राहगीरों को राह दिखाने का ध्योतक रहा है। इसी को आधार मानते हुए कहानी का ताना-बाना बुना गया और धु्रव भाई और तारा बहन जो कि जुड़वा है ने मिलकर समाज में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं से होने वाले व्यवहार और सोच को बदलने का बीड़ा उठाया।

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धु्रव (बचपन) गार्गी सूद ने अपनी बहन तारा के मासिक धर्म के दौरान होने वाले व्यवहार और शारीरिक कष्ट से चिंतित है दोनों नाटक के कथ्य को बुनते हुए समाज को इस दौरान महिलाओं को अपनाने उनके सम्मान और उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता करने के लिए प्रेरित करते हैं।
ध्रुव गार्गी सूद (बचपन) की भूमिका निभा रही शिमला निवासी का कहना है कि कोरोना काल में समाज के लगभग सभी व्यवसायों एवं वर्गों से जुड़े लोगों को जीविका उपार्जन के लिए सरकारी अनुदान अथवा किसी संस्था से दान प्राप्त हुआ है किंतु कलाकर्म से जुड़े लोगों को इससे वंछित रखा गया लेकिन डिजिटल इंडिया तकनीक की सोच को प्रबलता प्रदान करते हुए वर्चुअल भाव ने लम्बे अंतराल के बाद कलाकारों और दर्शकों के परस्पर संबंधों को पुनः उजागर कर एक मंच प्रदान किया है। गार्गी सूद ने उम्मीद जगाई है कि अभी भी प्रेक्षागृहों में दर्शकों की अधिक उपस्थिति सम्भव नहीं हो पाएगी लेकिन इस तकनीक के माध्यम से कलाकार दर्शकों के एक बड़े वर्ग के साथ जुड़ने में सफल हुआ है।
26 फरवरी, 2021 से 28 फरवरी, 2021 तक अनुभूति द्वारा समसामयिक विषय पर आधारित इस कहानी के 10 प्रदर्शन किए गए, जिसकी विशेषता यह है कि नाटक के सभी पात्र देश के विभिन्न भागों में अपने घरों में बैठकर अभिनय कर रहे हैं और वर्चुअल तकनीक से देश और विदेश के लगभग 1500 से अधिक दर्शकों के साथ जुड़कर नाटक का समग्र प्रभाव छोड़ते हैं।

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