महाराष्ट्र में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद अल्पसंख्यक विकास विभाग में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 28 जनवरी 2026 को अजित पवार के विमान हादसे में निधन के उसी दिन और अगले कुछ दिनों में विभाग ने 75 शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी किए। राज्य में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित होने के बावजूद ये मंजूरियां तेजी से दी गईं, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन प्रमाणपत्रों पर स्थगिती लगा दी है और जांच के आदेश दिए हैं। महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है।
अजित पवार निधन के बाद अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र विवाद
अजित पवार का निधन 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान हादसे में हुआ था। राज्य सरकार ने 28 से 30 जनवरी तक तीन दिनों का शासकीय दुखवटा घोषित किया था। लेकिन अल्पसंख्यक विकास विभाग (जिसका प्रभार अजित पवार के पास था) में इस दौरान फाइलें तेजी से क्लियर हुईं। अगस्त 2025 से कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था, लेकिन 28 जनवरी से 2 फरवरी तक चार दिनों में 20 संस्थाओं की 75 शालाओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया।
प्रमाणपत्र जारी करने की समयरेखा
28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे पहला प्रमाणपत्र श्री माता कन्या सेवा संस्थान को जारी हुआ, उसी दिन अजित पवार का निधन हुआ। निधन के दिन सात संस्थाओं को मंजूरी मिली। 1 फरवरी (रविवार) को कोई प्रमाणपत्र नहीं जारी हुआ, लेकिन 2 फरवरी को शाम 6:45 और 6:58 बजे तक कुछ मंजूरियां दर्ज की गईं।
कुछ प्रमुख उदाहरण:
- Poddar International School के 25 स्कूलों को एक ही दिन दर्जा मिला।
- St. Xavier’s के पांच स्कूल।
- स्वामी शांति प्रकाश और देवप्रकाश ट्रस्ट के चार स्कूल।
अल्पसंख्यक दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?
अल्पसंख्यक संस्थान बनने पर स्कूलों को कई छूट मिलती हैं:
- RTE के तहत 25% आरक्षित सीटों से छूट।
- शिक्षक भर्ती में TET अनिवार्य नहीं।
- अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं से अतिरिक्त फंडिंग।
- दान और प्रबंधन में ज्यादा स्वतंत्रता।
पूर्व मंत्री मणिकराव कोकटे ने बताया था कि अक्टूबर 2025 में तकनीकी खामियों (जैसे खेल मैदान, खेल शिक्षक आदि) के कारण प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगाई गई थी। बाद में विभाग अजित पवार को सौंपा गया।
आरोप और प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस नेता अक्षय जैन ने आरोप लगाया कि शोक के दौरान मंत्रालय में फाइलें तेजी से निपटाई गईं। महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इसे बड़ा घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन का कुछ लोगों ने फायदा उठाया। आयोग ने पहले भी शिक्षा विभाग में 6000-7000 लोगों की संलिप्तता वाली जांच की मांग की थी। प्यारे खान ने SIT गठन और MOCA के तहत कार्रवाई की बात कही, साथ ही CID जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री का फैसला
विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन 75 प्रमाणपत्रों पर रोक लगा दी है। उन्होंने जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। विपक्ष ने भी जांच की मांग की है।
यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया है, जहां अल्पसंख्यक प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
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