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Thursday, February 12, 2026

BJP ने पूछा, 2014 से पहले अडानी और अंबानी क्या भीख मांगते थे?

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–भाजपा ने कृषि कानूनों का विरोध करने वालों से पूछे सवाल
–किसी भी तरह का खून-खराबा हुआ तो कांग्रेस होगी जिम्मेदार : गौतम
–पंजाब में किसानों पर हुई बर्बरता की भाजपा ने की भत्र्सना
–कहा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तरह पुलिस प्रशासन ने की ज्यादती

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल : भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुनने के लिए एकत्रित हुए किसानों पर हुए बर्बरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा की है। साथ ही इसके लिए सत्ताधारी दल को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ता की तरह व्यवहार किया और किसानों पर हुए हमले को रोकने की कोई कोशिश नहीं की, उलटे शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हुए किसानों से ही पीछे के रास्ते से निकलने और जगह छोडऩे को कहा। उन्होंने कहा कि हर तरह से पंजाब पुलिस ने प्रधानमंत्री के किसानों के नाम उद्बोधन के कार्यक्रम से किसानों को दूर रखने की कोशिश की और किसानों को हतोत्साहित किया। किसानों द्वारा लगाए टेंट को भी उखाड़ दिया गया और किसानों को उन जगहों से हटा दिया गया।
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में पत्रकारों से बातची करते हुए दुष्यंत गौतम ने कहा कि स्पष्ट है कि जो किसान आंदोलन या किसान गतिविधयां शांतिपूर्ण तरीके से चलाई जा रही है, उसे कांग्रेस खून-खराबे में बदलना चाहती है। कांग्रेस के एक सांसद का भी एक बयान मीडिया में आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 01 जनवरी 2020 के बाद देखिएगा कि किस तरह खून-खराबा होगा, कत्लेआम होगा और लाशें बिछेगी। कांग्रेस नेताओं के ऐसे बयानों के परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि आने वाले समय में किसी भी तरह की हानि हुई या खून-खराबा हुआ तो इसकी जिम्मेवारी केवल और केवल कांग्रेस की होगी, क्योंकि कांग्रेस को खून खराबा करके शासन चलाने की आदत पड़ गई है।

भाजपा के पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि बॉर्डर जाम कर बैठे लोगों में से कुछ बार- बार आरोप लगाते हैं कि हम (बीजेपी) अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने पूछा कि 2014 से पहले अडानी और अंबानी क्या भीख मांगते थे? अडानी और अंबानी के फोटो तो इंदिरा गाँधी से लेकर राजीव गाँधी, कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे कई कांग्रेसी नेताओं और शरद पवार के साथ भी मिलेंगे। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस, एनसीपी से लेकर इन कृषि सुधार कानूनों का आज विरोध कर रहे सभी राजनीतिक दलों ने यूपीए सरकार के समय इन्हीं सुधारों की वकालत की थी, इसका समर्थन किया था लेकिन आज केवल राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए ये इन कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इन कृषि सुधार कानूनों की बात कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में भी की गई थी। आखिर किसानों को अपना फसल देश में कहीं भी बेचने की आजादी क्यों नहीं मिल सकती जबकि गेहूं से बने आंटे और चावल से बने अन्य खाद्य पदार्थ देश में कोई भी, कहीं भी बेच सकता है। पंजाब में किसानों पर दोहरी मार पर रही है। वहां किसानों के हाथ बंधे हुए है।

किसान आंदोलन में बैठे वामपंथी दल सुलह नहीं होने देना चाहते

भाजपा के पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि किसान आंदोलन में जो वामपंथी दल बैठे हुए हैं, वे आपस में सुलह नहीं होने देना चाहते। मोदी सरकार ने लगातार 5-6 बैठकें करके किसानों की हर बात को ध्यान से सुना है। चाहे एमएसपी का विषय हो, मंडी का विषय हो या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बात हो, हर बात पर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने खुले मन से बात की है और संशोधन का लिखित आश्वासन दिया है, लेकिन आंदोलनकारी बोल रहे हैं कि सरकार अडिय़ल है। अडिय़ल हम हैं या वामपंथी किसान संगठन, यह तो देश की जनता तय करेगी।

भाजपा की अपील, विरोध का रास्ता छोड़े विपक्ष एंव किसान

भाजपा नेता ने विपक्ष एवं कृषि सुधार के विरोध में बैठे हुए किसान संगठनों से अपील की कि वे विरोध का रास्ता छोड़ कर देश के किसानों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक साथ आयें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा सरकार एक मजबूत और सशक्त भारत का निर्माण करना चाहती है लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि देश के गाँव, गरीब, किसान और मजदूर सशक्त नहीं होते।

पंजाब के 78 फीसदी लोग कृषि सुधारों का समर्थन में : भाजपा

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव गौतम ने दावा किया कि हाल ही में मीडिया द्वारा कृषि सुधार कानूनों पर किये गए एक सर्वे के अनुसार पंजाब के 78 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे कृषि सुधारों का समर्थन करते हैं। 56 फीसदी लोगों ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एमएसपी पर दिए गए आश्वासन से वाकिफ हैं और उन्हें प्रधानमंत्री की बात पर विश्वास है। इस सर्वे में एक और बात निकल कर आयी कि पंजाब के किसानों ने फसल बेचने के विकल्प का भी समर्थन किया है। इसी तरह 76 फीसदी किसानों ने कहा है कि नए कृषि कानूनों से उन्हें फायदा होगा। देश भर से किसान और किसान संगठन इन नए कृषि सुधार कानूनों का खुल का समर्थन कर रहे हैं, फिर भी हमने किसान संगठनों से उनकी मांगों पर वार्ता का द्वार खुला रखा है।

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