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Wednesday, January 26, 2022
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Farmers Protest: हरसिमरत कौर बादल ने की राष्ट्रपति से मुलाकात, सौपा ज्ञापन

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Indradev shukla

– तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने की जांच के लिए एक संयुक्त चयन कमेटी गठित करने की मांग
– राष्ट्रपति से किसान आंदोलन के शहीदों के परिवारों से मिलने का आग्रह किया
 -विभिन्न पार्टी के सांसदों सहित सात दलों की ओर से राष्ट्रपति को मेमोरेंडम सौंपा

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने आज सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि वे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के इस बयान की जांच कि किसान आंदोलन में किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नही है, की जांच के लिए संयुक्त प्रवर कमेटी गठित करने की सलाह दें। कोविड प्रोटोकॉल के कारण आज राष्ट्रपति से मिलने वाले सांसदों में बलविंदर सिंह भूंदड़, रितेश पांडे (बसपा), हसनैन मसूदी( जे एंड के नेशनल कांफ्रेंस), फैजल मोहम्मद (एनसीपी) शामिल थे। सात पार्टियों के सांसदों ने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

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इस मीटिंग के बारे जानकारी देते हुए सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को यह अवगत कराया कि किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों के सदस्य उनसे मिलना चाहते हैं, और उनसे आग्रह किया कि वे उनसे मिलकर उनसे बातचीत करें। सरदारनी बादल ने राष्ट्रपति को यह भी अवगत कराया कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हालिया बयान कि सरकार के पास किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की मौतों का कोई रिकॉर्ड नही है, से शहीदों के परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होने कहा कि इस बयान को किसान आंदोलन और उसमें शहीद हुए किसानों के बलिदान को  छोटा कर दिखाने की  कोशिश की जा रही है।

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सरदारनी बादल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि शिरोमणी अकाली दल विपक्षी दलों ने तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने पर चर्चा की मांग करने के लिए बार बार स्थगन प्रस्ताव पेश किए थे, लेकिन उन्हे अनुमति नही दी गई। ‘‘ हमने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे सरकार को सलाह दें कि इस सोमवार को ही खेती कानूनों को निरस्त करने की मांग करने के लिए विपक्ष को समय दें। उन्होने सभी पार्टियों से अपने मतभेद छोड़कर , खेती कानूनों को रदद करने की मांग के लिए एकजुट होने की अपील की।

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सरदारनी बादल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने पेगासस सॉफ्टवेयर के माध्यम से राजनेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं सहित नागरिकों की निगरानी के मुददे को भी राष्ट्रपति को अवगत कराया गया। उन्होने कहा कि सांसदों ने कहा कि चूंकि इजरायली कंपनी ने खुलासा किया था कि उसने स्पाइवेयर को केवल सरकारों को बेचा है, इसीलिए सरकार को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा बताना चाहिए कि वह इस तरह की कार्रवाई में क्यों लिप्त है।

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