नई दिल्ली, 25 मार्च। पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार ने आज सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अध्यक्षता करेंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर पार्टी नेताओं को ताजा घटनाक्रम और भारत की कूटनीतिक स्थिति की जानकारी देंगे।
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए बयानों के बाद हो रही है, जिसमें उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व संकट बताया था। संघर्ष अब चौथे सप्ताह में है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है।
सर्वदलीय बैठक की तैयारी और उद्देश्य
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों को देखते हुए राजनीतिक नेताओं को ब्रिफिंग देने के लिए यह सर्वदलीय बैठक आयोजित की है। बैठक आज शाम 5 बजे संसद परिसर में होगी। इसमें विदेश नीति और रक्षा तैयारियों पर चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के दोनों सदनों में कहा था कि यह संकट लंबे समय तक असर डाल सकता है, इसलिए सभी पक्षों से सहमति बनाना जरूरी है।
विपक्ष की मांग और प्रतिक्रिया
कांग्रेस समेत विपक्षी दल संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केवल ब्रीफिंग से काम नहीं चलेगा, सदन में पूरी बहस होनी चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय हितों से ज्यादा व्यक्तिगत विचारों से प्रभावित है। हालांकि, उन्होंने सर्वदलीय बैठक का स्वागत किया, लेकिन केरल में पहले से तय कार्यक्रम के कारण शामिल नहीं हो पाएंगे।
उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा
यह बैठक एक दिन पहले हुई उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद हो रही है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख और डीआरडीओ चेयरमैन समीर कामत जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्थिति का आकलन किया और भारत की तैयारियों की समीक्षा की।
आर्थिक और सुरक्षा चिंताएं
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से प्रमुख समुद्री रास्ते बाधित हो रहे हैं, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों में महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता है। सरकार इन मुद्दों पर सभी दलों को विश्वास में लेना चाहती है ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट रुख बना सके।
भारत का रुख और आगे की रणनीति
सरकार का प्रयास है कि इस संकट में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आयात और व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। बैठक में राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही शांति की अपील कर चुके हैं और दुनिया से जल्द समाधान की बात कही है।
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