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Monday, July 26, 2021
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बजट सत्र: राष्ट्रपति के अभिभाषण का कांग्रेस सहित 16 विपक्षी दल करेंगे बहिष्कार

-विपक्षी दलों का संयुक्त बयान, तीनों कृषि कानूनों को मनमाने ढंग से लागू किया
– देश की 60 प्रतिशत आबादी पर आजीविका का संकट पैदा हो गया है : विपक्ष
– NCP, नेशनल कांफ्रेंस, DMC, TMC, शिवसेना, SP, RJD, वाम शामिल

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : शुक्रवार को शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण का 16 प्रमुख विपक्षी दलों ने बहिष्कार करने का ऐलान किया है। इसकी अगुवाई खुद कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने वीरवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि राजनीतिक दलों ने कल राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने का बयान जारी किया है। इसका प्रमुख कारण पिछले सत्र में विपक्ष की गैर मौजूदगी में कृषि संबंधित तीन कानूनों को सरकार द्वारा बलपूर्वक पारित कराना है। कल राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ ही बजट सत्र शुरू हो रहा है।
विपक्षी दलों के संयुक्त बयान में कहा गया कि केन्द्र सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को मनमाने ढंग से लागू किया है, जिससे देश की 60 प्रतिशत आबादी पर आजीविका का संकट पैदा हो गया है। इससे करोड़ों किसान और खेतिहर मजदूर सीधे प्रभावित हो रहे हैं। दिल्ली की सीमाओं पर किसान पिछले 64 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और 155 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं।
कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्य सभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, द्रविड मुनेत्र कषगम के टी आर बालू, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, शिवसेना के संजय राउत, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इलावरम करीम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बिनय विस्वम, आईयूएमएल के पी. के. कुंझालीकुट्टी, आरएसपी के एन. के. प्रेमचंद्रन, पीडीपी के नजीर अहमद लावे, मरुमलारची द्रविड मुनेत्र कषगम के वाइको, केरल कांग्रेस के थामस चाजीकदान और अखिल भारतीय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बदरुद्दीन अजमल ने हस्ताक्षर किये हैं।

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बयान में विपक्षी दलों ने सरकार पर किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं देने और उनके आंदोलन के बारे में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि वह किसानों को लाठी, पानी की बौछारों और आंसू गैस के गोले से जवाब दे रही है। प्रधानमंत्री और सरकार पर अहंकारी होने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने कहा है कि वे अडिय़ल और अलोकतांत्रिक रवैया अपनाना रहे हैं, इसलिए सरकार की असंवेदनशीलता को देखते हुए विपक्षी दल सामूहिक रुप से किसानों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हैं और तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं। इसके साथ कांग्रेस समेत 16 विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करने की घोषणा की है। बयान में कहा गया है कि किसानों का आंदोलन पूरी तरह से शांति पूर्ण रहा है लेकिन 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर की गयी हिंसा सर्वदा निदंनीय है। हिंसा में घायल पुलिस कर्मियों के प्रति संवेदना व्यक्त की गयी है। विपक्षी दलों ने कहा है कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा की पूरी तरह से जांच की जानी चाहिए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कृषि कानून राज्यों, और किसान संगठनों से सलाह-मशविरा के बिना पारित किये गये हैं और इन पर राष्ट्रीय सहमति नहीं बनायी गयी है।

शिरोमणि अकाली दल ने भी किया बाईकाट, करेंगे विरोध

एनडीए से अलग हो चुकी शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने भी बजट सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बाईकाट करने का ऐलान किया है। अकाली दल के नेता एवं राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल, बलविंदर सिंह भूदड एवं प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उनकी पार्टी तीनों कृषि कानूनों का आज भी विरोध करती है। पार्टी ने फैसला लिया है कि वह सरकार की तानाशाही के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार करेंगे। शिअद किसानों की पार्टी पहले ही दिन से रही है और आगे भी किसानों के मुद्दे को लेकर आगे बढ़ती रहेगी, इसके लिए चाहे उसे बड़ी से बड़ी कुर्बानी क्यों ना देनी पड़े। सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि कृषि बिलों का उनकी पार्टी पहले दिन से विरोध कर रही है, लेकिन सरकार ने उनकी एक न सुनी। उन्हें बिल का फारमेट तक नहीं दिखाया गया। यहां तक की पहली बार कृषि बिलों को संसद में देखा, तभी से विरोध शुरू कर दिया। बता दें कि कृषि बिलों के विरोध में एनडीए में रही अकाली दल एवं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया था।

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